ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर से की फोन पर बात, मध्य-पूर्व हालात और होर्मुज संकट पर चर्चा

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ईरान के विदेश मंत्री अराघची ने जयशंकर से की फोन पर बात, मध्य-पूर्व हालात और होर्मुज संकट पर चर्चा

सारांश

ईरान के विदेश मंत्री अराघची की क्षेत्रीय कूटनीति तेज़ है — पाकिस्तान, ओमान और रूस के बाद अब भारत के जयशंकर से फोन पर बात। होर्मुज संकट, मध्य-पूर्व तनाव और अमेरिका-इज़रायल के साथ बिगड़ते हालात के बीच तेहरान हर दिशा में समर्थन जुटा रहा है।

Key Takeaways

  • ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने 29 अप्रैल 2025 को विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर बात की।
  • दोनों नेताओं ने मौजूदा क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की और लगातार संपर्क में रहने पर सहमति जताई।
  • अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया, जहाँ होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा पर चर्चा हुई।
  • सेंट पीटर्सबर्ग में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात में अमेरिका और इज़रायल के साथ मौजूदा तनाव पर समर्थन माँगा गया।
  • रूस की टीएएसएस के अनुसार, पुतिन ने ईरान के साथ संबंध मज़बूत करने और क्षेत्र में शांति स्थापना में सहयोग का आश्वासन दिया।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर को बुधवार, 29 अप्रैल की शाम ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई और आगे भी लगातार संपर्क में रहने पर सहमति बनी। यह बातचीत ऐसे समय में हुई जब अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा पूरा किया है।

जयशंकर ने 'एक्स' पर साझा की जानकारी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर इस बातचीत की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, ''ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची का फोन आया। मौजूदा हालात के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से बातचीत हुई। हम एक-दूसरे के लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए।'' भारत और ईरान के बीच यह संवाद कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, विशेषकर जब मध्य-पूर्व में तनाव का माहौल बना हुआ है।

ओमान में होर्मुज संकट पर विशेष चर्चा

अपनी क्षेत्रीय यात्रा के दौरान अराघची ने ओमान में सुल्तान हैथम बिन तारिक अल और विदेश मंत्री सैय्यद बदर बिन हमद अल बुसैदी से मुलाकात की। इस बैठक में होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और पारगमन के मुद्दे पर विशेष ध्यान दिया गया। अराघची ने 'एक्स' पर लिखा,

Point of View

ओमान, रूस और अब भारत — दर्शाती है कि तेहरान वैश्विक अलगाव की आशंका के बीच तेज़ी से समर्थन का जाल बुन रहा है। भारत के साथ यह संवाद महत्वपूर्ण है क्योंकि नई दिल्ली होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाले अपने ऊर्जा आयात के लिए संवेदनशील है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अमेरिका और ईरान — दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, जो एक जटिल कूटनीतिक कसरत है। बिना किसी ठोस घोषणा के 'लगातार संपर्क' की भाषा संकेत देती है कि भारत अभी किसी पक्ष की ओर झुकने से बच रहा है।
NationPress
29/04/2026

Frequently Asked Questions

अराघची और जयशंकर के बीच किन मुद्दों पर बात हुई?
दोनों नेताओं के बीच मौजूदा क्षेत्रीय हालात के विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई। जयशंकर ने स्वयं 'एक्स' पर इसकी पुष्टि की और कहा कि दोनों पक्ष लगातार संपर्क में रहने पर सहमत हुए।
अराघची ने हाल ही में किन देशों का दौरा किया?
अराघची ने हाल ही में पाकिस्तान, ओमान और रूस का दौरा किया। इन यात्राओं में मध्य-पूर्व के हालात, होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा और अमेरिका-इज़रायल के साथ तनाव प्रमुख विषय रहे।
होर्मुज संकट क्या है और यह भारत को क्यों प्रभावित करता है?
होर्मुज जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहाँ से भारत अपनी ऊर्जा ज़रूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। इस क्षेत्र में किसी भी तनाव का सीधा असर भारत की ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता पर पड़ सकता है।
पुतिन ने ईरान के बारे में क्या कहा?
रूस की टीएएसएस न्यूज एजेंसी के अनुसार, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा कि रूस ईरान और क्षेत्र के सभी लोगों के फायदे के लिए हर संभव प्रयास करेगा। उन्होंने ईरानी जनता की 'हिम्मत और बहादुरी' की सराहना की और तेहरान के साथ संबंध मज़बूत करने की मास्को की तैयारी पर भी रोशनी डाली।
भारत-ईरान कूटनीतिक संबंधों का मौजूदा परिदृश्य क्या है?
भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, व्यापार और चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक मुद्दों पर ऐतिहासिक संबंध रहे हैं। मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच यह फोन वार्ता दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को जारी रखने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
Nation Press