13 जुलाई 2026
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सेबी ने कर्मचारियों की आचार संहिता सख्त की: शेयर निवेश पर रोक, 2 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू

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सेबी ने कर्मचारियों की आचार संहिता सख्त की: शेयर निवेश पर रोक, 2 साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू

सारांश

सेबी ने अपने कर्मचारियों पर शेयर व डेरिवेटिव्स में नए निवेश पर रोक लगा दी है, इस्तीफे के बाद दो साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू किया है और नौकरी बदलने की बातचीत शुरू होते ही एक महीने में खुलासा अनिवार्य कर दिया है। यह नियामक की विश्वसनीयता बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

सेबी (कर्मचारी सेवा) (संशोधन) विनियम, 2026 के तहत कर्मचारियों की आचार संहिता में व्यापक बदलाव 13 जुलाई 2026 को अधिसूचित किए गए।
कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, इक्विटी-परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई नया निवेश नहीं कर सकेंगे।
विनियमित उत्पादों में निवेश कुल पोर्टफोलियो के 25% से अधिक नहीं होगा; ESOP और PMS को छूट।
सेवानिवृत्त या इस्तीफा देने वाले कर्मचारियों पर 2 वर्ष का कूलिंग-ऑफ पीरियड; इस दौरान सेबी के समक्ष पैरवी पर पूर्ण प्रतिबंध।
नई नौकरी की बातचीत शुरू होते ही 1 महीने के भीतर सेबी को सूचना देना अनिवार्य।
उपहार रिपोर्टिंग की सीमा ₹10,000 से बढ़ाकर ₹50,000 की गई।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने 13 जुलाई 2026 को अपने कर्मचारियों के लिए सेवा नियमों में व्यापक संशोधन करते हुए आचार संहिता को काफी कड़ा कर दिया है। सेबी (कर्मचारी सेवा) (संशोधन) विनियम, 2026 के तहत हितों के टकराव पर अंकुश लगाने, निवेश गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाने और नियामकीय पारदर्शिता को मज़बूत करने के लिए कई अहम प्रावधान लागू किए गए हैं। ये बदलाव सेबी के कार्यबल पर तत्काल प्रभाव से लागू होंगे।

परिवार और आश्रित की परिभाषा का विस्तार

संशोधित नियमों में सेबी ने 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा को व्यापक बनाया है। अब इस दायरे में गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और ऐसे व्यक्ति भी शामिल होंगे जो किसी कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर हैं। इस विस्तारित परिभाषा के कारण निवेश, खुलासे और अन्य सेवा संबंधी नियमों का दायरा भी पहले से अधिक व्यापक हो जाएगा, जिससे परिवार के माध्यम से संभावित हितों के टकराव को रोका जा सकेगा।

दो साल का कूलिंग-ऑफ पीरियड और नौकरी बदलने पर खुलासा अनिवार्य

नए नियमों के अनुसार, सेबी से इस्तीफा देने या सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों पर दो वर्ष का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होगा। इस अवधि के दौरान पूर्व कर्मचारी किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष किसी भी मामले में पैरवी नहीं कर सकेंगे — चाहे वह जाँच, सुनवाई, सेटलमेंट या किसी मंजूरी से जुड़ा हो। इसके अलावा, यदि कोई कार्यरत कर्मचारी किसी अन्य संस्था में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी सूचना सेबी को देनी होगी।

शेयर और डेरिवेटिव्स में नए निवेश पर प्रतिबंध

सेबी ने कर्मचारियों के निवेश नियम भी उल्लेखनीय रूप से सख्त कर दिए हैं। नए प्रावधानों के तहत कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, इक्विटी में परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई नया निवेश नहीं कर सकेंगे। हालांकि, म्यूचुअल फंड और रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (REITs) जैसे विनियमित सामूहिक निवेश साधनों में निवेश पहले की तरह जारी रह सकेगा। यह ऐसे समय में आया है जब नियामक संस्थाओं में भीतरी जानकारी के दुरुपयोग को लेकर वैश्विक स्तर पर सख्ती बढ़ रही है।

