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बड़ा सरेंडर: छत्तीसगढ़ के 47 माओवादियों ने तेलंगाना डीजीपी के सामने डाले हथियार, 1.50 करोड़ इनाम

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बड़ा सरेंडर: छत्तीसगढ़ के 47 माओवादियों ने तेलंगाना डीजीपी के सामने डाले हथियार, 1.50 करोड़ इनाम

सारांश

छत्तीसगढ़ के 47 माओवादी कैडरों ने तेलंगाना डीजीपी के सामने आत्मसमर्पण किया। 32 हथियार और 515 कारतूस जमा हुए। साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी लगभग समाप्त। 2026 में अब तक 260 माओवादी सरेंडर कर चुके हैं।

मुख्य बातें

47 माओवादी कैडरों ने 25 अप्रैल 2025 को तेलंगाना डीजीपी बी.
शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण किया।
सरेंडर में एक एलएमजी, चार एके-47 समेत कुल 32 हथियार और 515 जिंदा कारतूस जमा किए गए।
दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी के प्रभारी हेमला इय्थु उर्फ विज्जा (2004 से सक्रिय) भी सरेंडर करने वालों में शामिल।
सभी 47 कैडरों को 1.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि और 25-25 हजार रुपये की अंतरिम सहायता दी गई।
2026 में अब तक तेलंगाना में 260 माओवादी सरेंडर और 238 हथियार बरामद हो चुके हैं।
तेलंगाना में अब केवल 4 सक्रिय भूमिगत माओवादी शेष हैं, जिनमें 2 केंद्रीय समिति सदस्य भी शामिल हैं।

हैदराबाद, 25 अप्रैल। छत्तीसगढ़ के सीपीआई (माओवादी) संगठन से जुड़े 47 भूमिगत कैडरों ने शनिवार, 25 अप्रैल 2025 को तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) बी. शिवधर रेड्डी के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। इस सरेंडर के साथ उन्होंने 32 हथियार और 515 जिंदा कारतूस भी पुलिस को सौंपे। यह घटना माओवादी आंदोलन के विरुद्ध सुरक्षाबलों की बड़ी सफलता मानी जा रही है।

कौन-कौन हुए शामिल इस ऐतिहासिक सरेंडर में

आत्मसमर्पण करने वाले कैडरों में दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) के सदस्य और साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी के प्रभारी हेमला इय्थु उर्फ विज्जा प्रमुख रूप से शामिल हैं। हेमला इय्थु ने वर्ष 2004 में माओवादी संगठन से जुड़ाव किया था और वर्षों तक कई अहम जिम्मेदारियां निभाई थीं।

इसके अलावा 9वीं प्लाटून के कमांडर पोडियम लाछू उर्फ मनोज भी आत्मसमर्पण करने वालों में शामिल हैं, जिन्होंने 2009 में संगठन जॉइन किया था। सरेंडर करने वाले कुल 47 कैडरों में पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) के 4 सदस्य, डीकेएसजेडसी के 28 सदस्य, साउथ बस्तर डीवीसी की 9वीं व 30वीं प्लाटून के 15 सदस्य और 12 एरिया कमेटी सदस्य (एसीएम) शामिल हैं।

जमा हथियारों की सूची — एलएमजी से लेकर पिस्टल तक

इन माओवादियों द्वारा सौंपे गए 32 हथियारों में एक लाइट मशीन गन (एलएमजी), चार एके-47 राइफल, तीन एसएलआर राइफल, दो इंसास राइफल, दो 410 मस्कट राइफल, एक 8 एमएम राइफल, 12 सिंगल शॉट गन, एक 9 एमएम पिस्टल, एक रिवॉल्वर, दो बीजीएल गन, दो एयर गन और एक एसबीबीएल गन शामिल हैं। साथ ही 515 जिंदा कारतूस भी बरामद किए गए।

सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, एलएमजी और एके-47 जैसे भारी हथियारों का सरेंडर इस बात का संकेत है कि माओवादी संगठन की सशस्त्र क्षमता तेजी से क्षीण हो रही है।

तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति — सरेंडर की असली वजह

डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी ने बताया कि तेलंगाना सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति तथा पुलिस के सकारात्मक दृष्टिकोण से प्रभावित होकर इन कैडरों ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी अब लगभग समाप्ति की कगार पर है और इसके अधिकतर प्रमुख नेता व सशस्त्र कैडर निष्क्रिय हो चुके हैं।

मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के निर्देश पर 2024 से 2026 के बीच सरेंडर करने वाले सभी कैडरों के लिए हेल्थ कार्ड भी जारी किए जा रहे हैं, जो उनके सामाजिक पुनर्एकीकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

इनाम और आर्थिक सहायता का प्रावधान

डीजीपी ने बताया कि इन 47 कैडरों के आत्मसमर्पण पर पात्रता के अनुसार कुल 1.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी जाएगी। चूंकि सभी सरेंडर करने वाले छत्तीसगढ़ के निवासी हैं, इसलिए फिलहाल प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये की अंतरिम सहायता प्रदान की गई है। शेष राशि दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने और बैंक खाते खुलने के बाद दी जाएगी।

2026 में तेलंगाना में माओवाद का ग्राफ — बड़ी गिरावट

डीजीपी के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक तेलंगाना में कुल 260 भूमिगत माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसी वर्ष अब तक 238 हथियार बरामद किए जा चुके हैं, जो संगठन की सशस्त्र शक्ति के लिए बड़ा झटका है। वर्तमान में तेलंगाना में केवल चार सक्रिय भूमिगत माओवादी बचे हैं, जो छत्तीसगढ़ और झारखंड जैसे राज्यों में सक्रिय हैं — इनमें दो केंद्रीय समिति सदस्य भी शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह सरेंडर ऐसे समय में हुआ है जब केंद्र और राज्य सरकारें माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में एक साथ सुरक्षा अभियान और विकास योजनाओं को तेज कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सरेंडर नीति की सफलता अन्य राज्यों के लिए भी एक मॉडल बन सकती है। आने वाले महीनों में शेष सक्रिय माओवादियों के खिलाफ अभियान और तेज होने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस 'सॉफ्ट पावर' रणनीति की जीत है जिसे तेलंगाना सरकार ने बंदूक के साथ-साथ पुनर्वास नीति के रूप में अपनाया है। विडंबना यह है कि जो संगठन दशकों तक राज्य सत्ता को चुनौती देता रहा, आज उसी राज्य की कल्याण योजनाओं — हेल्थ कार्ड, इनाम राशि, बैंक खाते — ने उसे खोखला कर दिया। साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी का लगभग खत्म होना यह संकेत देता है कि माओवादी आंदोलन का वैचारिक आधार भी कमजोर पड़ रहा है, न सिर्फ सशस्त्र क्षमता। अब सवाल यह है कि शेष चार सक्रिय माओवादियों — जिनमें दो केंद्रीय समिति सदस्य हैं — को पकड़ने या सरेंडर कराने में सरकार कितना समय लेती है।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ के 47 माओवादियों ने कहां और कब सरेंडर किया?
छत्तीसगढ़ के 47 माओवादी कैडरों ने 25 अप्रैल 2025 को हैदराबाद में तेलंगाना के डीजीपी बी. शिवधर रेड्डी के सामने आत्मसमर्पण किया। यह सरेंडर तेलंगाना सरकार की पुनर्वास नीति के तहत हुआ।
सरेंडर करने वाले माओवादियों ने कितने और कौन-कौन से हथियार जमा किए?
सरेंडर के दौरान कुल 32 हथियार और 515 जिंदा कारतूस जमा किए गए। इनमें एक एलएमजी, चार एके-47, तीन एसएलआर, दो इंसास राइफल समेत कई अन्य हथियार शामिल थे।
सरेंडर करने वाले माओवादियों को कितनी इनामी राशि मिलेगी?
इन 47 कैडरों को पात्रता के अनुसार कुल 1.50 करोड़ रुपये की इनामी राशि दी जाएगी। फिलहाल प्रत्येक को 25-25 हजार रुपये की अंतरिम सहायता दी गई है।
2026 में तेलंगाना में कुल कितने माओवादियों ने सरेंडर किया है?
वर्ष 2026 में अब तक तेलंगाना में कुल 260 भूमिगत माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं। इसी अवधि में 238 हथियार भी बरामद किए जा चुके हैं।
साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी की अब क्या स्थिति है?
डीजीपी के अनुसार, प्रमुख नेताओं के सरेंडर के बाद साउथ बस्तर डिविजनल कमेटी लगभग समाप्ति की कगार पर है। इसके अधिकतर सशस्त्र कैडर और नेता अब निष्क्रिय हो चुके हैं।
राष्ट्र प्रेस
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