ब्रिक्स सम्मेलन: ईरानी विदेश मंत्री अराघची की PM मोदी से मुलाकात, द्विपक्षीय व वैश्विक मुद्दों पर विस्तृत चर्चा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स विदेश मंत्रियों के सम्मेलन के दौरान 14 मई 2025 को ईरान के विदेश मंत्री डॉ. सैयद अब्बास अराघची ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस बैठक में भारत-ईरान द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक घटनाक्रमों पर गहन चर्चा हुई। ब्रिक्स के अन्य प्रतिनिधियों के साथ मिलकर यह बैठक कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रही।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्री अराघची बुधवार की रात अन्य ब्रिक्स प्रतिनिधियों के साथ भारत पहुँचे। गुरुवार सुबह प्रधानमंत्री मोदी ने सेवा तीर्थ में ईरानी विदेश मंत्री सहित ब्रिक्स के अन्य प्रतिनिधियों से संयुक्त मुलाकात की। इस मुलाकात में द्विपक्षीय मुद्दों के अलावा क्षेत्रीय स्थिरता और बहुपक्षीय सहयोग के विषयों पर भी विचार-विमर्श हुआ।
इसके बाद शाम सात बजे विदेश मंत्री एस. जयशंकर की ओर से भारत मंडपम में विश्व भर से आए विदेश मंत्रियों के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया गया। जयशंकर ने सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत किया और बैठक की अध्यक्षता करते हुए वैश्विक मुद्दों पर भारत का स्पष्ट पक्ष रखा।
जयशंकर का वैश्विक एजेंडा पर संबोधन
बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा, 'शांति और सुरक्षा वैश्विक व्यवस्था के केंद्र में हैं। हाल के संघर्षों ने संवाद और कूटनीति के महत्व को और अधिक स्पष्ट किया है।' उन्होंने आगे कहा कि इस जटिल और अनिश्चित दुनिया में चर्चाओं को समानता और साझा, लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों के सिद्धांतों को बनाए रखते हुए सतत विकास की दिशा में आगे बढ़ाना चाहिए।
जयशंकर ने यह भी रेखांकित किया कि तकनीकी प्रगति वैश्विक परिदृश्य को नया आकार दे रही है और इसका उपयोग सुशासन तथा समावेशी विकास के लिए किया जा सकता है। आतंकवाद के खिलाफ सहयोग मजबूत करने पर साझा हित की बात भी उन्होंने दोहराई।
अराघची का स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज पर बयान
ईरान इस्लामिक रिपब्लिक के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर साझा जानकारी के अनुसार, विदेश मंत्री अराघची ने नई दिल्ली में मीडिया को बताया कि स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज उन सभी वाणिज्यिक जहाजों के लिए खुला है जो ईरानी नौसेना के साथ सहयोग करते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि मौजूदा रुकावटें अमेरिका की ओर से लगाए गए प्रतिबंधों के कारण पैदा हुई हैं।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब भारत और ईरान के बीच ऊर्जा और व्यापार संबंध प्रतिबंधों की छाया में संचालित हो रहे हैं। चाबहार बंदरगाह परियोजना को लेकर दोनों देशों के बीच सहयोग जारी है, जो इस बैठक के संदर्भ को और महत्वपूर्ण बनाता है।
अराघची की अन्य द्विपक्षीय बैठकें
नई दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान विदेश मंत्री अराघची ने कई अन्य देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। उन्होंने मलेशिया के विदेश मंत्री मोहम्मद हसन से द्विपक्षीय संबंधों और क्षेत्रीय सहयोग पर चर्चा की। इसके अलावा ब्राजील के विदेश मंत्री मौरो विएरा के साथ भी बातचीत हुई, जिसमें बहुपक्षीय ढाँचों के भीतर सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया।
रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ भी अराघची की अलग बैठक हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंध, क्षेत्रीय घटनाक्रम और बहुपक्षीय समन्वय प्रमुख विषय रहे। यह बैठकें इस बात का संकेत हैं कि ब्रिक्स मंच का उपयोग ईरान बहुआयामी कूटनीतिक संपर्क के लिए कर रहा है।
आगे की दिशा
यह सम्मेलन ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक व्यापार मार्गों पर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स का यह जमावड़ा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले हफ्तों में इन बैठकों के नतीजे द्विपक्षीय समझौतों और क्षेत्रीय सहयोग के रूप में सामने आ सकते हैं।