तुषार कपूर का खुलासा: एकता कपूर की मदद ठुकराई, 'मुझे कुछ कहना है' से बनाई खुद की पहचान
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता तुषार कपूर ने बॉलीवुड में अपने 25 साल पूरे होने के मौके पर एक अहम खुलासा किया है — उन्होंने जानबूझकर अपनी बहन और जानी-मानी निर्माता एकता कपूर की मदद लेने से इनकार कर दिया था, ताकि वे अपनी पहचान खुद बना सकें। मुंबई में दिए एक इंटरव्यू में तुषार ने बताया कि उनके पिता जितेंद्र बॉलीवुड के दिग्गज सितारे रहे हैं और एकता कपूर टेलीविजन व फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा नाम हैं, फिर भी उन्होंने परिवार के किसी सदस्य के बैनर तले डेब्यू करने से साफ मना कर दिया।
एकता कपूर को साफ कह दिया 'नहीं'
तुषार कपूर ने बातचीत में बताया, 'मैंने एक समय अपनी बहन एकता से साफ कह दिया था कि मैं तुम्हारे साथ कभी कोई फिल्म नहीं करूंगा। मेरी पहली फिल्म तुम्हारे साथ कभी नहीं होगी।' उन्होंने कहा कि इस बात से एकता 'काफी दुखी हो गई थीं।' यह फैसला किसी अहंकार से नहीं, बल्कि अपनी मेहनत और योग्यता पर भरोसे से लिया गया था।
वाशु भगनानी ने किया लॉन्च, एकता ने दी सराहना
तुषार ने बताया कि जब निर्माता वाशु भगनानी ने उन्हें फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' के लिए साइन किया और फिल्म का पहला पोस्टर सामने आया, तो एकता कपूर खुश हो गईं। तुषार के अनुसार, 'फिल्म का पहला पोस्टर बहुत खास था — इसमें मेरा चेहरा नहीं दिखाया गया था। यह बारिश और छतरी के साथ बनाया गया पोस्टर था।' उन्होंने यह भी बताया कि उस दौर में सोशल मीडिया नहीं था, इसलिए पोस्टर पहले डिस्ट्रीब्यूटर्स को दिखाया गया था। पोस्टर देखकर एकता को विश्वास हो गया कि वाशु भगनानी उनके भाई को सही तरीके से पेश करेंगे।
ईगो नहीं, आत्मनिर्भरता थी मकसद
जब तुषार से पूछा गया कि क्या यह फैसला अहंकार से प्रेरित था, तो उन्होंने स्पष्ट किया, 'यह ईगो नहीं था। मैं हमेशा चाहता था कि न तो मेरे पिता, न माँ और न ही मेरी बहन मुझे लॉन्च करें।' उन्होंने आगे कहा कि परिवार के किसी सदस्य के लिए लॉन्च करना आसान होता है, लेकिन असली उपलब्धि तब है जब कोई अपने दम पर सफलता हासिल करे। उनके अनुसार, 'कोई बाहरी व्यक्ति तभी किसी कलाकार पर पैसा लगाता है, जब उसमें क्षमता नजर आती है।'
'मुझे कुछ कहना है' के 25 साल
तुषार कपूर ने साल 2001 में फिल्म 'मुझे कुछ कहना है' से बॉलीवुड में कदम रखा था। इस फिल्म में उनके साथ करीना कपूर खान नजर आई थीं। फिल्म को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और इस साल यह फिल्म भी अपनी रिलीज के 25 साल पूरे कर रही है। यह संयोग तुषार के करियर की उस यात्रा को और भी खास बना देता है, जो उन्होंने पूरी तरह अपनी शर्तों पर शुरू की थी।
गौरतलब है कि बॉलीवुड में नेपोटिज्म की बहस के बीच तुषार का यह खुलासा एक अलग नजरिया पेश करता है — जहाँ एक फिल्मी परिवार का सदस्य खुद ही परिवार की छत्रछाया से दूर रहने का चुनाव करता है।