बड़ा फैसला: पश्चिम बंगाल दूसरे चरण के चुनाव के लिए 11 अतिरिक्त पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त, कुल संख्या 95 हुई
सारांश
Key Takeaways
- चुनाव आयोग ने 29 अप्रैल के दूसरे चरण मतदान से पहले 11 अतिरिक्त पुलिस पर्यवेक्षक नियुक्त किए।
- इस नियुक्ति के बाद पश्चिम बंगाल में कुल पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या 84 से बढ़कर 95 हो गई।
- सभी 11 नए पर्यवेक्षक अन्य राज्यों से विशेष रूप से बुलाए गए हैं।
- डायमंड हार्बर पुलिस जिले के 5 अधिकारी ड्यूटी में लापरवाही के आरोप में तत्काल निलंबित किए गए।
- निलंबित अधिकारियों में आईपीएस अधिकारी संदीप गराई भी शामिल हैं।
- एसपी ईशानी पाल को अधीनस्थों की निगरानी में चूक पर कड़ी चेतावनी जारी की गई।
कोलकाता, 25 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के विधानसभा चुनाव से पहले भारत निर्वाचन आयोग ने सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए 11 अतिरिक्त पुलिस पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का ऐलान किया है। इस कदम के बाद राज्य में तैनात कुल पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या बढ़कर 95 हो गई है। आयोग का यह निर्णय पहले चरण के मतदान में सामने आई छिटपुट हिंसा की घटनाओं के मद्देनजर लिया गया है।
अन्य राज्यों से बुलाए गए पर्यवेक्षक
राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, नियुक्त किए गए सभी 11 अतिरिक्त पुलिस पर्यवेक्षक दूसरे राज्यों से विशेष रूप से बुलाए गए हैं। इनका मुख्य दायित्व मतदान के दिन और उससे पहले संवेदनशील क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करना होगा।
इससे पहले दूसरे चरण के लिए 84 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए गए थे, जो पिछले विधानसभा चुनावों की तुलना में पहले से ही अधिक थे। अब इन 11 नए पर्यवेक्षकों की तैनाती के बाद यह संख्या 95 तक पहुंच गई है, जो बंगाल के चुनावी इतिहास में एक उल्लेखनीय आंकड़ा है।
पहले चरण की हिंसा से सबक
23 अप्रैल को संपन्न हुए पहले चरण के मतदान के दौरान कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद राज्य के कुछ हिस्सों में छिटपुट हिंसा और तनाव की खबरें आई थीं। इन घटनाओं ने आयोग को सतर्क कर दिया और दूसरे चरण के लिए अतिरिक्त इंतजाम करने पर मजबूर किया।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल में चुनावी हिंसा कोई नई बात नहीं है। वर्षों से राज्य में मतदान के दौरान बूथ कैप्चरिंग, धमकी और झड़पों की शिकायतें आती रही हैं। इसीलिए आयोग ने इस बार पहले से ही अभूतपूर्व सुरक्षा बल तैनात करने का निर्णय लिया था।
सूत्रों के अनुसार, संवेदनशील इलाकों की पहचान कर ली गई है और वहां अतिरिक्त निगरानी के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। सभी नए पुलिस पर्यवेक्षकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस को सौंपी गई है।
पांच पुलिस अधिकारी तत्काल निलंबित
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए दक्षिण 24 परगना जिले के डायमंड हार्बर पुलिस जिले के पांच पुलिस अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन सभी पर ड्यूटी में गंभीर लापरवाही के आरोप हैं और इनके विरुद्ध विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
निलंबित अधिकारियों में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संदीप गराई (आईपीएस), सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी साजल मंडल, डायमंड हार्बर थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज मौसाम चक्रवर्ती, फलता थाने के इंस्पेक्टर-इन-चार्ज अजय बाग और उस्ती थाने की अधिकारी-इन-चार्ज साधना बाग शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, डायमंड हार्बर पुलिस जिले की पुलिस अधीक्षक ईशानी पाल को भी कड़ी चेतावनी जारी की गई है। उन पर अपने अधीनस्थ अधिकारियों की समुचित निगरानी न करने का आरोप लगाया गया है।
आयोग की कार्रवाई का व्यापक संदर्भ
यह कार्रवाई ऐसे समय में आई है जब चुनाव आयोग पर विपक्षी दलों की ओर से बंगाल में निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने का दबाव लगातार बना हुआ है। उल्लेखनीय है कि 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद भी राज्य में व्यापक हिंसा की खबरें आई थीं, जिसे लेकर सुप्रीम कोर्ट तक मामला पहुंचा था।
आलोचकों का कहना है कि पुलिस अधिकारियों का निलंबन और अतिरिक्त पर्यवेक्षकों की तैनाती यह संकेत देती है कि जमीनी स्तर पर सुरक्षा तंत्र अभी भी पूरी तरह चुनाव आयोग के निर्देशों के अनुरूप काम नहीं कर रहा। दूसरी ओर, आयोग का यह सक्रिय रवैया मतदाताओं में विश्वास जगाने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के नतीजे और चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सभी की नजरें टिकी हैं। आयोग के इस कदम से यह स्पष्ट है कि वह किसी भी चूक को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।