ऑपरेशन लोटस से AAP को झटका: राघव चड्ढा समेत कई सांसद भाजपा में, केजरीवाल बोले — पंजाबियों के साथ धोखा
सारांश
मुख्य बातें
नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत कई सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस सियासी उथल-पुथल पर AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ धक्का किया है।
केजरीवाल का भाजपा पर सीधा हमला
अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।" यह बयान उन्होंने उस वक्त दिया जब उनकी पार्टी के एक दर्जन से अधिक सांसद भाजपा के साथ जाते दिखे। केजरीवाल का यह बयान सीधे तौर पर पंजाब की राजनीति और वहां की जनता की भावनाओं को संबोधित करता है, जहां AAP की सरकार सत्ता में है।
संजय सिंह का 'ऑपरेशन लोटस' पर पलटवार
AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने X पर लिखा, "भाजपा और अमित शाह ने 'ऑपरेशन लोटस' चलाकर सांसदों को तोड़कर पंजाब के साथ गद्दारी की है।" उन्होंने आगे कहा कि इन सातों सांसदों को AAP और पंजाब की जनता ने प्यार और आशीर्वाद दिया था, और अब यही जनता उनकी गद्दारी की सजा भी देगी। संजय सिंह का यह बयान भाजपा पर सीधा राजनीतिक आरोप है।
अनुराग ढांडा ने महापुरुषों से की तुलना
AAP नेता अनुराग ढांडा ने इस मुद्दे पर गहरी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से होती है। उन्होंने कहा, "झुकने और समझौता करने का विकल्प महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और अरविंद केजरीवाल के पास भी था — लेकिन इन सभी महापुरुषों ने लड़ना मंजूर किया।" उनका इशारा साफ था कि भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों ने संघर्ष की जगह समझौते का रास्ता चुना।
ढांडा ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) का डर दिखाकर AAP के सांसदों को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में AAP सरकार शानदार काम कर रही है और इसी से घबराकर भाजपा ने 'ऑपरेशन लोटस' चलाया।
राघव चड्ढा का पक्ष — दो-तिहाई सांसद साथ
इससे पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से अधिक सांसद इस कदम में उनके साथ हैं। चड्ढा ने बताया कि सभी जरूरी दस्तावेज — हस्ताक्षरित पत्र और औपचारिक कागजात — राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए गए हैं।
राजनीतिक विश्लेषण — पंजाब की सत्ता पर क्या असर?
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सत्ता संभाले तीन साल से अधिक हो चुके हैं। राज्यसभा में AAP की ताकत में यह सेंध पार्टी की राष्ट्रीय साख को प्रभावित कर सकती है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन लोटस' के आरोप पहले भी मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लगते रहे हैं, जहां विपक्षी विधायकों के दलबदल के आरोप सामने आए थे।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज्यसभा में AAP की संख्या घटती है तो पार्टी की संसदीय प्रभावशीलता कमजोर होगी, जो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में राज्यसभा सभापति के फैसले और दलबदल विरोधी कानून के तहत संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।