हीट स्ट्रोक से बचाव: गर्मी के बढ़ते प्रकोप में NHM की जरूरी सलाह
सारांश
Key Takeaways
- नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने अप्रैल 2025 में बढ़ती गर्मी के बीच हीट स्ट्रोक से बचाव के लिए राष्ट्रव्यापी अपील जारी की है।
- दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच बाहर निकलने और भारी काम करने से बचें — यह समय सबसे खतरनाक होता है।
- हीट स्ट्रोक के लक्षणों में तेज बुखार, चक्कर, उल्टी और बेहोशी शामिल हैं — लक्षण दिखते ही तुरंत प्राथमिक उपचार दें।
- बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता है — उन्हें धूप में लंबे समय तक न रहने दें।
- दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं और कोल्ड ड्रिंक्स, चाय, कॉफी से परहेज करें।
- जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में पिछले एक दशक में अप्रैल-मई का तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। देशभर में इन दिनों हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ता जा रहा है, क्योंकि अप्रैल 2025 में दिन का तापमान लगातार ऊपर चढ़ रहा है और कई राज्यों में लू की चेतावनी जारी हो चुकी है। नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे सतर्क रहें और अपने परिवार — खासकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों — को धूप से बचाएं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, समय पर सही बचाव अपनाकर इस जानलेवा स्थिति से पूरी तरह बचा जा सकता है।
हीट स्ट्रोक क्या होता है और यह खतरनाक क्यों है?
हीट स्ट्रोक तब होता है जब शरीर का तापमान अत्यधिक तेजी से बढ़ जाता है और शरीर की प्राकृतिक ठंडक बनाए रखने की क्षमता पूरी तरह नष्ट हो जाती है। यह स्थिति अगर समय पर नियंत्रित न हो तो जानलेवा साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों के मुताबिक, 40°C से अधिक तापमान वाले वातावरण में लंबे समय तक रहने, शारीरिक मेहनत करने या पर्याप्त पानी न पीने से हीट स्ट्रोक का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। भारत में हर साल गर्मी के मौसम में सैकड़ों लोग इसकी चपेट में आते हैं।
NHM की अपील और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह
नेशनल हेल्थ मिशन (NHM) ने स्पष्ट रूप से कहा है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे के बीच का समय सबसे खतरनाक होता है। इस दौरान बाहर निकलने से बचें और भारी शारीरिक श्रम वाले काम टालें।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह भी कहा है कि बच्चों, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों को विशेष देखभाल की जरूरत है। इन्हें लंबे समय तक धूप में न रहने दें और इनके पानी पीने का नियमित ध्यान रखें।
हीट स्ट्रोक से बचाव के प्रभावी उपाय
पर्याप्त पानी पिएं: दिनभर में कम से कम 8 से 10 गिलास पानी पिएं, भले ही प्यास न लगे। शरीर को हाइड्रेटेड रखना सबसे जरूरी है।
कैफीन और शर्करायुक्त पेय से बचें: कोल्ड ड्रिंक्स, चाय और कॉफी शरीर में डिहाइड्रेशन को और बढ़ा सकते हैं, इसलिए इनसे परहेज करें। इनकी जगह नींबू पानी, छाछ, नारियल पानी या ओआरएस घोल लें।
सही कपड़े पहनें: हल्के रंग के ढीले और सूती कपड़े पहनें। गहरे रंग के कपड़े अधिक गर्मी अवशोषित करते हैं, जिससे शरीर का तापमान तेजी से बढ़ता है।
बाहरी काम में ब्रेक लें: अगर धूप में काम करना अनिवार्य हो, तो हर 15 से 20 मिनट में छाया में आराम करें। सिर पर टोपी या गमछा ढकें।
हल्का भोजन करें: गर्मियों में भारी और तैलीय खाने से बचें। ताजे फल, सलाद और पानी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे खीरा, तरबूज और संतरा खाएं।
हीट स्ट्रोक के लक्षण और तत्काल प्राथमिक उपचार
अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार, चक्कर आना, उल्टी, बेहोशी या शरीर का तापमान अचानक बढ़ना जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत निम्नलिखित कदम उठाएं:
सबसे पहले पीड़ित को किसी ठंडी और हवादार जगह पर लिटाएं। उनके गर्दन, कलाई और पैरों के तलवों पर ठंडे पानी की पट्टी रखें। छोटे-छोटे घूंट में ठंडा पानी पिलाते रहें और जल्द से जल्द नजदीकी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करें।
हालत में सुधार होने पर पीड़ित को नींबू पानी, फलों का रस या नमी वाले हल्के खाद्य पदार्थ दें। किसी भी स्थिति में पीड़ित को अकेला न छोड़ें।
व्यापक परिप्रेक्ष्य: भारत में गर्मी और स्वास्थ्य संकट
गौरतलब है कि जलवायु परिवर्तन के कारण भारत में गर्मी का मौसम हर साल पहले शुरू होता है और अधिक तीव्र होता जा रहा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक दशक में देश के कई हिस्सों में अप्रैल-मई का औसत तापमान 2 से 3 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है।
यह चिंताजनक इसलिए भी है क्योंकि भारत की एक बड़ी आबादी — खासकर दिहाड़ी मजदूर, किसान और निर्माण श्रमिक — धूप में काम करने को मजबूर है और उनके पास पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं नहीं हैं। NHM की यह अपील इसीलिए और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
आने वाले हफ्तों में मई और जून में तापमान और अधिक बढ़ने की संभावना है। नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय मौसम अपडेट पर नजर रखें और स्वास्थ्य विभाग की गाइडलाइन का पालन करें।