राघव चड्ढा का AAP छोड़ भाजपा में शामिल होने का ऐलान, भाजपा ने किया स्वागत, विपक्ष ने उठाए सवाल

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राघव चड्ढा का AAP छोड़ भाजपा में शामिल होने का ऐलान, भाजपा ने किया स्वागत, विपक्ष ने उठाए सवाल

सारांश

राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत 7 AAP सांसदों ने पार्टी छोड़कर भाजपा का दामन थामा। भाजपा ने स्वागत किया तो शिअद ने केजरीवाल का इस्तीफा मांगा। तेजस्वी ने डर-लालच का आरोप लगाया। पंजाब 2027 चुनाव से पहले यह घटनाक्रम AAP के लिए बड़ा राजनीतिक संकट बन गया है।

Key Takeaways

  • राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल समेत 7 राज्यसभा सांसदों ने 24 अप्रैल 2025 को AAP छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की।
  • भाजपा नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने इंस्टाग्राम वीडियो के जरिए तीनों नेताओं का औपचारिक स्वागत किया।
  • दिल्ली के मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे साहसिक फैसला बताया और कहा यह पंजाब की जनता के हित में है।
  • शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने अरविंद केजरीवाल और भगवंत मान दोनों से इस्तीफे की मांग की।
  • तेजस्वी यादव ने इसे भाजपा की 'डर या लालच' की रणनीति का हिस्सा बताया।
  • यह घटनाक्रम पंजाब 2027 विधानसभा चुनाव से पहले AAP के लिए गंभीर संगठनात्मक संकट का संकेत है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। आम आदमी पार्टी (AAP) को शुक्रवार को उस समय बड़ा राजनीतिक झटका लगा जब राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संदीप पाठक और अशोक मित्तल सहित कुल सात सांसदों के साथ पार्टी से नाता तोड़कर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा की। इस घोषणा के बाद देशभर में सियासी प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया है। भाजपा ने इसे सुशासन की जीत बताया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे आप के भीतर गहराते संगठनात्मक संकट का प्रमाण करार दिया।

भाजपा नेताओं ने किया खुले दिल से स्वागत

भाजपा नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो संदेश जारी करते हुए तीनों नेताओं के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि जो नेता समाज सेवा की सच्ची भावना रखता है, वह अंततः उस विचारधारा से जुड़ता है जो समग्र विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 'सबका साथ, सबका विकास' का मार्ग ऐसे नेताओं को व्यापक जनहित के लिए प्रेरित करता रहा है।

दिल्ली सरकार के मंत्री कपिल मिश्रा ने सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि जिस व्यक्ति की अंतरात्मा जीवित है, वह केजरीवाल के खेमे में अधिक समय तक नहीं टिक सकता। उन्होंने राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के इस फैसले को साहसिक और स्वागत योग्य बताते हुए कहा कि यह कदम पंजाब की जनता को राजनीतिक लूट से बचाने में निर्णायक भूमिका निभाएगा।

शिरोमणि अकाली दल ने केजरीवाल से मांगा इस्तीफा

शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के वरिष्ठ नेता दलजीत सिंह चीमा ने इस घटनाक्रम पर गहरी चिंता जताई। उन्होंने एक्स (X) पर लिखा कि सात राज्यसभा सांसदों — जिनमें छह पंजाब से और एक दिल्ली से हैं — का एक साथ पार्टी छोड़ना आप की राजनीतिक संरचना और नेतृत्व के भीतर गहरे संकट को उजागर करता है।

चीमा ने कहा कि यह कोई अकेली या आकस्मिक घटना नहीं है, बल्कि यह आंतरिक लोकतंत्र, विश्वास और वैचारिक एकता की व्यापक विफलता को दर्शाता है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल से पार्टी प्रमुख पद से नैतिक आधार पर इस्तीफे की मांग की और कहा कि केंद्रीकृत निर्णय प्रणाली के सूत्रधार होने के नाते उन्हें इस संकट की जिम्मेदारी लेनी चाहिए।

