13 जुलाई 2026
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विधायक खरीद-फरोख्त विवाद: भाजपा ने उमर अब्दुल्ला को भेजा ₹100 करोड़ का नोटिस, जवाब न देने पर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी

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विधायक खरीद-फरोख्त विवाद: भाजपा ने उमर अब्दुल्ला को भेजा ₹100 करोड़ का नोटिस, जवाब न देने पर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी

सारांश

जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला के विधायक खरीद-फरोख्त के आरोपों पर भाजपा ने ₹100 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजकर पलटवार किया है। भाजपा ने चेतावनी दी है कि जवाब न मिलने पर आपराधिक कार्रवाई होगी — यह जम्मू-कश्मीर में सत्ता और विपक्ष के बीच तेज होते टकराव का नया मोर्चा है।

मुख्य बातें

भाजपा ने जम्मू-कश्मीर CM उमर अब्दुल्ला को विधायक खरीद-फरोख्त के आरोपों पर ₹100 करोड़ का कानूनी नोटिस भेजा।
भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि तय समय में जवाब न देने पर मामला आपराधिक बन जाएगा।
मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कथित तौर पर दावा किया था कि एक विधायक को ₹20 से ₹30 करोड़ की पेशकश की गई।
जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि पहले ₹30 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर हो चुका है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता शेख बशीर ने भाजपा पर जनादेश कमजोर करने की कोशिश का आरोप लगाया।

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 13 जुलाई को कड़ा पलटवार किया। भाजपा ने मुख्यमंत्री को कानूनी नोटिस भेजते हुए ₹100 करोड़ के मुआवजे की माँग की है और चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में जवाब न मिलने पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य घटनाक्रम

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर यह बयान दिया था कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को तोड़ने और सरकार गिराने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया था कि एक विधायक को कथित तौर पर ₹20 से ₹30 करोड़ तक की पेशकश की गई थी। इन आरोपों के जवाब में भाजपा ने पहले ₹30 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया और बाद में कानूनी नोटिस के माध्यम से ₹100 करोड़ के मुआवजे की माँग की।

भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया

भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला को तय समय सीमा के भीतर नोटिस का जवाब देना ही होगा। उन्होंने सवाल किया, 'उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनके लिए उनके पास क्या सबूत हैं? अगर वह तय समय के भीतर यह नहीं बता पाते कि उनके विधायकों को कथित तौर पर कौन प्रलोभन दे रहा था और ऐसा क्यों किया जा रहा था, तो यह एक आपराधिक मामला बन जाएगा।' इल्मी ने यह भी कहा कि जब उनके अपने नेताओं और विधायकों को ही उन पर भरोसा नहीं है, तो 'ऑपरेशन लोटस' जैसे आरोप लगाने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।

जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बार-बार प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि मुख्यमंत्री नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, तो उन्हें माफी माँगनी चाहिए। माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई तय थी। भाजपा नेता साजिद यूसुफ शाह ने भी मुख्यमंत्री से कहा कि यदि विधायकों को ₹20-30 करोड़ दिए जाने का दावा सच है, तो सबूत पेश किए जाएँ।

नेशनल कॉन्फ्रेंस का पक्ष

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता शेख बशीर ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं कहा। उन्होंने तर्क दिया, 'लोगों ने हमें जनादेश दिया। चुनावों के दौरान भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के पक्ष में वोट दिया। अब वे उस जनादेश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।' शेख बशीर ने कहा कि केवल 29 विधायकों के साथ भाजपा सरकार नहीं बना सकती, जब तक कि वह विधायकों को खरीदने की कोशिश न करे।

आम जनता और राजनीतिक असर

यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार अपेक्षाकृत नई है और राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन लोटस' — जो कथित तौर पर विपक्षी विधायकों को सत्तारूढ़ दल में शामिल कराने की रणनीति है — का आरोप देश के कई राज्यों में पहले भी लग चुका है। इस मामले में भाजपा द्वारा ₹100 करोड़ का नोटिस भेजा जाना राजनीतिक दबाव की एक असामान्य रूप से आक्रामक रणनीति मानी जा रही है।

क्या होगा आगे

भाजपा के कानूनी नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री अब्दुल्ला का जवाब इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा। यदि मुख्यमंत्री तय समय में जवाब नहीं देते या सबूत पेश नहीं करते, तो भाजपा के अनुसार आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में केंद्र-राज्य तनाव का एक नया अध्याय बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक राजनीतिक संदेश है — जो विपक्षी मुख्यमंत्रियों को 'ऑपरेशन लोटस' जैसे आरोप लगाने से पहले दो बार सोचने पर मजबूर करे। लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भाजपा यह साबित कर पाएगी कि आरोप झूठे थे, या क्या मुख्यमंत्री अब्दुल्ला के पास ऐसे सबूत हैं जो इस मुकदमे को उलट सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में जहाँ राजनीतिक स्थिरता पहले से नाजुक है, वहाँ यह कानूनी लड़ाई केंद्र-राज्य संबंधों को और जटिल बना सकती है। 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप देश के कई राज्यों में पहले भी उठ चुका है — इसलिए इस बार भी जनता की नजर सबूतों पर होगी, बयानों पर नहीं।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

उमर अब्दुल्ला पर भाजपा ने कितने करोड़ का नोटिस भेजा है?
भाजपा की कानूनी टीम ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को ₹100 करोड़ के मुआवजे का कानूनी नोटिस भेजा है। इससे पहले ₹30 करोड़ का मानहानि मुकदमा भी दायर किया जा चुका है।
उमर अब्दुल्ला ने विधायक खरीद-फरोख्त को लेकर क्या आरोप लगाए थे?
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर कहा था कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को तोड़ने और सरकार गिराने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया कि एक विधायक को कथित तौर पर ₹20 से ₹30 करोड़ तक की पेशकश की गई थी।
भाजपा ने उमर अब्दुल्ला से क्या माँग की है?
भाजपा ने माँग की है कि मुख्यमंत्री या तो आरोपों के सबूत पेश करें या सार्वजनिक रूप से माफी माँगें। तय समय सीमा में जवाब न मिलने पर भाजपा ने आपराधिक कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का इस विवाद पर क्या कहना है?
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता शेख बशीर ने कहा कि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने कुछ भी गलत नहीं कहा। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास केवल 29 विधायक हैं और वह सरकार नहीं बना सकती, जब तक विधायक खरीदने की कोशिश न करे।
'ऑपरेशन लोटस' क्या है जिसका इस मामले में उल्लेख हुआ?
'ऑपरेशन लोटस' एक कथित राजनीतिक रणनीति को दिया गया नाम है, जिसमें विपक्षी दलों के विधायकों को प्रलोभन देकर सत्तारूढ़ दल में शामिल कराने या सरकार गिराने का प्रयास किया जाता है। यह आरोप देश के कई राज्यों में विभिन्न दलों द्वारा लगाए जाते रहे हैं।
राष्ट्र प्रेस
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