13 जुलाई 2026
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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: निफ्टी जून 2027 तक 26,500 पर, FII बिकवाली का दौर लगभग समाप्त

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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान: निफ्टी जून 2027 तक 26,500 पर, FII बिकवाली का दौर लगभग समाप्त

सारांश

गोल्डमैन सैक्स ने भारतीय बाज़ारों को लेकर अपना रुख पलटा है — मई 2026 की सतर्कता के बाद अब फ़र्म को निफ्टी जून 2027 तक 26,500 पर दिख रहा है। FII की 3.5 महीनों में $30 अरब की बिकवाली के बाद जून के दूसरे पखवाड़े से वापसी शुरू हो चुकी है।

मुख्य बातें

गोल्डमैन सैक्स ने जुलाई 2026 की इंडिया स्ट्रैटेजी नोट में कहा कि निफ्टी जून 2027 तक 26,500 तक पहुँच सकता है।
यह लक्ष्य मौजूदा स्तरों से करीब 10 प्रतिशत अधिक है।
2026 की पहली छमाही में FII ने केवल 3.5 महीनों में 30 अरब डॉलर से अधिक की भारतीय इक्विटी बेची।
जून के दूसरे पखवाड़े से FII शुद्ध खरीदार बने; जुलाई में ₹15,157 करोड़ का शुद्ध निवेश किया।
एनएसडीएल के अनुसार वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक FII की शुद्ध निकासी ₹1.28 लाख करोड़ रही।
आय डाउनग्रेड और वैल्यूएशन की चिंता अभी भी बनी हुई है, लेकिन घरेलू रिकवरी की दृश्यता सकारात्मक संकेत दे रही है।

गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने जुलाई 2026 की अपनी इंडिया स्ट्रैटेजी नोट में कहा है कि भारतीय बाज़ारों में विदेशी निवेशकों की बिकवाली का दौर करीब-करीब थम चुका है और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की कम हिस्सेदारी तथा मज़बूत घरेलू आधार के चलते भारतीय इक्विटी बाज़ार के प्रति धारणा फिर से सकारात्मक हो रही है। फ़र्म के विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी जून 2027 तक 26,500 के स्तर तक पहुँच सकता है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 10 प्रतिशत अधिक है।

नोट में क्या कहा गया

गोल्डमैन सैक्स में एशिया मैक्रो रिसर्च के को-हेड और एशिया-पैसिफिक इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट टिमोथी मो ने अमोरिता गोयल और सुनील कौल के साथ मिलकर यह नोट तैयार किया है। नोट में स्पष्ट किया गया कि जुलाई 2026 का यह आउटलुक मई 2026 के उनके पिछले रुख से बिल्कुल अलग है, जब उन्हें उत्तर एशिया के दूसरे बाज़ारों की तुलना में भारतीय इक्विटी में रिस्क-रिवॉर्ड का समीकरण 'कम आकर्षक' लगा था।

उस समय विश्लेषकों को यह भी उम्मीद नहीं थी कि तेल की कीमतें घटने पर भी विदेशी निवेशक जल्द भारतीय बाज़ार में लौटेंगे। अब यह रुख बदल गया है।

FII बिकवाली का पैमाना

नोट के अनुसार, 2026 की पहली छमाही में वैश्विक निवेशकों ने भारत को 'फंडिंग मार्केट' के रूप में इस्तेमाल किया। केवल 3.5 महीनों में विदेशी निवेशकों ने 30 अरब डॉलर से अधिक की भारतीय इक्विटी बेची। हालाँकि, जून के दूसरे पखवाड़े से स्थिति पलटी और विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार बन गए — इस दौरान उन्होंने करीब 2 अरब डॉलर का निवेश किया।

एनएसडीएल के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक FII ने भारतीय इक्विटी से ₹1.28 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी की है। जून में उन्होंने ₹49,340 करोड़ की बिकवाली की, जबकि जुलाई में FII ने भारतीय शेयर बाज़ारों में ₹15,157 करोड़ का शुद्ध निवेश किया।

