ईरान-अमेरिका वार्ता: पाकिस्तान बना मध्यस्थ, सीधी बातचीत से तेहरान का इनकार
सारांश
Key Takeaways
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचे, अमेरिकी दूत शनिवार को पहुंचेंगे।
- ईरान ने अमेरिका के साथ सीधी बातचीत से स्पष्ट इनकार किया, पाकिस्तान मध्यस्थ की भूमिका निभाएगा।
- होर्मुज स्ट्रेट बंद और ईरान के बंदरगाह को अमेरिका ने अवरुद्ध किया — वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा।
- दुबई से भारत जा रहे एक व्यापारिक जहाज पर ईरान ने कब्जा किया, भारतीय हित प्रभावित।
- पहले दौर की वार्ता 11 अप्रैल को हुई थी जिसमें जेडी वेंस और गालिबफ ने नेतृत्व किया था।
- व्हाइट हाउस ने माना कि ईरान की ओर से "कुछ प्रगति" दिखी है, लेकिन समझौते की राह अभी लंबी है।
इस्लामाबाद/न्यूयॉर्क, 25 अप्रैल। ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम और सीजफायर को लेकर एक बार फिर वार्ता की संभावना बनी है, लेकिन इस बार दोनों देश आमने-सामने बैठने की बजाय पाकिस्तान को बिचौलिए के रूप में इस्तेमाल कर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंच चुके हैं, जबकि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के शनिवार को वहां पहुंचने की उम्मीद है।
पाकिस्तान क्यों बना मध्यस्थता का केंद्र?
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्पष्ट किया कि "ईरान और अमेरिका के बीच कोई सीधी बैठक नहीं होगी। ईरान अपना पक्ष पाकिस्तान को बताएगा।" इसका अर्थ है कि दोनों देश पाकिस्तानी मध्यस्थों के ज़रिए अपने-अपने रुख साझा करेंगे।
यह वार्ता पाकिस्तान, ओमान और रूस के साथ परामर्श के एक व्यापक दौर का हिस्सा बताई जा रही है। अराघची ने एक्स पर लिखा, "मेरे दौरों का उद्देश्य द्विपक्षीय मामलों पर साझेदारों के साथ सहयोग और क्षेत्रीय विकास पर विचार-विमर्श करना है।"
जेनेवा वार्ता की विफलता और नया प्रयास
इससे पहले जेनेवा में दोनों पक्षों के बीच अप्रत्यक्ष बातचीत का एक दौर हो चुका है, जो सफल नहीं रहा। उस वार्ता में ओमान के विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद अल बुसैदी ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। अमेरिका की ओर से जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ, तथा ईरान की ओर से अराघची जेनेवा में उपस्थित थे।
11 अप्रैल को पहले दौर की वार्ता में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने अपनी-अपनी टीमों की अगुवाई की थी। इस बार इस्लामाबाद दौर में ये दोनों नेता मौजूद नहीं होंगे।
होर्मुज स्ट्रेट और जहाजों पर कब्जे का तनाव
कूटनीतिक प्रयासों के बीच जमीनी तनाव अपने चरम पर है। तेहरान ने भीषण तनाव के चलते होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति के लिहाज से अत्यंत संवेदनशील जलमार्ग है। वहीं अमेरिका ने ईरान के एक बंदरगाह को अवरुद्ध कर दिया है।
दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के जहाजों पर हमले कर उन्हें अपने कब्जे में ले लिया है। ईरान ने जिन जहाजों पर कब्जा किया है, उनमें दुबई से भारत जा रहा एक व्यापारिक पोत भी शामिल है, जिससे भारतीय हित भी सीधे प्रभावित हुए हैं।
अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल और व्हाइट हाउस का रुख
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर और विशेष दूत स्टीव विटकॉफ इस्लामाबाद पहुंचेंगे। व्हाइट हाउस प्रवक्ता कैरोलिन लेविट ने मीडिया को बताया, "स्टीव और जेरेड ईरानियों की बात सुनने पाकिस्तान जाएंगे, जबकि राष्ट्रपति ट्रंप, उपराष्ट्रपति वेंस और विदेश सचिव मार्को रुबियो अमेरिका में अपडेट का इंतजार करेंगे।"
लेविट ने यह भी कहा कि "हमने पिछले कुछ दिनों में ईरानी पक्ष से निश्चित रूप से कुछ प्रगति देखी है।" साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि यदि आवश्यक हुआ तो उपराष्ट्रपति वेंस को भी पाकिस्तान भेजा जा सकता है।
गहरा विश्लेषण: भारत पर असर और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका
होर्मुज स्ट्रेट से विश्व के लगभग 20%25 तेल का परिवहन होता है। इसके बंद रहने से वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल की आशंका है, जिसका सीधा असर भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा। दुबई से भारत जा रहे एक जहाज पर ईरान के कब्जे ने नई दिल्ली की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
गौरतलब है कि 2015 के परमाणु समझौते (JCPOA) से ट्रंप के पहले कार्यकाल में बाहर निकलने के बाद से ईरान-अमेरिका संबंध लगातार तनावपूर्ण रहे हैं। अब जब दोनों पक्ष पाकिस्तान जैसे तीसरे देश के माध्यम से संवाद कर रहे हैं, तो यह कूटनीतिक दृष्टि से एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है — भले ही सफलता की गारंटी नहीं है।
आने वाले दिनों में इस्लामाबाद वार्ता के नतीजे यह तय करेंगे कि क्या दोनों देश किसी ठोस समझौते की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं या फिर तनाव और गहरा होगा।