उमर अब्दुल्ला पर BJP का पलटवार: विधायक तोड़ने के आरोपों पर ₹100 करोड़ मानहानि नोटिस
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला इन दिनों कानूनी दबाव में हैं। भारतीय जनता पार्टी (BJP) की जम्मू-कश्मीर इकाई ने 13 जुलाई 2025 को उन्हें विधिक नोटिस भेजा है, जिसमें उनके उन आरोपों को 'झूठा, बेबुनियाद और मानहानिपूर्ण' करार दिया गया है जिनमें उन्होंने कहा था कि BJP नेताओं ने नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के विधायकों को ₹20-30 करोड़ और मंत्री पद का प्रलोभन देकर सरकार गिराने की कोशिश की। पार्टी ने माफी न मिलने पर ₹100 करोड़ के मानहानि मुकदमे की चेतावनी दी है।
मूल आरोप: उमर ने क्या कहा था
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने 11 जुलाई को श्रीनगर में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि BJP के एक पदाधिकारी — जो सर्वोच्च न्यायालय में वकील भी हैं — ने जम्मू क्षेत्र के कुछ NC विधायकों से संपर्क कर उन्हें BJP में शामिल होने के बदले भारी रकम और सरकारी पद की पेशकश की। उनका कहना था कि यह प्रयास उनकी सरकार को अस्थिर करने की सुनियोजित कोशिश का हिस्सा था।
BJP का कानूनी पलटवार
जम्मू-कश्मीर BJP अध्यक्ष सतपाल शर्मा ने हाईकोर्ट के अधिवक्ता परिमोक्ष सेठ के माध्यम से मुख्यमंत्री को यह नोटिस भिजवाया। नोटिस में स्पष्ट कहा गया है: 'आपके लगाए ये आरोप बिना किसी आधार, बिना किसी साक्ष्य और पूरी तरह झूठे हैं। इन्हें आपने जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण मंशा से पार्टी की सार्वजनिक प्रतिष्ठा को धूमिल करने के उद्देश्य से लगाया है।' नोटिस के अनुसार ये बयान दीवानी और आपराधिक दोनों प्रकार की मानहानि की श्रेणी में आते हैं।
माफी और वापसी की माँग
BJP ने मुख्यमंत्री के सामने दो स्पष्ट शर्तें रखी हैं — नोटिस मिलने के 7 दिनों के भीतर बिना किसी शर्त के सार्वजनिक माफी माँगें और लगाए गए सभी आरोप वापस लें। पार्टी ने यह भी आगाह किया है कि भविष्य में इस तरह के बयान दोहराए जाने पर कानूनी कार्रवाई और तेज़ होगी। माफी न मिलने की स्थिति में ₹100 करोड़ के मानहानि दावे की चेतावनी दी गई है।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब जम्मू-कश्मीर में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेतृत्व वाली सरकार और BJP के बीच तनाव पहले से ही बना हुआ है। गौरतलब है कि केंद्र शासित प्रदेश में विधानसभा का गठन अपेक्षाकृत हाल ही में हुआ है, और विपक्ष की ओर से सरकार की स्थिरता पर सवाल उठाने की कोशिशें रुक-रुककर सामने आती रही हैं। विधायकों की खरीद-फरोख्त के आरोप भारतीय राजनीति में नए नहीं हैं, लेकिन मुख्यमंत्री द्वारा सीधे और नाम लेकर इस तरह के दावे किए जाना इस मामले को असाधारण बनाता है।
आगे क्या होगा
अब सभी की निगाहें इस पर हैं कि मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला BJP के नोटिस का जवाब कैसे देते हैं — क्या वे अपने आरोपों पर कायम रहेंगे या माफी का रास्ता चुनेंगे। यदि निर्धारित समयसीमा में माफी नहीं मिली, तो मामला अदालत तक पहुँच सकता है, जो जम्मू-कश्मीर की राजनीति में एक नया और पेचीदा अध्याय खोलेगा।