आगे की राह और चुनौतियाँ

गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने कहा कि भारतीय इक्विटी में ग्लोबल फंड्स की 'अंडरवेट' स्थिति को देखते हुए उनके पास अपनी पोज़ीशन संतुलित करने का अच्छा अवसर है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू संस्थागत निवेशकों ने बाज़ार को स्थिरता दी हुई है।

हालाँकि, विश्लेषकों ने दो प्रमुख जोखिमों की ओर भी ध्यान दिलाया — पहला, लगातार आय के डाउनग्रेड का दौर; और दूसरा, अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में भारत का ग्रोथ-वैल्यूएशन जोड़ अभी भी कम आकर्षक बना हुआ है। बावजूद इसके, नोट में कहा गया कि घरेलू रिकवरी की बेहतर दृश्यता निवेशकों को अनुमानित सुधार को पहले से ही 'प्राइस-इन' करने के लिए प्रेरित कर सकती है।

बाज़ार पर असर

गोल्डमैन सैक्स की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब भारतीय बाज़ार हाल के महीनों में वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच दबाव में रहे हैं। गौरतलब है कि FII का लौटना और घरेलू निवेशकों की मज़बूत भागीदारी मिलकर बाज़ार को नई ऊँचाइयों की ओर ले जा सकती है। निफ्टी के 26,500 के लक्ष्य तक पहुँचने की राह इस बात पर निर्भर करेगी कि घरेलू आय में सुधार कितनी तेज़ी से आता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह याद रखना ज़रूरी है कि यही फ़र्म मई 2026 में भारत को 'कम आकर्षक' बता रही थी — और तब से बाज़ार की बुनियाद बदली नहीं है, बस FII प्रवाह की दिशा बदली है। असली सवाल यह है कि क्या 26,500 का लक्ष्य आय सुधार पर टिका है या केवल FII की 'अंडरवेट' पोज़ीशन के सामान्य होने पर। अगर घरेलू आय डाउनग्रेड का सिलसिला जारी रहा, तो यह लक्ष्य तरलता-चालित रैली पर निर्भर हो जाएगा — जो टिकाऊ नहीं होती। निवेशकों को इस रिपोर्ट को उत्साह से नहीं, सतर्कता से पढ़ना चाहिए।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गोल्डमैन सैक्स ने निफ्टी का लक्ष्य कितना रखा है?
गोल्डमैन सैक्स के विश्लेषकों ने जुलाई 2026 की इंडिया स्ट्रैटेजी नोट में निफ्टी का लक्ष्य जून 2027 तक 26,500 रखा है, जो मौजूदा स्तरों से करीब 10 प्रतिशत अधिक है।
2026 में FII ने भारतीय बाज़ार से कितनी बिकवाली की?
एनएसडीएल के आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 में अब तक FII ने भारतीय इक्विटी से ₹1.28 लाख करोड़ की शुद्ध निकासी की है। 2026 की पहली छमाही में केवल 3.5 महीनों में 30 अरब डॉलर से अधिक की बिकवाली हुई।
क्या FII अब भारत में वापस आ रहे हैं?
हाँ, जून 2026 के दूसरे पखवाड़े से FII शुद्ध खरीदार बन गए हैं और इस दौरान करीब 2 अरब डॉलर का निवेश किया है। जुलाई में FII ने भारतीय शेयर बाज़ारों में ₹15,157 करोड़ का शुद्ध निवेश किया।
गोल्डमैन सैक्स के अनुसार भारतीय बाज़ार के लिए मुख्य जोखिम क्या हैं?
गोल्डमैन सैक्स ने दो प्रमुख जोखिम गिनाए हैं — पहला, लगातार आय डाउनग्रेड का दौर; और दूसरा, अन्य उभरते बाज़ारों की तुलना में भारत का ग्रोथ-वैल्यूएशन जोड़ अभी भी कम आकर्षक बना हुआ है।
गोल्डमैन सैक्स का पिछला रुख भारत पर क्या था?
मई 2026 में गोल्डमैन सैक्स को उत्तर एशिया के अन्य बाज़ारों की तुलना में भारतीय इक्विटी में रिस्क-रिवॉर्ड का समीकरण 'कम आकर्षक' लगा था। जुलाई 2026 की नोट में यह रुख स्पष्ट रूप से बदला है।
राष्ट्र प्रेस
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