राजस्थान में डेयरी क्रांति: CM भजनलाल ने 'सरस' को 85 लाख लीटर तक पहुंचाने का एक्शन प्लान मांगा
सारांश
Key Takeaways
- मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 24 अप्रैल को RCDF की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए डेयरी क्षेत्र के लिए व्यापक कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
- राजस्थान में दूध खरीद को 45 लाख लीटर से बढ़ाकर 85 लाख लीटर प्रतिदिन करने का दो-चरणीय लक्ष्य तय किया गया है।
- दूध खरीद दर 50 रुपए से बढ़ाकर 52 रुपए प्रति किलोग्राम फैट कर दी गई है।
- 530 करोड़ रुपए के निवेश से नए प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे और मौजूदा इकाइयों का विस्तार होगा।
- खाटू श्यामजी, पुष्कर, अजमेर, नाथद्वारा और सालासर जैसे धार्मिक स्थलों पर 'सरस' आउटलेट खोले जाएंगे।
- अन्य राज्यों में 'सरस' उत्पादों के विपणन के लिए प्रतिष्ठित निजी संस्थानों के साथ टाई-अप की योजना बनाने के निर्देश दिए गए।
जयपुर, 24 अप्रैल। राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शुक्रवार को राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन (RCDF) की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि प्रदेश के अधिक से अधिक पशुपालक किसानों को डेयरी क्षेत्र से जोड़ा जाए और 'सरस' ब्रांड को राष्ट्रीय स्तर पर एक विश्वसनीय पहचान दिलाई जाए। उन्होंने डेयरी क्षेत्र को राजस्थान की ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार करार देते हुए व्यापक कार्ययोजना तैयार करने के आदेश दिए।
दूध खरीद में दोगुनी वृद्धि का लक्ष्य
बैठक में अधिकारियों ने जानकारी दी कि राजस्थान में फिलहाल प्रतिदिन लगभग 45 लाख लीटर दूध की खरीद हो रही है। इसे पहले चरण में 65 लाख लीटर और दूसरे चरण में 85 लाख लीटर प्रतिदिन तक ले जाने की महत्वाकांक्षी योजना बनाई गई है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उन क्षेत्रों में नई डेयरी सहकारी समितियां स्थापित की जा रही हैं जहां अभी तक इनका अभाव था।
पशुपालकों को प्रोत्साहित करने के लिए दूध खरीद दर को 50 रुपए से बढ़ाकर 52 रुपए प्रति किलोग्राम फैट कर दिया गया है। साथ ही लगभग 530 करोड़ रुपए के निवेश से नए दूध प्रसंस्करण संयंत्र लगाए जा रहे हैं और मौजूदा इकाइयों का विस्तार किया जा रहा है।
'सरस' ब्रांड का आधुनिक विस्तार और धार्मिक पर्यटन स्थलों पर आउटलेट
मुख्यमंत्री ने 'सरस स्मार्ट', 'सरस कैफे' और 'सरस सिग्नेचर प्लाजा' जैसे आधुनिक आउटलेट्स के जरिए ब्रांड को विस्तार देने पर जोर दिया। उन्होंने विशेष रूप से खाटू श्यामजी, सालासर, नाथद्वारा, पुष्कर और अजमेर जैसे प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों पर सरस आउटलेट्स स्थापित करने के निर्देश दिए।
यह रणनीतिक कदम महत्वपूर्ण है क्योंकि इन स्थलों पर सालाना करोड़ों श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं, जो 'सरस' उत्पादों के लिए एक बड़ा उपभोक्ता आधार तैयार कर सकते हैं। इसके अलावा सरकारी अस्पतालों, राजस्थान रोडवेज बस स्टैंड और पर्यटन विकास निगम के होटलों में भी सरस आउटलेट्स खोलने की योजना पर चर्चा हुई।
गुणवत्ता नियंत्रण और मिलावट पर सख्त कार्रवाई
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने दूध की खरीद से लेकर अंतिम उत्पाद के वितरण तक पूरी आपूर्ति श्रृंखला में गुणवत्ता निगरानी की मजबूत प्रणाली विकसित करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने मिलावट पर शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाने को कहा ताकि 'सरस' उत्पादों पर उपभोक्ताओं का भरोसा बना रहे।
उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री दूध उत्पादक संबल योजना के तहत डेयरी किसानों को पहले से ही आर्थिक सहायता दी जा रही है। यह योजना उत्पादकों और उपभोक्ताओं दोनों के हितों को संतुलित करने की राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
'विकसित ग्राम' डेटा से नए डेयरी बूथ और राज्यों में विस्तार
मुख्यमंत्री ने 'विकसित ग्राम' और 'विकसित वार्ड' अभियानों के आंकड़ों के आधार पर नए डेयरी बूथ स्थापित करने का निर्देश दिया। यह डेटा-संचालित दृष्टिकोण सुनिश्चित करेगा कि जहां वास्तव में जरूरत है, वहीं संसाधन लगाए जाएं।
इसके अतिरिक्त, अन्य राज्यों में 'सरस' उत्पादों के प्रचार और विपणन के लिए प्रतिष्ठित निजी संस्थानों के साथ टाई-अप करने की योजना बनाने के भी निर्देश दिए गए। राजीविका के माध्यम से कलेक्टरेट जैसे सरकारी कार्यालयों में संचालित सरस स्मार्ट पार्लरों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।
बैठक में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक में पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, अतिरिक्त मुख्य सचिव (मुख्यमंत्री कार्यालय) अखिल अरोड़ा, प्रमुख सचिव (पशुपालन) सीताराम भाले, सहकारिता सचिव डॉ. समीत शर्मा तथा राजस्थान कोऑपरेटिव डेयरी फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सहित अनेक वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
राजस्थान सरकार की यह पहल ऐसे समय में आई है जब देशभर में डेयरी क्षेत्र में निजी कंपनियों का दबदबा बढ़ रहा है। सहकारी मॉडल को मजबूत करने की यह कोशिश ग्रामीण पशुपालकों को बाजार की अनिश्चितताओं से बचाने में अहम भूमिका निभा सकती है। आने वाले महीनों में नए प्रसंस्करण संयंत्रों की स्थापना और दूध खरीद लक्ष्य की प्रगति पर नजर रखना जरूरी होगा।