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ऑपरेशन लोटस से AAP को झटका: राघव चड्ढा समेत कई सांसद भाजपा में, केजरीवाल बोले — पंजाबियों के साथ धोखा

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ऑपरेशन लोटस से AAP को झटका: राघव चड्ढा समेत कई सांसद भाजपा में, केजरीवाल बोले — पंजाबियों के साथ धोखा

सारांश

24 अप्रैल को AAP को बड़ा झटका — राघव चड्ढा, संदीप पाठक समेत कई राज्यसभा सांसदों ने भाजपा का दामन थामा। केजरीवाल ने 'पंजाबियों से धक्का' बताया। संजय सिंह ने 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप लगाया। पंजाब की राजनीति में बड़ा सियासी भूचाल।

मुख्य बातें

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने 24 अप्रैल 2025 को संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत कई सांसदों के साथ AAP छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
अरविंद केजरीवाल ने इसे 'पंजाबियों के साथ धक्का' बताते हुए भाजपा पर सीधा हमला बोला।
AAP सांसद संजय सिंह ने 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप लगाया और कहा कि ED-CBI के डर से सांसदों को तोड़ा गया।
राघव चड्ढा का दावा है कि राज्यसभा में AAP के 10 में से दो-तिहाई से अधिक सांसद उनके साथ हैं।
सभी हस्ताक्षरित दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंपे जा चुके हैं, दलबदल विरोधी कानून के तहत कार्रवाई पर नजरें टिकी हैं।
यह घटना 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन सकती है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस वक्त बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत कई सांसदों के साथ पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस सियासी उथल-पुथल पर AAP के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भाजपा ने एक बार फिर पंजाबियों के साथ धक्का किया है।

केजरीवाल का भाजपा पर सीधा हमला

अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए लिखा, "बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।" यह बयान उन्होंने उस वक्त दिया जब उनकी पार्टी के एक दर्जन से अधिक सांसद भाजपा के साथ जाते दिखे। केजरीवाल का यह बयान सीधे तौर पर पंजाब की राजनीति और वहां की जनता की भावनाओं को संबोधित करता है, जहां AAP की सरकार सत्ता में है।

संजय सिंह का 'ऑपरेशन लोटस' पर पलटवार

AAP के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने X पर लिखा, "भाजपा और अमित शाह ने 'ऑपरेशन लोटस' चलाकर सांसदों को तोड़कर पंजाब के साथ गद्दारी की है।" उन्होंने आगे कहा कि इन सातों सांसदों को AAP और पंजाब की जनता ने प्यार और आशीर्वाद दिया था, और अब यही जनता उनकी गद्दारी की सजा भी देगी। संजय सिंह का यह बयान भाजपा पर सीधा राजनीतिक आरोप है।

अनुराग ढांडा ने महापुरुषों से की तुलना

AAP नेता अनुराग ढांडा ने इस मुद्दे पर गहरी टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति की पहचान उसके चरित्र से होती है। उन्होंने कहा, "झुकने और समझौता करने का विकल्प महात्मा गांधी, सुभाष चंद्र बोस, भगत सिंह और अरविंद केजरीवाल के पास भी था — लेकिन इन सभी महापुरुषों ने लड़ना मंजूर किया।" उनका इशारा साफ था कि भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों ने संघर्ष की जगह समझौते का रास्ता चुना।

ढांडा ने यह भी आरोप लगाया कि ईडी (ED) और सीबीआई (CBI) का डर दिखाकर AAP के सांसदों को तोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब में AAP सरकार शानदार काम कर रही है और इसी से घबराकर भाजपा ने 'ऑपरेशन लोटस' चलाया।

राघव चड्ढा का पक्ष — दो-तिहाई सांसद साथ

इससे पहले राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से अधिक सांसद इस कदम में उनके साथ हैं। चड्ढा ने बताया कि सभी जरूरी दस्तावेज — हस्ताक्षरित पत्र और औपचारिक कागजात — राज्यसभा के सभापति को सौंप दिए गए हैं।

राजनीतिक विश्लेषण — पंजाब की सत्ता पर क्या असर?

यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब पंजाब में AAP सरकार के मुख्यमंत्री भगवंत मान के नेतृत्व में सत्ता संभाले तीन साल से अधिक हो चुके हैं। राज्यसभा में AAP की ताकत में यह सेंध पार्टी की राष्ट्रीय साख को प्रभावित कर सकती है। उल्लेखनीय है कि 'ऑपरेशन लोटस' के आरोप पहले भी मध्य प्रदेश, कर्नाटक और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में लगते रहे हैं, जहां विपक्षी विधायकों के दलबदल के आरोप सामने आए थे।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि राज्यसभा में AAP की संख्या घटती है तो पार्टी की संसदीय प्रभावशीलता कमजोर होगी, जो 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकती है। आने वाले दिनों में राज्यसभा सभापति के फैसले और दलबदल विरोधी कानून के तहत संभावित कार्रवाई पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह उस राजनीतिक मॉडल की परीक्षा है जिसे केजरीवाल ने 'ईमानदार राजनीति' के रूप में बेचा था। विडंबना यह है कि जो पार्टी ED-CBI के दुरुपयोग का आरोप लगाती है, उसके अपने सांसद उसी 'डर' का हवाला देकर जा रहे हैं — यह AAP की आंतरिक कमजोरी को उजागर करता है। 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप नया नहीं है, लेकिन जब यह राज्यसभा में लागू हो तो 2027 के पंजाब चुनाव की जमीन हिलने लगती है। असली सवाल यह है कि क्या पंजाब की जनता इसे विश्वासघात मानेगी या सत्ता की स्वाभाविक राजनीति?
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने आरोप लगाया कि AAP अपने मूल सिद्धांतों से पूरी तरह भटक गई है। उन्होंने संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत कई सांसदों के साथ 24 अप्रैल को भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
केजरीवाल ने AAP सांसदों के भाजपा में जाने पर क्या कहा?
अरविंद केजरीवाल ने X पर लिखा कि 'बीजेपी ने फिर से पंजाबियों के साथ किया धक्का।' उन्होंने इसे पंजाब की जनता के साथ विश्वासघात बताया।
'ऑपरेशन लोटस' क्या है?
'ऑपरेशन लोटस' वह राजनीतिक शब्द है जिसका इस्तेमाल विपक्षी दल भाजपा पर सत्ता और जांच एजेंसियों के दबाव से विधायकों/सांसदों को तोड़ने के आरोप में करते हैं। AAP ने इसी आरोप के तहत राघव चड्ढा के दलबदल को ED-CBI के डर का नतीजा बताया।
AAP के राज्यसभा में कितने सांसद हैं और कितने भाजपा में गए?
राघव चड्ढा के अनुसार राज्यसभा में AAP के कुल 10 सांसद हैं और दो-तिहाई से अधिक यानी 7 सांसद उनके साथ भाजपा में शामिल हुए। सभी औपचारिक दस्तावेज राज्यसभा सभापति को सौंपे जा चुके हैं।
पंजाब की राजनीति पर इस दलबदल का क्या असर होगा?
राज्यसभा में AAP की ताकत घटने से पार्टी की संसदीय प्रभावशीलता कमजोर होगी। 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले यह घटनाक्रम AAP के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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