चीमा ने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि जब किसी पार्टी के अपने ही सांसद इतनी बड़ी संख्या में पाला बदलें, तो यह नेतृत्व और जनता के बीच पूर्ण रूप से टूट चुके संवाद का प्रमाण है। उन्होंने कहा कि पंजाब को राजनीतिक प्रयोगशाला नहीं बनाया जा सकता और राज्य की जनता स्थिरता एवं जवाबदेही पर आधारित नेतृत्व की हकदार है।

तेजस्वी यादव बोले — डर या लालच दोनों में से एक

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता और बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस मामले पर अपनी बात संक्षेप में कही। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास केवल दो ही तरीके हैं — या तो वह किसी को डरा कर अपने साथ लाती है या फिर लालच देकर। उन्होंने इशारा किया कि इस मामले में भी इन्हीं में से कोई एक कारण जरूर रहा होगा।

गहरा राजनीतिक संदर्भ: आप का संकट नया नहीं

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी पिछले कुछ वर्षों से लगातार आंतरिक असंतोष और नेतृत्व संकट से जूझ रही है। 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी को दिल्ली में करारी हार का सामना करना पड़ा था और फरवरी 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में भी पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। इसी पृष्ठभूमि में यह सामूहिक पलायन पार्टी की कमजोर होती पकड़ को और उजागर करता है।

विश्लेषकों के अनुसार, पंजाब में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले इतने बड़े पैमाने पर सांसदों का पार्टी छोड़ना भगवंत मान सरकार के लिए एक गंभीर राजनीतिक चेतावनी है। यह घटनाक्रम यह भी संकेत देता है कि आप के भीतर केंद्रीकृत नेतृत्व मॉडल को लेकर नेताओं में असंतोष काफी गहरा है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संकट से निपटने के लिए क्या रणनीति अपनाते हैं और क्या अन्य सांसद व नेता भी पार्टी छोड़ने का मन बना रहे हैं।

Point of View

बल्कि यह उस केंद्रीकृत तानाशाही मॉडल की परिणति है जिसे केजरीवाल ने वर्षों से पोषित किया। विडंबना यह है कि जो पार्टी 'आम आदमी' की आवाज बनने का दावा करती थी, उसके अपने सांसद ही अब आवाज उठाने के लिए पार्टी छोड़ रहे हैं। पंजाब में 2027 चुनाव नजदीक हैं और ऐसे में यह सामूहिक पलायन भगवंत मान सरकार की विश्वसनीयता पर सीधा प्रहार है। मुख्यधारा की मीडिया इसे 'दलबदल' तक सीमित कर रही है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या AAP का संगठनात्मक ढांचा अब भी उसे एक राष्ट्रीय विकल्प बनाए रखने में सक्षम है?
NationPress
25/04/2026

Frequently Asked Questions

राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने आम आदमी पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की है। हालांकि उन्होंने विस्तृत कारण नहीं बताए, लेकिन विश्लेषक इसे पार्टी के केंद्रीकृत नेतृत्व और आंतरिक असंतोष से जोड़ रहे हैं।
AAP के कितने सांसदों ने पार्टी छोड़ी?
कुल सात राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़ी, जिनमें छह पंजाब से और एक दिल्ली से हैं। इनमें राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल प्रमुख नाम हैं।
भाजपा ने राघव चड्ढा के AAP छोड़ने पर क्या कहा?
भाजपा नेता फतेह जंग सिंह बाजवा ने इंस्टाग्राम वीडियो जारी कर तीनों नेताओं का स्वागत किया। मंत्री कपिल मिश्रा ने इसे साहसिक फैसला बताते हुए कहा कि यह पंजाब को केजरीवाल की लूट से बचाएगा।
शिरोमणि अकाली दल ने इस मामले में क्या मांग की?
शिअद नेता दलजीत सिंह चीमा ने अरविंद केजरीवाल से पार्टी प्रमुख पद से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने भगवंत मान पर भी पंजाब पर शासन का नैतिक अधिकार खोने का आरोप लगाया।
तेजस्वी यादव ने राघव चड्ढा के भाजपा में जाने पर क्या कहा?
राजद नेता तेजस्वी यादव ने कहा कि भाजपा के पास केवल दो रास्ते हैं — डर या लालच। उन्होंने इशारा किया कि इस मामले में भी इन्हीं में से कोई एक कारण जरूर रहा होगा।
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