रुपया 94.40 पर स्थिर, कोरियाई-ताइवानी बाजारों की उठापटक से भारत में FPI वापसी के संकेत
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय शेयर बाजार की धारणा में उल्लेखनीय सुधार देखा जा रहा है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमतें 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ गई हैं और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की ओर से चुनिंदा खरीदारी लौटने लगी है। विश्लेषकों के अनुसार, रुपए की स्थिरता और दक्षिण कोरिया व ताइवान के बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव ने मिलकर विदेशी निवेशकों का रुख भारत की ओर मोड़ना शुरू किया है।
एफपीआई गतिविधि में बदलाव
15 जून से 25 जून के बीच के नौ ट्रेडिंग सत्रों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने कैश मार्केट में पाँच दिन खरीदारी की। हालाँकि यह खरीदारी सीमित मात्रा में रही, लेकिन इसने यह संकेत दिया कि लगातार चली आ रही भारी बिकवाली का दौर अब समाप्ति की ओर है।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार डॉ. वी.के. विजयकुमार ने कहा, 'एफपीआई की गतिविधियों में यह बदलाव दो प्रमुख कारणों से आया है। पहला, रुपया स्थिर हो गया है और 15 मई को डॉलर के मुकाबले 96.96 के निचले स्तर से मजबूत होकर अब 94.40 के करीब आ गया है। जब रुपया मजबूत हो रहा हो, तो एफपीआई के लिए बिकवाली करना समझदारी नहीं है।'
कोरियाई और ताइवानी बाजारों की भूमिका
विजयकुमार के अनुसार दूसरा बड़ा कारण दक्षिण कोरिया और ताइवान के बाजारों में भारी अस्थिरता है। उन्होंने बताया, 'एक दिन दक्षिण कोरियाई बाजार 8 प्रतिशत गिर गया, जिससे ट्रेडिंग रोकनी पड़ी। भारी मुनाफा कमाने वाले एफपीआई अब दक्षिण कोरिया और ताइवान में बिकवाली कर रहे हैं, जिससे वे भारत में कम रिटर्न के बावजूद पुनः निवेश पर विचार करने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।'
कच्चे तेल और भुगतान संतुलन का असर
कच्चे तेल की कीमतों का 73 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आना भारत के लिए सकारात्मक संकेत है। विश्लेषकों का कहना है कि भारत जिस 'बैलेंस ऑफ पेमेंट्स' दबाव का सामना कर रहा था, वह अब काफी हद तक कम हो गया है। इससे यह कहा जा सकता है कि लगातार एफपीआई बिकवाली का दौर खत्म हो गया है, हालाँकि विदेशी निवेशकों को भारत में स्थायी खरीदार बनने में अभी कुछ समय लग सकता है।
भारत-अमेरिका ट्रेड एग्रीमेंट की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापार समझौते (Trade Agreement) को लेकर बढ़ती उम्मीदों ने भी निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है। रेलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च एसवीपी अजीत मिश्रा ने कहा कि व्यापक घरेलू आर्थिक संकेतों में सुस्ती और वैश्विक मौद्रिक नीति को लेकर बनी अनिश्चितता के बीच निवेश का एक अनुशासित और शेयर-विशिष्ट तरीका अपनाना जरूरी है।
आगे क्या देखें
मिश्रा के अनुसार, वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों का रुझान, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक अस्थिरता और एफआईआई के निवेश का प्रवाह — ये तीनों कारक बाजार की धारणा को आकार देते रहेंगे। भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता की प्रगति पर भी बाजार की नजर बनी रहेगी।