निवेश पोर्टफोलियो पर 25% की सीमा और छूट के प्रावधान

नियमों के अनुसार, कुछ विनियमित निवेश उत्पादों में किया गया निवेश किसी कर्मचारी के कुल निवेश पोर्टफोलियो के 25% से अधिक नहीं हो सकेगा। कुछ मामलों में छूट का प्रावधान भी है — जिनमें कर्मचारी के जीवनसाथी को मिले एम्प्लॉई स्टॉक ऑप्शन (ESOP) और विवेकाधीन पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (PMS) के अंतर्गत किए गए निवेश शामिल हैं।

उपहार सीमा ₹10,000 से बढ़कर ₹50,000

उपहार नियमों में भी संशोधन किया गया है। अब कर्मचारियों को ₹50,000 तक के उपहार की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी — पहले यह सीमा ₹10,000 थी। सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि परंपरागत और सामाजिक अवसरों पर मिलने वाले उपहारों को किन परिस्थितियों में स्वीकार किया जा सकता है। गौरतलब है कि उपहार सीमा में यह बढ़ोतरी मुद्रास्फीति के अनुरूप है, जबकि बाकी नियम निगरानी की दिशा में और कड़े हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सेबी इन नियमों के अनुपालन की निगरानी किस तंत्र से करता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल अनुपालन की निगरानी का है — नियामक स्वयं अपने कर्मचारियों के पोर्टफोलियो और नौकरी-बातचीत की जाँच किस स्वतंत्र तंत्र से करेगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है। कूलिंग-ऑफ पीरियड का विचार वैश्विक स्तर पर प्रचलित है, परंतु भारत में इसके उल्लंघन पर दंड की प्रभावशीलता अब तक सीमित रही है। उपहार सीमा का ₹10,000 से ₹50,000 तक बढ़ना — जब बाकी नियम कड़े हो रहे हों — एक विरोधाभासी संकेत देता है जिस पर ध्यान देना ज़रूरी है। सेबी की विश्वसनीयता तभी मज़बूत होगी जब ये नियम सार्वजनिक रूप से सत्यापन-योग्य परिणाम देंगे।
RashtraPress
13 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सेबी ने कर्मचारियों के लिए कौन-से नए निवेश नियम लागू किए हैं?
सेबी के नए नियमों के तहत कर्मचारी और उनके परिवार के सदस्य नौकरी के दौरान शेयर, इक्विटी-परिवर्तनीय प्रतिभूतियों और डेरिवेटिव्स में कोई नया निवेश नहीं कर सकेंगे। म्यूचुअल फंड और REITs जैसे विनियमित सामूहिक निवेश साधनों में निवेश की अनुमति जारी रहेगी, लेकिन ऐसे निवेश कुल पोर्टफोलियो के 25% से अधिक नहीं होने चाहिए।
सेबी का कूलिंग-ऑफ पीरियड क्या है और यह किन पर लागू होगा?
सेबी से इस्तीफा देने या सेवानिवृत्त होने वाले कर्मचारियों पर दो वर्ष का कूलिंग-ऑफ पीरियड लागू होगा। इस दौरान वे किसी भी व्यक्ति या संस्था की ओर से सेबी के समक्ष जाँच, सुनवाई, सेटलमेंट या मंजूरी से जुड़े किसी भी मामले में पैरवी नहीं कर सकेंगे।
सेबी कर्मचारियों को नौकरी बदलने पर क्या करना होगा?
यदि कोई सेबी कर्मचारी किसी अन्य संस्था में नौकरी के लिए बातचीत शुरू करता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी सूचना सेबी को देनी होगी। यह प्रावधान संभावित हितों के टकराव को रोकने और नियामकीय पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है।
सेबी ने 'परिवार' की परिभाषा में क्या बदलाव किया है?
संशोधित नियमों में 'परिवार' और 'आश्रित' की परिभाषा में गोद लिए गए बच्चे, सौतेले बच्चे और कर्मचारी पर काफी हद तक आर्थिक रूप से निर्भर व्यक्तियों को भी शामिल किया गया है। इससे निवेश और खुलासे से जुड़े नियमों का दायरा पहले से व्यापक हो जाएगा।
सेबी कर्मचारियों के लिए उपहार नियमों में क्या बदलाव हुआ है?
अब सेबी कर्मचारियों को ₹50,000 तक के उपहार की रिपोर्ट करने की आवश्यकता नहीं होगी — पहले यह सीमा ₹10,000 थी। सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि परंपरागत और सामाजिक अवसरों पर मिलने वाले उपहारों को किन परिस्थितियों में स्वीकार किया जा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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