मानव भारती फर्जी डिग्री घोटाला: भगोड़े मनदीप राणा की 2 संपत्तियां जब्त करने को कोर्ट की हरी झंडी
सारांश
Key Takeaways
- 23 अप्रैल 2025 को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने ईडी को भगोड़े मनदीप राणा की दो संपत्तियां जब्त करने की अनुमति दी।
- मानव भारती यूनिवर्सिटी घोटाले की कुल अपराध राशि 387 करोड़ रुपये आंकी गई है।
- ईडी ने अब तक इस मामले में 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं।
- मुख्य आरोपी राज कुमार राणा, उनकी पत्नी अश्वनी कंवर और बेटे मनदीप राणा ने मिलकर यह रैकेट चलाया।
- मनदीप राणा को 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया गया है और वह बार-बार समन के बावजूद जांच से भाग रहा है।
- इस घोटाले की जांच सोलन जिले के धरमपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज तीन एफआईआर के आधार पर शुरू हुई थी।
शिमला, 24 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिमाचल प्रदेश के सोलन स्थित मानव भारती यूनिवर्सिटी से जुड़े 387 करोड़ रुपये के बहुचर्चित फर्जी डिग्री घोटाले में स्पेशल पीएमएलए कोर्ट ने 23 अप्रैल 2025 को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को भगोड़े आरोपी मनदीप राणा की दो संपत्तियां जब्त करने की अनुमति दे दी। मनदीप राणा को पहले ही 'भगोड़ा आर्थिक अपराधी' घोषित किया जा चुका है और वह लंबे समय से कानून की पकड़ से बाहर है।
क्या है पूरा मामला?
ईडी के शिमला सब-जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत यह जांच शुरू की थी। जांच का आधार सोलन जिले के धरमपुर पुलिस स्टेशन में आईपीसी, 1860 की विभिन्न धाराओं के तहत दर्ज तीन एफआईआर थीं, जो मानव भारती यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध संस्थाओं के खिलाफ दर्ज की गई थीं।
ईडी की जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी राज कुमार राणा ने अपनी पत्नी अश्वनी कंवर और बेटे मनदीप राणा के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक षड्यंत्र रचा। इस गिरोह ने एजेंटों और बिचौलियों के नेटवर्क के जरिए मानव भारती यूनिवर्सिटी के नाम पर छात्रों से पैसे लेकर फर्जी डिग्रियां जारी कीं।
घोटाले का दायरा और मनी लॉन्ड्रिंग का तरीका
ईडी के अनुसार इस धोखाधड़ी से अर्जित अपराध की कुल रकम लगभग 387 करोड़ रुपये आंकी गई है। यह रकम लेयरिंग की प्रक्रिया से कई चरणों में घुमाई गई और मनी लॉन्ड्रिंग की गई।
इसके बाद इस काली कमाई को कई राज्यों में आरोपियों और उनसे जुड़ी संस्थाओं के नाम पर चल और अचल संपत्तियां खरीदने में लगाया गया। यह घोटाला न केवल वित्तीय अपराध है, बल्कि हजारों युवाओं के करियर और भविष्य के साथ किया गया क्रूर खिलवाड़ भी है।
ईडी की अब तक की कार्रवाई
ईडी ने इस मामले में अब तक लगभग 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त की हैं। पीएमएलए के तहत गठित निर्णायक प्राधिकरण ने इन सभी जब्तियों को वैध ठहराते हुए उनकी पुष्टि कर दी है।
एजेंसी ने बताया कि मनदीप राणा ने न्यायिक प्रक्रिया की जानबूझकर अनदेखी करते हुए अदालत द्वारा जारी सभी समनों को नजरअंदाज किया। बार-बार समन जारी किए जाने और ईडी की व्यापक कोशिशों के बावजूद, उसने भारतीय अदालतों के अधिकार क्षेत्र के सामने आने से साफ इनकार कर दिया।
युवाओं के सपनों से खिलवाड़ — एक गहरा सामाजिक संकट
यह मामला महज एक वित्तीय अपराध नहीं है। गौरतलब है कि जिन छात्रों ने इन फर्जी डिग्रियों के आधार पर नौकरियां हासिल कीं या प्रवेश परीक्षाएं दीं, उनका पूरा करियर दांव पर लग गया। शिक्षा के क्षेत्र में इस स्तर की धोखाधड़ी भारत की उच्च शिक्षा व्यवस्था की निगरानी तंत्र पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है।
यह भी उल्लेखनीय है कि यूजीसी और राज्य सरकारों की जानकारी में होने के बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जी डिग्री वितरण का यह रैकेट वर्षों तक चलता रहा — यह व्यवस्थागत विफलता का प्रमाण है।
आगे क्या होगा?
ईडी की जांच अभी जारी है और मनदीप राणा की गिरफ्तारी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रयास किए जा सकते हैं। 200 करोड़ रुपये की संपत्तियां जब्त होने के बाद शेष 187 करोड़ रुपये की बरामदगी के लिए एजेंसी और अधिक संपत्तियों की पहचान कर सकती है। आने वाले हफ्तों में इस मामले में और गिरफ्तारियां और संपत्ति जब्तियां संभव हैं।