विधायक खरीद-फरोख्त विवाद: भाजपा ने उमर अब्दुल्ला को भेजा ₹100 करोड़ का नोटिस, जवाब न देने पर आपराधिक कार्रवाई की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा विधायकों की खरीद-फरोख्त को लेकर लगाए गए आरोपों के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 13 जुलाई को कड़ा पलटवार किया। भाजपा ने मुख्यमंत्री को कानूनी नोटिस भेजते हुए ₹100 करोड़ के मुआवजे की माँग की है और चेतावनी दी है कि तय समय सीमा में जवाब न मिलने पर आपराधिक कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य घटनाक्रम
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कथित तौर पर यह बयान दिया था कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के विधायकों को तोड़ने और सरकार गिराने की कोशिश की। उन्होंने यह भी दावा किया था कि एक विधायक को कथित तौर पर ₹20 से ₹30 करोड़ तक की पेशकश की गई थी। इन आरोपों के जवाब में भाजपा ने पहले ₹30 करोड़ का मानहानि मुकदमा दायर किया और बाद में कानूनी नोटिस के माध्यम से ₹100 करोड़ के मुआवजे की माँग की।
भाजपा नेताओं की प्रतिक्रिया
भाजपा नेता शाजिया इल्मी ने कहा कि मुख्यमंत्री अब्दुल्ला को तय समय सीमा के भीतर नोटिस का जवाब देना ही होगा। उन्होंने सवाल किया, 'उन्होंने जो आरोप लगाए हैं, उनके लिए उनके पास क्या सबूत हैं? अगर वह तय समय के भीतर यह नहीं बता पाते कि उनके विधायकों को कथित तौर पर कौन प्रलोभन दे रहा था और ऐसा क्यों किया जा रहा था, तो यह एक आपराधिक मामला बन जाएगा।' इल्मी ने यह भी कहा कि जब उनके अपने नेताओं और विधायकों को ही उन पर भरोसा नहीं है, तो 'ऑपरेशन लोटस' जैसे आरोप लगाने से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा।
जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष सत शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री ने बार-बार प्रधानमंत्री और भाजपा की छवि खराब करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि यदि मुख्यमंत्री नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते, तो उन्हें माफी माँगनी चाहिए। माफी न माँगने पर कानूनी कार्रवाई तय थी। भाजपा नेता साजिद यूसुफ शाह ने भी मुख्यमंत्री से कहा कि यदि विधायकों को ₹20-30 करोड़ दिए जाने का दावा सच है, तो सबूत पेश किए जाएँ।
नेशनल कॉन्फ्रेंस का पक्ष
नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता शेख बशीर ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कुछ भी गलत नहीं कहा। उन्होंने तर्क दिया, 'लोगों ने हमें जनादेश दिया। चुनावों के दौरान भाजपा ने कोई कसर नहीं छोड़ी, लेकिन लोगों ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के पक्ष में वोट दिया। अब वे उस जनादेश को कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं।' शेख बशीर ने कहा कि केवल 29 विधायकों के साथ भाजपा सरकार नहीं बना सकती, जब तक कि वह विधायकों को खरीदने की कोशिश न करे।
आम जनता और राजनीतिक असर
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनावों के बाद नई सरकार अपेक्षाकृत नई है और राजनीतिक स्थिरता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि 'ऑपरेशन लोटस' — जो कथित तौर पर विपक्षी विधायकों को सत्तारूढ़ दल में शामिल कराने की रणनीति है — का आरोप देश के कई राज्यों में पहले भी लग चुका है। इस मामले में भाजपा द्वारा ₹100 करोड़ का नोटिस भेजा जाना राजनीतिक दबाव की एक असामान्य रूप से आक्रामक रणनीति मानी जा रही है।
क्या होगा आगे
भाजपा के कानूनी नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री अब्दुल्ला का जवाब इस विवाद की अगली दिशा तय करेगा। यदि मुख्यमंत्री तय समय में जवाब नहीं देते या सबूत पेश नहीं करते, तो भाजपा के अनुसार आपराधिक कार्रवाई का रास्ता खुल सकता है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह मामला जम्मू-कश्मीर की राजनीति में केंद्र-राज्य तनाव का एक नया अध्याय बन सकता है।