AAP में बड़ी टूट: राघव चड्डा समेत 3 राज्यसभा सांसदों ने दिया इस्तीफा, भाजपा में हुए शामिल

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AAP में बड़ी टूट: राघव चड्डा समेत 3 राज्यसभा सांसदों ने दिया इस्तीफा, भाजपा में हुए शामिल

सारांश

AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन की। भाजपा ने इसे AAP के आंतरिक विघटन का संकेत बताया और केजरीवाल को आत्मचिंतन की नसीहत दी। दिल्ली चुनाव हार के बाद पार्टी के लिए यह एक और बड़ा झटका है।

Key Takeaways

  • राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल — AAP के तीन राज्यसभा सांसदों ने 25 अप्रैल 2025 को इस्तीफा देकर भाजपा जॉइन की।
  • भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद पार्टी से दूर हो रहे हैं।
  • अनुराग ठाकुर ने कहा कि भ्रष्टाचार विरोध के नाम पर आए नेता ही अब पार्टी से निराश होकर जा रहे हैं।
  • तीक्ष्ण सूद ने कहा कि AAP अपने मूल अन्ना आंदोलन के सिद्धांतों से भटक चुकी है।
  • 2025 दिल्ली विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद यह इस्तीफे AAP के लिए दूसरा बड़ा संगठनात्मक झटका हैं।
  • पंजाब में AAP सरकार पर इस राष्ट्रीय संकट के दीर्घकालिक प्रभाव की आशंका जताई जा रही है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैल: आम आदमी पार्टी (AAP) में बड़ी सियासी उथल-पुथल मच गई है। शुक्रवार, 25 अप्रैल 2025 को पार्टी के तीन वरिष्ठ राज्यसभा सांसदों — राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल — ने अपनी सदस्यता से इस्तीफा देकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने की घोषणा कर दी। इस घटनाक्रम ने दिल्ली और राष्ट्रीय राजनीति में भूचाल ला दिया है और भाजपा नेताओं ने इसे AAP के आंतरिक विघटन का प्रमाण बताया है।

मुख्य घटनाक्रम: किसने क्या किया?

राघव चड्डा, जो AAP के सबसे चर्चित और मुखर चेहरों में से एक रहे हैं, संदीप पाठक, जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव और संगठन के मजबूत स्तंभ माने जाते थे, तथा अशोक मित्तल ने एक साथ इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थामा। यह तीनों नेता AAP के राज्यसभा में प्रमुख प्रतिनिधि थे और पार्टी के नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते थे।

गौरतलब है कि राज्यसभा में AAP के कुल सांसदों की संख्या को देखते हुए यह इस्तीफे पार्टी की संसदीय ताकत को सीधे कमजोर करते हैं। भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने दावा किया कि राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद पार्टी से दूरी बना रहे हैं — यदि यह सच है, तो यह AAP के लिए एक अभूतपूर्व संकट है।

भाजपा की प्रतिक्रिया: आत्मचिंतन की नसीहत

भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने मीडिया से बातचीत में कहा कि AAP की कथित महिला-विरोधी नीतियां, वैचारिक दिवालियापन और जनता के साथ बार-बार विश्वासघात ही पार्टी के पतन के मुख्य कारण हैं। उन्होंने कहा कि यह समय अरविंद केजरीवाल और सौरभ भारद्वाज के लिए गहरे आत्ममंथन का है।

भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने कहा कि जो नेता कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजनीति में आए थे, वही आज पार्टी से निराश होकर बाहर निकल रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कानून के दायरे में जो गलत है वह जवाबदेह होगा, और भाजपा न्याय व्यवस्था पर पूरा भरोसा रखती है।

भाजपा के वरिष्ठ नेता तीक्ष्ण सूद ने कहा कि AAP जिस अन्ना आंदोलन की कोख से जन्मी थी, आज उसी के सिद्धांतों से भटक चुकी है। भाजपा विधायक अनिल गोयल ने इन इस्तीफों को पार्टी की गिरती साख का जीवंत प्रमाण बताया।

