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क्या भारत में पिछले वर्ष घरेलू निवेशकों का निवेश रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा?

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क्या भारत में पिछले वर्ष घरेलू निवेशकों का निवेश रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंचा?

सारांश

पिछले वर्ष में, भारत में घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ऐतिहासिक 80 अरब डॉलर का निवेश किया है, जबकि विदेशी निवेशकों ने 40 अरब डॉलर निकाले। यह स्थिति भारतीय शेयर बाजार में महत्वपूर्ण बदलाव की ओर इशारा करती है। जानें, क्या हैं इसके पीछे के कारण और भविष्य के लिए इसका क्या असर हो सकता है।

मुख्य बातें

80 अरब डॉलर का रिकॉर्ड निवेश डीआईआई द्वारा किया गया।
एफपीआई ने 40 अरब डॉलर की निकासी की।
डीआईआई का निवेश 2007 से सबसे बड़ा है।
भारतीय शेयर बाजार में रिटर्न सीमित हुआ है।
2025 में डीआईआई का औसत निवेश 2.2 प्रतिशत तक पहुंचा।

मुंबई, 25 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। उद्योग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 12 महीनों में सेकेंडरी मार्केट में घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) का कुल निवेश रिकॉर्ड 80 अरब डॉलर की ऊंचाई पर पहुंच गया है, जो विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की 40 अरब डॉलर की निकासी से दोगुना है।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट के अनुसार, दलाल स्ट्रीट पर हालिया उतार-चढ़ाव के बावजूद, एफपीआई द्वारा की गई भारी बिकवाली के जवाब में डीआईआई द्वारा की गई प्रति-खरीदारी पिछले उदाहरणों की तुलना में अधिक रही है, जिसमें 2008 का वैश्विक वित्तीय संकट और 2022 की बिकवाली शामिल हैं।

डीआईआई ने इस वर्ष भारतीय शेयर बाजार में 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है, जो 2007 के बाद से पहले सात महीनों में इस श्रेणी द्वारा किया गया सबसे बड़ा निवेश है।

इस मजबूत घरेलू समर्थन के बावजूद, हाल के महीनों में एफपीआई की आक्रामक बिकवाली ने भारतीय शेयर बाजार में रिटर्न को सीमित कर दिया है। पिछले 12 महीनों में सभी बाजार पूंजीकरणों के सूचकांकों ने स्थिर से लेकर नकारात्मक प्रदर्शन किया है।

अप्रैल से जून तक एफपीआई का निवेश 1.2 से 2.3 अरब डॉलर के बीच रहा, जबकि जुलाई में यह रुझान उलट गया और निकासी 2.9 अरब डॉलर तक पहुंच गई, जबकि अगस्त में बिकवाली जारी रही।

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने बताया कि जुलाई 2025 में एफपीआई के पलायन से पहले, वित्त वर्ष 26 की पहली तिमाही में सभी बाजार पूंजीकरणों में विदेशी निवेशक शुद्ध खरीदार थे। डीआईआई और एफआईआई ने शेयर जमा किए, जबकि प्रमोटरों, व्यक्तिगत निवेशकों (स्मॉलकैप को छोड़कर) और प्रत्यक्ष विदेशी निवेशकों ने इक्विटी आपूर्ति प्रदान की।

जुलाई 2025 में, एफपीआई ने भारत से 2.9 अरब डॉलर निकाले। इसके विपरीत, ताइवान ने 18.3 अरब डॉलर, जापान ने 16.1 अरब डॉलर और दक्षिण कोरिया ने 4.5 अरब डॉलर का निवेश आकर्षित किया। अगस्त में, दक्षिण कोरिया के साथ-साथ भारत से भी निकासी हुई। जापान ने 12.5 अरब डॉलर और इंडोनेशिया ने 51.5 करोड़ डॉलर का निवेश आकर्षित किया।

2025 के केवल सात महीनों में डीआईआई ने 2024 के कुल निवेश में 80 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया, जिससे बाजार को आवश्यक समर्थन मिला। 2025 में डीआईआई निवेश सालाना आधार पर औसत निफ्टी बाजार पूंजीकरण के 2.2 प्रतिशत तक पहुंच गया, जो 2007 के बाद से उच्चतम स्तर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती को दर्शाता है। हमें विदेशी निवेशकों की निकासी पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार में स्थिरता लाने के लिए आवश्यक है।
RashtraPress
30 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

डीआईआई और एफपीआई में क्या अंतर है?
डीआईआई घरेलू संस्थागत निवेशक होते हैं, जबकि एफपीआई विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक हैं।
क्या यह निवेश भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक है?
हाँ, डीआईआई का बढ़ता निवेश भारतीय बाजार को स्थिरता और मजबूती प्रदान करता है।
एफपीआई की निकासी का क्या असर होता है?
एफपीआई की निकासी से बाजार में उतार-चढ़ाव आ सकता है, जिससे रिटर्न प्रभावित होता है।
2025 में डीआईआई का निवेश कैसा रहेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि 2025 में डीआईआई का निवेश उच्च स्तर पर बना रहेगा।
क्या भारत में निवेश का माहौल बेहतर हो रहा है?
जी हां, घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भारतीय बाजार के लिए सकारात्मक संकेत है।
राष्ट्र प्रेस
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