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एफआईआई की वापसी के लिए रुपए में स्थिरता और आय वृद्धि जरूरी: विशेषज्ञ

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एफआईआई की वापसी के लिए रुपए में स्थिरता और आय वृद्धि जरूरी: विशेषज्ञ

सारांश

2026 में अब तक ₹2,22,343 करोड़ की बिकवाली कर चुके एफआईआई की वापसी का इंतजार है — लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार यह तभी होगा जब रुपया स्थिर हो और कॉर्पोरेट आय में ठोस सुधार दिखे। डीआईआई फिलहाल बाजार को सँभाले हुए हैं।

मुख्य बातें

एफआईआई ने मई 2026 की शुरुआत से अब तक ₹30,374 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है।
2026 की शुरुआत से कुल एफआईआई बिकवाली ₹2,22,343 करोड़ तक पहुँची।
2025 में भी एफआईआई ने ₹1,66,283 करोड़ की बिकवाली की थी — यह लगातार दूसरा वर्ष है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ.
विजयकुमार के अनुसार रुपए की स्थिरता और आय वृद्धि एफआईआई वापसी की मुख्य शर्तें हैं।
डीआईआई ने पिछले सप्ताह के सभी पाँच सत्रों में खरीदारी की, कुल शुद्ध प्रवाह ₹16,950 करोड़ रहा।
जेफरीज के अनुसार रुपए पर दबाव का मुख्य कारण एफआईआई बिकवाली और घरेलू एसआईपी प्रवाह का संयोजन है।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) की भारतीय शेयर बाजार में पुनः वापसी तभी संभव है जब रुपए में स्थिरता आए और कॉर्पोरेट आय वृद्धि में सुधार हो — यह विश्लेषण 24 मई 2026 को बाजार विशेषज्ञों ने साझा किया। फिलहाल एफआईआई भारतीय इक्विटी बाजार में शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं और इस रुझान के पलटने के लिए कई मोर्चों पर बदलाव जरूरी बताए जा रहे हैं।

एफआईआई की बिकवाली का पैमाना

मई 2026 की शुरुआत से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक भारतीय इक्विटी बाजार में ₹30,374 करोड़ की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। 2026 की शुरुआत से यह आँकड़ा बढ़कर ₹2,22,343 करोड़ तक पहुँच चुका है।

गौरतलब है कि 2025 में भी एफआईआई शुद्ध विक्रेता रहे थे और उस पूरे वर्ष उन्होंने ₹1,66,283 करोड़ की बिकवाली की थी। यानी लगातार दो वर्षों से विदेशी पूँजी का भारतीय बाजार से पलायन जारी है।

बिकवाली के पीछे मुख्य कारण

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, 'महत्वपूर्ण सवाल यह है कि भारत में एफआईआई कब खरीदारी शुरू करेंगे। इस निरंतर बिकवाली के पीछे के मुख्य कारणों को समझना जरूरी है।'

विजयकुमार के अनुसार इन कारणों में शामिल हैं — भारत में आय वृद्धि की धीमी गति, अन्य बाजारों में बेहतर आय संभावनाएँ, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का ऊँचा स्तर और रुपए का अवमूल्यन। उन्होंने स्पष्ट किया, 'इनमें से कम से कम कुछ कारकों में भारत के पक्ष में बदलाव आना जरूरी है, तभी एफआईआई भारत में खरीदारी शुरू करेंगे।'

आय में सुधार के संकेत

विश्लेषकों ने यह भी रेखांकित किया कि लार्ज कैप शेयरों में बिकवाली के बावजूद विदेशी निवेशक स्मॉल और मिडकैप शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं, जहाँ आय और विकास की संभावनाएँ अपेक्षाकृत बेहतर हैं। डॉ. विजयकुमार ने कहा, 'चौथी तिमाही के परिणामों से एक महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि आय में सुधार के संकेत मिल रहे हैं।' यह रुझान एफआईआई के रवैये में बदलाव की संभावना को बल देता है।