ऐतिहासिक संदर्भ: AAP का सफर और संकट

2012 में अन्ना हजारे के भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन से उपजी AAP ने 2015 और 2020 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और 2025 की दिल्ली विधानसभा में भी पार्टी को करारी हार का सामना करना पड़ा। इस पृष्ठभूमि में राज्यसभा सांसदों का इस्तीफा पार्टी के लिए एक और झटका है।

यह भी उल्लेखनीय है कि अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य वरिष्ठ नेताओं के कानूनी मामलों में घिरने के बाद से पार्टी की छवि को लगातार नुकसान पहुंचा है। संदीप पाठक जैसे संगठनात्मक रूप से महत्वपूर्ण नेता का जाना पार्टी की जमीनी ताकत को भी प्रभावित कर सकता है।

राजनीतिक विश्लेषण: किसे फायदा, किसे नुकसान?

भाजपा के लिए यह घटनाक्रम 2025 और 2026 के राज्य चुनावों से पहले एक बड़ा मनोवैज्ञानिक लाभ है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास नीतियों को इन नेताओं के शामिल होने से वैधता का नया आयाम मिलेगा। दूसरी ओर, AAP के लिए यह संकट केवल सांसदों की संख्या का नहीं, बल्कि वैचारिक विश्वसनीयता का भी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AAP नेतृत्व ने तत्काल संगठनात्मक सुधार नहीं किए, तो आने वाले महीनों में और भी नेता पार्टी छोड़ सकते हैं। पंजाब में AAP की सरकार पर भी इस राजनीतिक संकट का दीर्घकालिक असर देखने को मिल सकता है।

आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि अरविंद केजरीवाल इस संकट पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं और पार्टी अपने बचे हुए राज्यसभा सांसदों को एकजुट रखने में कितनी सफल होती है।

Point of View

बल्कि उस पार्टी के वैचारिक खोखलेपन का सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है जो 'ईमानदार राजनीति' के नारे पर खड़ी हुई थी। विडंबना यह है कि संदीप पाठक जैसे संगठन के सूत्रधार का जाना बताता है कि समस्या ऊपर से नहीं, भीतर से है। दिल्ली चुनाव में करारी हार, वरिष्ठ नेताओं पर कानूनी शिकंजा और अब राज्यसभा में टूट — यह एक पैटर्न है, न कि इत्तेफाक। मुख्यधारा की मीडिया जहां इसे भाजपा की जीत के रूप में देख रही है, वहीं असली सवाल यह है कि क्या AAP अपनी मूल पहचान बचाने में सक्षम रह पाएगी?
NationPress
24/04/2026

Frequently Asked Questions

AAP के कौन से राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दिया और भाजपा में शामिल हुए?
AAP के राज्यसभा सांसद राघव चड्डा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने 25 अप्रैल 2025 को इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने की घोषणा की। ये तीनों पार्टी के वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरे रहे हैं।
भाजपा ने AAP सांसदों के इस्तीफे पर क्या कहा?
बांसुरी स्वराज, अनुराग ठाकुर और तीक्ष्ण सूद जैसे भाजपा नेताओं ने AAP को आत्मचिंतन की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि पार्टी का वैचारिक दिवालियापन और भ्रष्टाचार के आरोप ही इस पतन की वजह हैं।
क्या AAP पार्टी अंदर से कमजोर हो रही है?
बांसुरी स्वराज के अनुसार राज्यसभा में AAP के दो-तिहाई सांसद पार्टी से दूरी बना रहे हैं। 2025 के दिल्ली चुनाव में हार और वरिष्ठ नेताओं पर कानूनी मामलों के बाद यह इस्तीफे पार्टी के आंतरिक संकट को उजागर करते हैं।
संदीप पाठक AAP में क्या भूमिका निभाते थे?
संदीप पाठक AAP के राष्ट्रीय महासचिव और पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के प्रमुख स्तंभ थे। उनका पार्टी छोड़ना संगठन की जड़ों को कमजोर करने वाला कदम माना जा रहा है।
AAP के इस संकट का पंजाब सरकार पर क्या असर होगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि राष्ट्रीय स्तर पर AAP की कमजोर होती स्थिति का दीर्घकालिक असर पंजाब में AAP सरकार की साख पर भी पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल पंजाब में पार्टी की सरकार स्थिर बनी हुई है।
Nation Press