नीति आयोग सदस्य बने गोबर्धन दास बोले — पूरे बंगाल का गौरव, विकसित भारत के लिए देंगे योगदान

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नीति आयोग सदस्य बने गोबर्धन दास बोले — पूरे बंगाल का गौरव, विकसित भारत के लिए देंगे योगदान

सारांश

नीति आयोग में गोबर्धन दास की नियुक्ति को बंगाल के लिए ऐतिहासिक सम्मान बताया गया। उन्होंने पीएम मोदी के विकसित भारत संकल्प में योगदान का वादा किया और बंगाल की शिक्षा, स्वास्थ्य व पलायन की समस्याओं को दूर करने की प्रतिबद्धता जताई।

Key Takeaways

  • गोबर्धन दास, प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट, को नीति आयोग का सदस्य नियुक्त किया गया।
  • अशोक लाहिड़ी, बालुरघाट से भाजपा विधायक और अर्थशास्त्री, नीति आयोग के उपाध्यक्ष बनाए गए।
  • गोबर्धन दास ने इस नियुक्ति को पूरे बंगाल के लिए गर्व का विषय बताया।
  • उन्होंने बंगाल में शिक्षा, स्वास्थ्य, उद्योग और पलायन की समस्याओं को दूर करने का संकल्प लिया।
  • भारत ने कोविड काल में स्वदेशी वैक्सीन से 140 करोड़ नागरिकों की रक्षा की और 150 देशों को वैक्सीन भेजी।
  • भारत अभी विश्व की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और शीघ्र तीसरे स्थान पर पहुंचने का लक्ष्य है।

नई दिल्ली, 25 अप्रैल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार ने नीति आयोग की संरचना में महत्वपूर्ण फेरबदल करते हुए प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट गोबर्धन दास को सदस्य और दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट से भाजपा विधायक व著名 अर्थशास्त्री अशोक लाहिड़ी को उपाध्यक्ष नियुक्त किया है। गोबर्धन दास ने शनिवार को राष्ट्र प्रेस से विशेष संवाद में इस नियुक्ति को न केवल अपने लिए, बल्कि समस्त बंगाल और बंगाली समाज के लिए गर्व का क्षण बताया।

बंगाल के लिए ऐतिहासिक सम्मान

गोबर्धन दास ने कहा, "नीति आयोग का सदस्य बनना सिर्फ मेरा नहीं, बल्कि पूरे बंगाल और बंगालियों के लिए गर्व की बात है।" उन्होंने पीएम मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके विश्वास को वे अपनी जिम्मेदारी से पूरा करेंगे।

उन्होंने विकसित भारत के संकल्प में नीति आयोग सदस्य के रूप में अधिकतम योगदान देने की प्रतिबद्धता जताई। उनका मानना है कि भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए हर नागरिक की भागीदारी अनिवार्य है।

सोनार बांग्ला की पुनर्स्थापना का संकल्प

गोबर्धन दास ने बंगाल की गौरवशाली सांस्कृतिक और वैज्ञानिक विरासत का स्मरण करते हुए कहा, "यह ऋषि अरविंद, रवींद्रनाथ टैगोर, बंकिमचंद्र और श्यामाप्रसाद मुखर्जी की भूमि है। विज्ञान में मेघनाद साहा और सत्येंद्र नाथ बोस ने इसी धरती से विश्व को नई दिशा दी।"

उन्होंने स्वीकार किया कि बीच के दौर में बंगाल की यह छवि कुछ धूमिल हुई, लेकिन उनका उद्देश्य सोनार बांग्ला को उसकी पुरानी गरिमा लौटाना है।

बंगाल की शिक्षा, स्वास्थ्य और पलायन की समस्या

गोबर्धन दास ने बंगाल की जमीनी हकीकत को बेबाकी से रखा। उन्होंने कहा कि प्रदेश में शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था बदहाल है, उद्योग-धंधे पिछड़ रहे हैं और लोग चिकित्सा के लिए बाहर और रोजगार के लिए दक्षिण भारत व अन्य राज्यों का रुख कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, "भारतवर्ष का कोई भी नागरिक पीछे न छूटे — यही नीति बनानी है। सबका साथ, सबका विकास के सिद्धांत पर काम करते हुए हम सभी को साथ लेकर चलेंगे।"

