डीआईआई ने ₹2,44,052 करोड़ के निवेश से थामा बाजार, एफआईआई की रिकॉर्ड बिकवाली के बावजूद भारतीय शेयर बाजार स्थिर
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय इक्विटी बाजार में जनवरी-मार्च 2026 की तिमाही में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने ₹1,31,122 करोड़ का उच्चतम तिमाही आउटफ्लो दर्ज कराया, लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने ₹2,44,052 करोड़ के शुद्ध इनफ्लो से बाजार को मजबूत सहारा दिया। वेंचुरा की मंगलवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक अनिश्चितता के बीच घरेलू निवेशक अब भारतीय शेयर बाजार की असली ताकत बनकर उभरे हैं।
एफआईआई बिकवाली का पूरा चित्र
वेंचुरा की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 26 में एफआईआई की कुल बिकवाली सालाना आधार पर 34 प्रतिशत घटकर ₹2,64,819 करोड़ रह गई, जो वित्त वर्ष 25 में ₹4,03,581 करोड़ थी। हालाँकि यह गिरावट राहत देने वाली है, फिर भी मई 2026 में अब तक एफआईआई ने ₹30,374 करोड़ की अतिरिक्त बिकवाली की है। इससे 2026 में अब तक कुल एफआईआई बिकवाली ₹2,22,343 करोड़ पर पहुँच गई है, जो 2025 की पूरे साल की बिकवाली ₹1,66,283 करोड़ से कहीं अधिक है।
डीआईआई का ऐतिहासिक समर्थन
एफआईआई की आक्रामक बिकवाली के बावजूद डीआईआई का निवेश वित्त वर्ष 26 में बढ़कर ₹8,43,206 करोड़ हो गया, जो वित्त वर्ष 25 में ₹5,71,959 करोड़ था। यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय म्यूचुअल फंड, बीमा कंपनियाँ और अन्य घरेलू संस्थाएँ विदेशी पूँजी के पलायन की भरपाई करने में सक्षम हो रही हैं। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब डीआईआई ने बाजार को संभाला हो, लेकिन इस बार का पैमाना अभूतपूर्व है।
एफआईआई की बिकवाली के पीछे की वजहें
विश्लेषकों के अनुसार, भारत में एफआईआई की लगातार बिकवाली के पीछे तीन प्रमुख कारण हैं — भारतीय कंपनियों की कमजोर आय वृद्धि, अन्य उभरते बाजारों में बेहतर रिटर्न, और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में सुधार। इसके अलावा, जेफरीज की एक पूर्व रिपोर्ट में कहा गया था कि रुपए में हाल की गिरावट चालू खाते के घाटे और कच्चे तेल की कमजोरी से अधिक, घरेलू निवेशकों के मजबूत एसआईपी प्रवाह के कारण है — जिसने विदेशी निवेशकों को बाजार से बाहर निकलने का रास्ता दे दिया।
एफआईआई की वापसी की संभावना
विश्लेषकों का कहना है कि रुपए में स्थिरता और कॉर्पोरेट आय में सुधार होने पर एफआईआई की भारतीय बाजार में पुनः वापसी संभव है। यह ऐसे समय में आया है जब भारतीय अर्थव्यवस्था के बुनियादी संकेतक अपेक्षाकृत मजबूत बने हुए हैं और घरेलू खपत में तेजी का अनुमान है।
आगे क्या
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब आने वाली तिमाही की कॉर्पोरेट आय और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की नीतिगत दिशा पर है। यदि वैश्विक जोखिम कम होते हैं और भारतीय कंपनियों की आय में सुधार आता है, तो एफआईआई का रुख पलट सकता है और बाजार को दोहरा समर्थन मिल सकता है।