गुजरात में मलेरिया पर ऐतिहासिक जीत: एक दशक में 92%25 मामले घटे, पॉजिटिविटी रेट प्रति हजार एक से भी कम
सारांश
Key Takeaways
- गुजरात में पिछले 10 वर्षों में मलेरिया के मामलों में 92 प्रतिशत की ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई है।
- वर्ष 2025 में अब तक 1.81 लाख से अधिक बुखार पीड़ित मरीजों की जांच की जा चुकी है।
- राज्य के सभी जिलों में मलेरिया पॉजिटिविटी दर प्रति 1,000 आबादी पर एक से भी कम रही।
- गुजरात राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन फ्रेमवर्क में कैटेगरी-2 से कैटेगरी-1 में आ गया है।
- सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया की जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
- राज्य का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया-मुक्त राज्य बनना है, जो केंद्र सरकार के राष्ट्रीय लक्ष्य के अनुरूप है।
गांधीनगर, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। विश्व मलेरिया दिवस के अवसर पर गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने एक ऐतिहासिक उपलब्धि की घोषणा की है — पिछले 10 वर्षों में राज्य में मलेरिया के मामलों में 92 प्रतिशत की जबरदस्त गिरावट आई है। यह सफलता लगातार निगरानी, जन-जागरूकता और ज़मीनी स्तर पर चलाए गए रोकथाम अभियानों का नतीजा है। इस उपलब्धि के साथ गुजरात अब राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन फ्रेमवर्क के तहत कैटेगरी-2 से कैटेगरी-1 में आ गया है।
विश्व मलेरिया दिवस और इस वर्ष की थीम
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) हर साल 25 अप्रैल को विश्व मलेरिया दिवस मनाता है। इसका उद्देश्य मलेरिया नियंत्रण को लेकर वैश्विक जागरूकता बढ़ाना और समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। इस वर्ष की थीम 'मलेरिया खत्म करने का पक्का इरादा: अब हम कर सकते हैं, अब हमें करना ही होगा' रखी गई है, जो मलेरिया उन्मूलन की दिशा में प्रयासों को और तेज करने का आह्वान करती है।
गुजरात में मलेरिया नियंत्रण के प्रमुख उपाय
गुजरात स्वास्थ्य विभाग ने ग्रामीण और शहरी — दोनों क्षेत्रों में व्यापक कदम उठाए हैं। इनमें घर-घर निगरानी, बुखार की जांच, लार्वा-रोधी अभियान, निर्माण स्थलों का नियमित निरीक्षण, मजदूरों के रक्त परीक्षण और रुके हुए पानी के स्रोतों में लार्वा भक्षी मछलियां छोड़ना शामिल है।
सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर मलेरिया की जांच और उपचार पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे गरीब और वंचित तबके को सीधा लाभ मिल रहा है।
2025 के आंकड़े: उत्साहजनक तस्वीर
विभाग द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक 1.81 लाख से अधिक बुखार पीड़ित मरीजों की जांच की जा चुकी है। पॉजिटिव पाए गए सभी मरीजों को तत्काल उपचार प्रदान किया गया।
राज्य के सभी जिलों और नगर निगमों में मलेरिया पॉजिटिविटी दर प्रति 1,000 आबादी पर एक से भी कम दर्ज की गई है — जो किसी भी राज्य के लिए एक महत्वपूर्ण मानक है। इसी आधार पर गुजरात को राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन फ्रेमवर्क में उच्च श्रेणी में रखा गया है।
मलेरिया: कारण, लक्षण और बचाव
स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मलेरिया प्लाज्मोडियम परजीवी के कारण होता है, जो संक्रमित मादा एनाफिलीज मच्छरों के काटने से फैलता है। ये मच्छर मुख्यतः साफ और ठहरे हुए पानी में पनपते हैं।
इसके प्रमुख लक्षणों में तेज ठंड लगना, कंपकंपी के साथ बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द, जी मिचलाना या उल्टी और बुखार उतरने के बाद अत्यधिक पसीना आना शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जल्दी पहचान और पूरा उपचार ही मलेरिया से बचाव का सबसे कारगर तरीका है।
बचाव के लिए विभाग ने पानी के बर्तनों को ढककर रखना, घर के आस-पास पानी जमा न होने देना, खिड़कियों पर जाली लगवाना, मच्छरदानी का उपयोग और बुखार होने पर तुरंत रक्त परीक्षण कराने की सलाह दी है।
जागरूकता अभियान और व्यापक पहुंच
विभाग ने सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शनियां, रैलियां, स्कूल-कॉलेजों में शैक्षिक कार्यक्रम और सोशल मीडिया, टेलीविजन व एफएम रेडियो के जरिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए हैं।
गौरतलब है कि यह उपलब्धि ऐसे समय में आई है जब देश के कई अन्य राज्य अभी भी मलेरिया के उच्च बोझ से जूझ रहे हैं। ओडिशा, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों की तुलना में गुजरात का यह प्रदर्शन उसकी स्वास्थ्य प्रणाली की मजबूती को दर्शाता है।
आगे की राह में गुजरात का लक्ष्य 2030 तक मलेरिया-मुक्त राज्य बनना है, जो केंद्र सरकार के राष्ट्रीय मलेरिया उन्मूलन लक्ष्य के अनुरूप है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वर्तमान गति बनी रही, तो यह लक्ष्य समय से पहले भी हासिल किया जा सकता है।