कोविड से मिली सीख और भारत की वैश्विक ताकत

गोबर्धन दास ने कोविड महामारी के दौरान भारत की आत्मनिर्भरता को एक मिसाल के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि देश ने अपना स्वदेशी कोविड वैक्सीन बनाकर 140 करोड़ भारतीयों की रक्षा की और करीब 150 देशों को वैक्सीन आपूर्ति की।

उन्होंने रेखांकित किया कि भारत अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और शीघ्र ही तीसरे स्थान पर पहुंचने की क्षमता रखता है। यह नियुक्ति ऐसे समय में हुई है जब नीति आयोग को 2047 विकसित भारत के रोडमैप को अंतिम रूप देने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

नियुक्ति का राजनीतिक और नीतिगत महत्व

गौरतलब है कि बंगाल में 2026 विधानसभा चुनाव से पहले इस नियुक्ति को राजनीतिक दृष्टि से भी अहम माना जा रहा है। भाजपा बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है और एक著名 बंगाली वैज्ञानिक को नीति आयोग जैसी शीर्ष संस्था में जगह देना इसी रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है।

इम्यूनोलॉजी विशेषज्ञ के रूप में गोबर्धन दास की नियुक्ति यह भी संकेत देती है कि नीति आयोग स्वास्थ्य, जैव-प्रौद्योगिकी और विज्ञान नीति को आगामी वर्षों में प्राथमिकता देने की योजना बना रहा है।

आने वाले महीनों में नीति आयोग की पुनर्गठित टीम विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों पर केंद्रित नई नीतियां प्रस्तुत कर सकती है, जिन पर सबकी नजर रहेगी।

Point of View

वहां आज भी स्वास्थ्य सेवाओं, उद्योग और रोजगार की स्थिति चिंताजनक है — और यह सवाल उठता है कि नीति आयोग की सदस्यता से राज्य स्तर की नीतियों पर कितना वास्तविक प्रभाव पड़ेगा। एक इम्यूनोलॉजिस्ट को नीति निर्माण की शीर्ष संस्था में लाना यह भी दर्शाता है कि केंद्र सरकार स्वास्थ्य और जैव-प्रौद्योगिकी को भविष्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मान रही है।
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

गोबर्धन दास को नीति आयोग का सदस्य कब और क्यों बनाया गया?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने अप्रैल 2025 में नीति आयोग के पुनर्गठन के तहत प्रसिद्ध इम्यूनोलॉजिस्ट गोबर्धन दास को सदस्य नियुक्त किया। यह नियुक्ति विकसित भारत @2047 के लक्ष्यों और स्वास्थ्य नीति को प्राथमिकता देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
नीति आयोग में अशोक लाहिड़ी की क्या भूमिका होगी?
अशोक लाहिड़ी को नीति आयोग का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया है। वे दक्षिण दिनाजपुर के बालुरघाट से भाजपा विधायक और प्रख्यात अर्थशास्त्री हैं, जो आर्थिक नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।
गोबर्धन दास बंगाल के लिए क्या करना चाहते हैं?
गोबर्धन दास ने बंगाल में शिक्षा, स्वास्थ्य व्यवस्था और उद्योग की स्थिति सुधारने का संकल्प लिया है। उन्होंने राज्य से हो रहे पलायन को रोकने और हर नागरिक को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने को अपनी प्राथमिकता बताया है।
क्या यह नियुक्ति 2026 बंगाल चुनाव से जुड़ी है?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार 2026 बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले एक著名 बंगाली वैज्ञानिक को नीति आयोग में शामिल करना भाजपा की बंगाल में अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति का हिस्सा माना जा सकता है। हालांकि सरकार ने इसे विशुद्ध रूप से योग्यता आधारित नियुक्ति बताया है।
भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था कब बनेगा?
गोबर्धन दास के अनुसार भारत अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और बहुत जल्द तीसरे स्थान पर पहुंचने की क्षमता रखता है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष और विभिन्न वैश्विक संस्थाओं के अनुमान भी 2027-28 तक भारत के तीसरे स्थान पर पहुंचने की संभावना जताते हैं।
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