पाकिस्तान की पुरानी चाल बेनकाब : नरवणे बोले — वैश्विक संघर्षों में अवसर तलाशना इस्लामाबाद की फितरत
सारांश
Key Takeaways
- जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने 25 अप्रैल, गुरुग्राम में पाकिस्तान की अवसरवादी विदेश नीति को बेनकाब किया।
- पाकिस्तान ने सोवियत-अफगान युद्ध और ग्लोबल वॉर ऑन टेरर दोनों में खुद को 'फ्रंटलाइन स्टेट' बताकर फायदा उठाने की कोशिश की।
- ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने पहली बार आतंकी संगठनों के नेतृत्व मुख्यालयों को निशाना बनाया — जो पिछले अभियानों से बड़ा बदलाव था।
- नरवणे ने कहा कि पाकिस्तान की इस नीति के दीर्घकालिक परिणाम हमेशा नकारात्मक रहे हैं।
- अमेरिका-ईरान तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर वही पुराना अवसरवादी पैटर्न दोहरा रहा है।
- भारत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आतंकवाद को पनाह देने पर भारी कीमत चुकानी होगी।
गुरुग्राम, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। भारत के पूर्व थल सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे ने पाकिस्तान की विदेश नीति और रणनीतिक व्यवहार को लेकर एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि वैश्विक तनाव और अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में अवसर तलाशना पाकिस्तान की दशकों पुरानी आदत है, जो आज भी जारी है।
पाकिस्तान का अवसरवादी इतिहास
जनरल नरवणे ने कहा कि यह पाकिस्तान की कोई नई प्रवृत्ति नहीं है। उन्होंने ऐतिहासिक उदाहरण देते हुए बताया कि जब सोवियत संघ ने अफगानिस्तान पर आक्रमण किया था, तब पाकिस्तान ने खुद को एक 'फ्रंटलाइन स्टेट' के रूप में प्रस्तुत किया और अमेरिका के साथ खड़ा हो गया। इससे उसे भारी सैन्य और आर्थिक सहायता मिली।
इसके बाद जब 'ग्लोबल वॉर ऑन टेरर' की शुरुआत हुई, तब भी इस्लामाबाद ने उसी पैटर्न को दोहराया — वाशिंगटन का साथ देते हुए खुद को आतंकवाद विरोधी अभियान का हिस्सा बताया। हालांकि, इस दौरान पाकिस्तानी धरती पर आतंकी संगठनों को पनाह देने के आरोप भी उस पर लगते रहे।
दीर्घकालिक नुकसान और नकारात्मक परिणाम
नरवणे ने यह भी रेखांकित किया कि पाकिस्तान की इस अवसरवादी नीति के दीर्घकालिक परिणाम हमेशा नकारात्मक रहे हैं। उन्होंने कहा कि अल्पकालिक लाभ के लिए बड़े भू-राजनीतिक खेलों में शामिल होने से पाकिस्तान को आंतरिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और वैश्विक अविश्वास का सामना करना पड़ा है।
यह विश्लेषण इस संदर्भ में और भी महत्वपूर्ण हो जाता है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान एक बार फिर उसी पुराने ढर्रे पर चलता दिख रहा है। नरवणे ने कहा कि यह पैटर्न स्पष्ट रूप से दोहराया जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर : भारत का ऐतिहासिक संदेश
पूर्व सेना प्रमुख ने ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि इस बार भारत की रणनीति पहले से बिल्कुल अलग रही। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑपरेशन सिंदूर में केवल आतंकी ठिकानों को नहीं, बल्कि आतंकी संगठनों के नेतृत्व मुख्यालयों को भी निशाना बनाया गया — जो पहले के अभियानों से एक बड़ा और निर्णायक बदलाव था।
उन्होंने रक्षा मंत्री के उस बयान का हवाला दिया जिसमें कहा गया था कि 'हम घर में घुसकर मारेंगे'। नरवणे ने कहा कि इस ऑपरेशन ने पाकिस्तान को एक अत्यंत स्पष्ट और कड़ा संदेश दिया है — यदि वह इस प्रकार की शत्रुतापूर्ण गतिविधियाँ जारी रखेगा, तो उसे भारी कीमत चुकानी होगी।
भारत की बदलती रणनीतिक सोच
विशेषज्ञों का मानना है कि ऑपरेशन सिंदूर भारत की रक्षा नीति में एक नए अध्याय की शुरुआत है। अब भारत केवल प्रतिक्रियात्मक नहीं, बल्कि पूर्वोपाय के तौर पर भी कार्रवाई करने की क्षमता और इच्छाशक्ति रखता है। जनरल नरवणे का यह बयान ऐसे समय में आया है जब पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान तनाव अपने चरम पर है।
आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या पाकिस्तान इस चेतावनी को गंभीरता से लेता है या अपनी पुरानी रणनीति पर ही कायम रहता है। भारत की कूटनीतिक और सैन्य दोनों मोर्चों पर सक्रियता यह संकेत देती है कि नई दिल्ली अब किसी भी उकसावे को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।