ईरानी उप विदेश मंत्री घरीबाबादी दिल्ली पहुंचे, भारत-ईरान बैठक में क्षेत्रीय तनाव और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा

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ईरानी उप विदेश मंत्री घरीबाबादी दिल्ली पहुंचे, भारत-ईरान बैठक में क्षेत्रीय तनाव और द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा

सारांश

ईरानी उप विदेश मंत्री घरीबाबादी का दिल्ली दौरा महज़ एक औपचारिक मुलाकात नहीं — यह उस कूटनीतिक धागे की अगली कड़ी है जो फरवरी में अमेरिका-इज़रायल के हमलों के बाद से भारत और ईरान के बीच लगातार बुनी जा रही है। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत अपनी ऊर्जा और शिपिंग सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए संतुलित कूटनीति की राह पर है।

मुख्य बातें

ईरानी उप विदेश मंत्री काजिम घरीबाबादी 13 मई 2026 को नई दिल्ली पहुंचे; विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज ने स्वागत किया।
बैठक में द्विपक्षीय संबंध, पश्चिम एशिया संकट और हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रम पर चर्चा हुई।
28 फरवरी 2026 से विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी समकक्ष अराघची के बीच कई बार फोन पर वार्ता हो चुकी है।
21 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन से बात कर पश्चिम एशिया संकट पर चिंता जताई और शिपिंग लेन की सुरक्षा पर बल दिया।
यह दौरा ब्रिक्स और क्षेत्रीय कूटनीतिक मंचों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

ईरान के उप विदेश मंत्री काजिम घरीबाबादी 13 मई 2026 को नई दिल्ली पहुंचे, जहाँ विदेश मंत्रालय में पश्चिम एशिया मामलों के सचिव सिबी जॉर्ज ने उनका स्वागत किया। दोनों के बीच उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बैठक में क्षेत्रीय घटनाक्रम, पश्चिम एशिया संकट और भारत-ईरान संबंधों पर विस्तृत चर्चा हुई। यह बैठक ऐसे समय में हुई जब होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े ऊर्जा और सुरक्षा मुद्दे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर केंद्र में हैं।

बैठक में क्या हुआ

विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर घरीबाबादी के साथ तस्वीरें साझा करते हुए बताया कि दोनों पक्षों के बीच द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर गहन वार्ता हुई, जिसमें हाल के क्षेत्रीय घटनाक्रम विशेष रूप से शामिल थे। घरीबाबादी ईरान के वरिष्ठ राजनयिक हैं और अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों, मानवाधिकार तथा क्षेत्रीय कूटनीति में ईरान का प्रतिनिधित्व करते हैं।

भारत-ईरान संपर्क का हालिया इतिहास

गौरतलब है कि 28 फरवरी 2026 से अब तक विदेश मंत्री एस. जयशंकर अपने ईरानी समकक्ष सैयद अब्बास अराघची से कई बार फोन पर बातचीत कर चुके हैं। फरवरी के अंत में तेहरान सहित ईरान के कई शहरों पर अमेरिका और इज़रायल द्वारा संयुक्त हवाई हमले किए गए थे, जिसके बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद और तेज़ हुआ।

29 अप्रैल को जयशंकर ने एक्स पर पोस्ट कर जानकारी दी थी कि ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने उन्हें शाम को फोन किया। उन्होंने लिखा,

संपादकीय दृष्टिकोण

अमेरिका और इज़रायल के साथ भारत के बढ़ते रक्षा और व्यापार संबंधों के बीच ईरान के साथ यह सक्रिय कूटनीति एक नाज़ुक संतुलन की माँग करती है। असली परीक्षा यह है कि क्या यह संवाद केवल संकट-प्रबंधन तक सीमित रहेगा या भारत-ईरान संबंधों को नई रणनीतिक गहराई देगा।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ईरानी उप विदेश मंत्री घरीबाबादी का दिल्ली दौरा किस उद्देश्य से हुआ?
काजिम घरीबाबादी 13 मई 2026 को नई दिल्ली पहुंचे, जहाँ विदेश मंत्रालय के सचिव सिबी जॉर्ज के साथ उच्चस्तरीय बैठक में द्विपक्षीय संबंधों और पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम पर चर्चा हुई। यह दौरा क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत-ईरान कूटनीतिक संवाद को मज़बूत करने की कड़ी है।
भारत और ईरान के बीच हाल में कितनी बार उच्चस्तरीय संपर्क हुआ है?
28 फरवरी 2026 के बाद से विदेश मंत्री जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री अराघची के बीच कई बार फोन पर वार्ता हो चुकी है। इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने 12 मार्च और 21 मार्च को ईरानी राष्ट्रपति पेजेश्कियन से भी बात की।
पश्चिम एशिया संकट का भारत पर क्या असर पड़ रहा है?
होर्मुज जलडमरूमध्य से गुज़रने वाली भारत की ऊर्जा आपूर्ति और शिपिंग लेन पर क्षेत्रीय तनाव का सीधा असर पड़ता है। प्रधानमंत्री मोदी ने ज़रूरी बुनियादी ढाँचे पर हमलों की निंदा करते हुए नौवहन सुरक्षा की अहमियत पर बल दिया है।
काजिम घरीबाबादी कौन हैं?
काजिम घरीबाबादी ईरान के वरिष्ठ राजनयिक और उप विदेश मंत्री हैं, जो अंतरराष्ट्रीय कानूनी मामलों, मानवाधिकार और क्षेत्रीय कूटनीति से जुड़े मुद्दों में ईरान का प्रतिनिधित्व करते हैं।
भारत-ईरान संबंध किन आधारों पर टिके हैं?
भारत-ईरान संबंध आपसी सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक विश्वास पर आधारित हैं। चाबहार बंदरगाह, ऊर्जा व्यापार और ब्रिक्स जैसे बहुपक्षीय मंच दोनों देशों के बीच सहयोग के प्रमुख क्षेत्र हैं।
राष्ट्र प्रेस
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