रुपया अंडरवैल्यूड: CEA नागेश्वरन बोले— लंबे निवेशकों के लिए यह सुनहरा मौका

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रुपया अंडरवैल्यूड: CEA नागेश्वरन बोले— लंबे निवेशकों के लिए यह सुनहरा मौका

सारांश

CEA नागेश्वरन ने कहा कि रुपया अंडरवैल्यूड है और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह सुनहरा मौका है। रुपया लगातार पांचवें दिन गिरकर 84.25 प्रति डॉलर पर आया। FPI आउटफ्लो रिकॉर्ड स्तर पर, ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर पार।

Key Takeaways

  • CEA वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रुपया मौलिक रूप से अंडरवैल्यूड है और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह सुनहरा अवसर है।
  • रुपया 24 अप्रैल 2026 को लगातार पांचवें दिन गिरकर 84.25 प्रति डॉलर पर आ गया।
  • ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जिससे रुपए पर दबाव बढ़ रहा है।
  • इस महीने FPI आउटफ्लो पिछले साल के 18.79 अरब डॉलर के रिकॉर्ड को पार कर चुका है।
  • RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने चालू वित्त वर्ष में GDP वृद्धि दर 6.9%25 रहने का अनुमान जताया।
  • 2026 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल 2026: भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) वी. अनंत नागेश्वरन ने गुरुवार को कहा कि भले ही रुपया इस समय वैश्विक दबाव में है, लेकिन यह 'मौलिक रूप से अंडरवैल्यूड' है और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह एक आदर्श प्रवेश बिंदु (एंट्री पॉइंट) है। उन्होंने ब्लूमबर्ग से बातचीत में स्पष्ट किया कि जो निवेशक भारत की विकास गाथा पर भरोसा रखते हैं, उनके लिए मौजूदा स्तर पर निवेश करना फायदेमंद साबित हो सकता है।

रुपए की मौजूदा स्थिति: लगातार पांचवें दिन गिरावट

शुक्रवार, 24 अप्रैल को रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में कमजोर हुआ। शुरुआती कारोबार में यह 24 पैसे की गिरावट के साथ 84.25 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया। 2026 में अब तक रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो चुका है और यह गिरावट पिछले वर्ष से ही जारी है।

इस गिरावट के पीछे कई कारण हैं। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बनी हुई है, जिसकी मुख्य वजह पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव है। इससे ऊर्जा आपूर्ति बाधित हो रही है और वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंता गहरी हो रही है।

विदेशी निवेशकों की निकासी: रिकॉर्ड तोड़ आउटफ्लो

रुपए पर दबाव बढ़ाने में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भूमिका भी बड़ी है। इस महीने भारतीय शेयर बाजार से FPI की निकासी 18.79 अरब डॉलर के पिछले वार्षिक रिकॉर्ड को पार कर चुकी है। यह आंकड़ा बताता है कि वैश्विक अनिश्चितता के बीच विदेशी पूंजी सुरक्षित ठिकानों की तरफ भाग रही है।

विश्लेषकों के अनुसार, भारत की तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता के चलते वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में हर उछाल सीधे रुपए को कमजोर करता है। यह एक संरचनात्मक कमजोरी है जो हर बार वैश्विक संकट के दौरान उभरकर सामने आती है।

CEA और RBI का सकारात्मक रुख

इन चुनौतियों के बावजूद नीति-निर्माता आशावादी बने हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने हाल ही में कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि कुछ स्वतंत्र अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक तनाव को देखते हुए अपने अनुमान थोड़े घटाए हैं।

CEA नागेश्वरन ने अमेरिका-भारत स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप फोरम के एक कार्यक्रम में कहा था कि मौजूदा वैश्विक संघर्ष का असर चार प्रमुख मोर्चों पर पड़ सकता है — ऊर्जा की ऊंची कीमतें, कच्चे माल की आपूर्ति में व्यवधान, लॉजिस्टिक्स और बीमा लागत में बढ़ोतरी, और प्रवासी भेजे जाने वाले धन (रेमिटेंस) में कमी।

ऐतिहासिक संदर्भ और गहरा विश्लेषण

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब भारतीय रुपया इस तरह के दबाव में आया हो। 2013 की 'टेपर टैंट्रम' के दौरान भी रुपया तेजी से गिरा था, लेकिन उसके बाद दीर्घकालिक निवेशकों ने भारी मुनाफा कमाया था। CEA का यही संदेश है — अल्पकालिक उथल-पुथल को दीर्घकालिक अवसर में बदला जा सकता है।

विडंबना यह है कि एक तरफ सरकार 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा देती है, दूसरी तरफ देश अभी भी तेल आयात के लिए डॉलर पर बुरी तरह निर्भर है। जब तक यह निर्भरता कम नहीं होती, हर वैश्विक संकट में रुपए की यही कहानी दोहराई जाती रहेगी।

CEA नागेश्वरन ने धैर्य रखने की अपील की है। आने वाले हफ्तों में RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक और वैश्विक तेल बाजार की दिशा रुपए की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।

Point of View

लेकिन यह आम भारतीय की जेब पर पड़ने वाली मार को नहीं छुपाता — महंगा पेट्रोल, महंगी दालें और बढ़ती महंगाई इसी गिरते रुपए का नतीजा हैं। विडंबना यह है कि सरकार 'आत्मनिर्भर भारत' का नारा देती है, लेकिन तेल आयात पर निर्भरता इतनी गहरी है कि हर वैश्विक झटके में रुपया सबसे पहले घुटने टेकता है। दीर्घकालिक निवेशकों को अवसर दिखाना सही है, पर नीति-निर्माताओं को यह भी बताना होगा कि इस संरचनात्मक कमजोरी को दूर करने की ठोस योजना क्या है।
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

CEA नागेश्वरन ने रुपए के बारे में क्या कहा?
मुख्य आर्थिक सलाहकार वी. अनंत नागेश्वरन ने कहा कि रुपया मौलिक रूप से अंडरवैल्यूड है और दीर्घकालिक निवेशकों के लिए यह एक आदर्श एंट्री पॉइंट है। उन्होंने ब्लूमबर्ग से बातचीत में यह बात कही।
रुपया क्यों गिर रहा है?
रुपए की गिरावट के पीछे मुख्य कारण हैं — ब्रेंट क्रूड का 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रहना, पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और FPI की रिकॉर्ड निकासी। इस महीने FPI आउटफ्लो 18.79 अरब डॉलर के पिछले वार्षिक रिकॉर्ड को पार कर चुका है।
क्या रुपए में निवेश करना अभी सही है?
CEA के अनुसार, मौजूदा स्तर दीर्घकालिक निवेशकों के लिए उचित है क्योंकि रुपया अंडरवैल्यूड है। हालांकि अल्पकालिक जोखिम बना हुआ है और वैश्विक परिस्थितियां अनिश्चित हैं।
RBI गवर्नर ने भारत की GDP वृद्धि के बारे में क्या कहा?
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि चालू वित्त वर्ष में भारत की GDP वृद्धि दर 6.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। हालांकि कुछ अर्थशास्त्रियों ने वैश्विक तनाव के कारण अपने अनुमान घटाए हैं।
2026 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्रा क्यों बना?
भारत की तेल आयात पर अत्यधिक निर्भरता, FPI की बड़े पैमाने पर निकासी और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितता के कारण 2026 में रुपया एशिया की सबसे कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया है। यह गिरावट 2025 से ही जारी है।
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