घरेलू निवेशकों की भूमिका

घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले सप्ताह के सभी पाँच ट्रेडिंग सत्रों में शुद्ध खरीदारी की और उनका कुल शुद्ध प्रवाह ₹16,950 करोड़ रहा। यह स्थानीय बाजार को एफआईआई बिकवाली के दबाव से बचाने में अहम भूमिका निभा रहा है।

वैश्विक ब्रोकरेज जेफरीज के अनुसार, रुपए की हालिया कमजोरी का संबंध तेल की कीमतों या चालू खाता घाटे से कम और घरेलू निवेशकों द्वारा एसआईपी के माध्यम से लगातार शेयर खरीदने से अधिक हो सकता है। जेफरीज ने एक नोट में कहा कि भारतीय शेयरों में भारी विदेशी बिकवाली और मजबूत घरेलू प्रवाह का संयोजन रुपए पर दबाव का प्रमुख कारण बना है।

आगे क्या उम्मीद

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आने वाली तिमाहियों में कॉर्पोरेट आय के आँकड़े सुधरते हैं और रुपया स्थिर होता है, तो एफआईआई का रुख बदल सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा और डॉलर की चाल पर निवेशकों की नजर टिकी है। बाजार की दिशा काफी हद तक इन्हीं कारकों पर निर्भर करेगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि लगातार दो वर्षों की भारी बिकवाली महज तकनीकी कारणों से नहीं है — यह भारत की आय वृद्धि की संरचनात्मक कमजोरी को भी उजागर करती है। चौथी तिमाही में सुधार के 'संकेत' और वास्तविक, टिकाऊ आय वृद्धि के बीच का फर्क बड़ा है। डीआईआई की खरीदारी बाजार को थाम रही है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है — और रुपए पर एसआईपी प्रवाह के दबाव की जेफरीज की व्याख्या घरेलू निवेश उत्साह के एक अनदेखे पहलू को सामने लाती है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एफआईआई भारतीय शेयर बाजार में वापसी कब करेंगे?
विशेषज्ञों के अनुसार एफआईआई की वापसी तब होगी जब रुपए में स्थिरता आए और भारतीय कॉर्पोरेट आय वृद्धि में ठोस सुधार दिखे। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का स्तर और अन्य बाजारों की बेहतर संभावनाएँ भी इस फैसले को प्रभावित करती हैं।
2026 में एफआईआई ने भारतीय बाजार से कितनी बिकवाली की है?
2026 की शुरुआत से अब तक विदेशी संस्थागत निवेशक ₹2,22,343 करोड़ की शुद्ध बिकवाली कर चुके हैं। इसमें से मई 2026 की शुरुआत से अब तक ₹30,374 करोड़ की बिकवाली हुई है।
डीआईआई और एफआईआई के बीच अभी क्या अंतर है?
जहाँ एफआईआई लगातार शुद्ध विक्रेता बने हुए हैं, वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने पिछले सप्ताह के सभी पाँच ट्रेडिंग सत्रों में शुद्ध खरीदारी की और उनका शुद्ध प्रवाह ₹16,950 करोड़ रहा। डीआईआई की यह खरीदारी बाजार को विदेशी बिकवाली के दबाव से बचाने में मदद कर रही है।
रुपए की कमजोरी का असली कारण क्या है?
जेफरीज के अनुसार रुपए की हालिया कमजोरी का संबंध तेल की कीमतों या चालू खाता घाटे से कम है। ब्रोकरेज ने कहा कि भारतीय शेयरों में भारी विदेशी बिकवाली और घरेलू निवेशकों द्वारा एसआईपी के माध्यम से लगातार खरीदारी का संयोजन रुपए पर दबाव का मुख्य कारण बना है।
एफआईआई स्मॉल और मिडकैप शेयरों में क्यों खरीदारी कर रहे हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार लार्ज कैप में बिकवाली के बावजूद एफआईआई उन स्मॉल और मिडकैप शेयरों में खरीदारी कर रहे हैं जहाँ आय और विकास की संभावनाएँ बेहतर हैं। यह इस बात का संकेत है कि आय वृद्धि ही उनके निवेश निर्णयों का केंद्रीय कारक है।
राष्ट्र प्रेस
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