13 जुलाई 2026
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राम मंदिर चंदा विवाद: भूपेश बघेल का BJP पर हमला — 'वोट के बाद अब चढ़ावा भी चुरा रहे हैं'

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राम मंदिर चंदा विवाद: भूपेश बघेल का BJP पर हमला — 'वोट के बाद अब चढ़ावा भी चुरा रहे हैं'

सारांश

भूपेश बघेल ने राम मंदिर चंदा विवाद को BJP पर सीधे हमले का जरिया बनाया — ₹2 करोड़ की जमीन को 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेचने के आरोप, 40% कमीशन के दावे और PM मोदी की चुप्पी पर सवाल। यह विवाद धर्म और राजनीति के नाजुक चौराहे पर खड़ा है।

मुख्य बातें

कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने 13 जुलाई को रायपुर में BJP पर राम मंदिर चंदे के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
आरोप: ₹2 करोड़ की जमीन मात्र 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेची गई; निर्माण में कथित 40% कमीशन ।
बघेल ने खुद 12 फरवरी 2021 को ₹1,21,000 का दान देने की पुष्टि की।
चरण दास महंत ने विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया; चंपत राय पर सीधे आरोप।
बघेल ने PM मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया — ट्रस्ट उनकी पहल पर बना था।
बद्रीनाथ, मथुरा और काशी में भी अनियमितताओं का उल्लेख; 'रामशिला पूजा' के करोड़ों रुपए का हिसाब न होने का दावा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता भूपेश बघेल ने 13 जुलाई को रायपुर में अयोध्या श्री राम मंदिर के चंदा विवाद को लेकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP पहले वोटों की चोरी करती थी और अब धार्मिक चढ़ावे की चोरी पर उतर आई है। बघेल ने इस मामले में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चुप्पी पर भी सवाल उठाए।

मुख्य आरोप और विवाद का केंद्र

बघेल ने दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए दान में दी गई भूमि का एक मामला सामने आया है जिसमें कथित तौर पर ₹2 करोड़ की जमीन को मात्र 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेचा गया। उन्होंने कहा, 'यह पैसा छत्तीसगढ़ की जनता का भी था — देश और दुनिया के लाखों श्रद्धालुओं ने चंदा दिया था।' उन्होंने स्वयं 12 फरवरी 2021 को ₹1,21,000 का दान देने की बात कही और कहा कि इसकी जाँच की जा सकती है।

बघेल ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लिया गया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के लाखों लोगों ने करोड़ों रुपए का दान दिया, जिसका पारदर्शी हिसाब अब तक नहीं दिया गया।

अन्य धार्मिक स्थलों पर भी उठाए सवाल

बघेल ने अयोध्या तक सीमित न रहते हुए बद्रीनाथ और मथुरा में भी अनियमितताओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि काशी में सैकड़ों साल पुराने मंदिर तोड़े गए और इन सभी धार्मिक स्थलों पर गुजरात के लोगों का कब्जा बताया जा रहा है। उन्होंने इसे अयोध्या में BJP की हार और वाराणसी में मामूली जीत के अंतर से जोड़ते हुए कहा कि 'अब मथुरा की बारी है।'

विधानसभा में चर्चा की मांग

कांग्रेस नेता डॉ. चरण दास महंत ने अयोध्या राम तीर्थ क्षेत्र में दान और चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में स्थगन प्रस्ताव पेश किया। बघेल ने तर्क दिया कि जब राम मंदिर निर्माण पर विधानसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पेश हो सकता है, तो दान के कथित दुरुपयोग और जमीन की खरीद-बिक्री के आरोपों पर चर्चा क्यों नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने 'रामशिला पूजा' अभियान का भी उल्लेख किया, जिसमें BJP और संघ के सदस्यों ने देशभर के गाँवों से करोड़ों रुपए इकट्ठा किए थे। बघेल ने आरोप लगाया कि उस राशि का आज तक कोई हिसाब नहीं दिया गया।

मोदी की चुप्पी पर सवाल

बघेल ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की स्थापना स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने की थी और मंदिर के सभी प्रमुख उद्घाटन कार्यक्रमों में वे शामिल रहे। उन्होंने पूछा कि जब ट्रस्ट पर गंभीर आरोप लग रहे हैं, तो प्रधानमंत्री अब चुप क्यों हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ छोटे कर्मचारियों को गिरफ्तार करने से सच सामने नहीं आएगा, क्योंकि 'बड़े-बड़े लोग खुले घूम रहे हैं।'

डॉ. महंत की प्रतिक्रिया

डॉ. चरण दास महंत ने कहा कि राम मंदिर के खजाने की कथित लूट की खबरों से वे आहत हैं। उनके अनुसार, हर घर से इकट्ठा की गई दान राशि, सोना, चांदी और आभूषण गायब होने के आरोप सीधे चंपत राय पर लग रहे हैं, लेकिन सरकार छोटे कर्मचारियों को पकड़कर मुख्य आरोपियों को बचा रही है। उन्होंने कहा, 'आस्था के नाम पर खिलवाड़ और लूट बंद होनी चाहिए।'

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर राजनीतिक रूप से अत्यंत संवेदनशील विषय बना हुआ है और 2024 के लोकसभा चुनावों में अयोध्या सीट पर BJP की हार अभी भी चर्चा में है। आने वाले दिनों में विधानसभा की कार्यवाही और संभावित न्यायिक हस्तक्षेप इस मामले की दिशा तय करेंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उनकी विश्वसनीयता तब और बढ़ जाती है जब वे स्वयं दानकर्ता के रूप में सामने आते हैं — यह विपक्ष की उस पुरानी रणनीति से अलग है जो मंदिर निर्माण को ही विवादास्पद बनाती थी। असली सवाल यह है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, जिसे सर्वोच्च न्यायालय के आदेश और केंद्र सरकार की पहल पर बनाया गया, उसके वित्तीय लेन-देन की स्वतंत्र ऑडिट क्यों नहीं हुई। जमीन के दाम में नौ गुना की वृद्धि और 40% कमीशन के आरोप अगर सत्यापित होते हैं, तो यह केवल BJP की साख का नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सवाल बन जाता है।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चंदा विवाद क्या है?
अयोध्या के श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट पर आरोप है कि मंदिर निर्माण के लिए दान में ली गई ₹2 करोड़ की जमीन को मात्र 10 मिनट में ₹18 करोड़ में बेचा गया। इसके अलावा निर्माण कार्य में कथित तौर पर 40 प्रतिशत कमीशन लेने और दान राशि के दुरुपयोग के भी आरोप हैं।
भूपेश बघेल ने क्या आरोप लगाए?
कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने BJP पर आरोप लगाया कि वह वोट चोरी के बाद अब धार्मिक चढ़ावे की चोरी कर रही है। उन्होंने PM मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाया और कहा कि ट्रस्ट उन्हीं की पहल पर बना था, इसलिए वे जवाबदेह हैं।
चंपत राय पर क्या आरोप हैं?
कांग्रेस नेता डॉ. चरण दास महंत के अनुसार, दान में मिली राशि, सोना, चांदी और आभूषण गायब होने के आरोप सीधे चंपत राय पर लग रहे हैं। हालांकि, सरकार पर आरोप है कि वह छोटे कर्मचारियों को पकड़कर मुख्य आरोपियों को बचा रही है।
कांग्रेस विधानसभा में क्या मांग कर रही है?
कांग्रेस नेता डॉ. चरण दास महंत ने राम मंदिर दान विवाद पर विधानसभा में स्थगन प्रस्ताव पेश किया है। बघेल का तर्क है कि जब मंदिर निर्माण पर धन्यवाद प्रस्ताव हो सकता है, तो दान के कथित दुरुपयोग पर चर्चा भी होनी चाहिए।
क्या भूपेश बघेल ने स्वयं राम मंदिर के लिए दान दिया था?
हाँ, भूपेश बघेल ने स्वयं बताया कि उन्होंने 12 फरवरी 2021 को ₹1,21,000 का दान दिया था। उन्होंने कहा कि इसकी जाँच की जा सकती है और इसीलिए वे इस मामले में जवाब माँगने के अधिकारी हैं।
राष्ट्र प्रेस
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