7 हफ्तों बाद भारत में 106 मिलियन डॉलर का निवेश, बिकवाली का दबाव घटा
सारांश
Key Takeaways
- 106 मिलियन डॉलर का शुद्ध विदेशी निवेश भारत में 7 हफ्तों में पहली बार सकारात्मक रहा — एलारा कैपिटल रिपोर्ट, 25 अप्रैल 2025।
- इससे पहले पिछले 6 हफ्तों में भारत से करीब 5 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी थी।
- अमेरिकी फंड्स ने 3.3 अरब डॉलर की 7 हफ्ते की निकासी के बाद 225 मिलियन डॉलर का निवेश किया।
- ETF ने 220 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जबकि लॉन्ग-ओनली फंड्स में 400 मिलियन डॉलर की निकासी जारी रही।
- साप्ताहिक आउटफ्लो 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर 180 मिलियन डॉलर पर आ गया।
- यूरोप और चीन में 5 हफ्तों से लगातार निकासी जारी है, जो भारत की सापेक्षिक आकर्षण क्षमता को दर्शाता है।
नई दिल्ली, 25 अप्रैल। भारतीय बाजारों में पिछले सात हफ्तों में पहली बार 106 मिलियन डॉलर का शुद्ध विदेशी निवेश (इनफ्लो) दर्ज किया गया है। एलारा कैपिटल की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार यह सकारात्मक बदलाव उस दौर के बाद आया है जब पिछले छह हफ्तों में करीब 5 अरब डॉलर की निकासी हो चुकी थी। यह संकेत देता है कि भारत-केंद्रित फंड्स से बिकवाली का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है।
बिकवाली से पलटा रुख — मुख्य घटनाक्रम
एलारा कैपिटल की रिपोर्ट के मुताबिक साप्ताहिक आउटफ्लो पहले के 1.2 अरब डॉलर के उच्च स्तर से घटकर अब केवल 180 मिलियन डॉलर रह गया है। यह गिरावट स्पष्ट करती है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का रुख भारत के प्रति बदल रहा है।
इस सुधार में एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ETF) की भूमिका सबसे अहम रही। इस हफ्ते ETF ने 220 मिलियन डॉलर का निवेश आकर्षित किया, जबकि लॉन्ग-ओनली फंड्स में अभी भी लगभग 400 मिलियन डॉलर की निकासी देखी गई।
अमेरिकी फंड्स की वापसी — बड़ा संकेत
सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि अमेरिका स्थित फंड्स, जो हाल के हफ्तों में भारी बिकवाली कर रहे थे, उन्होंने सात हफ्तों की लगातार निकासी — जिसमें कुल 3.3 अरब डॉलर निकले — के बाद इस हफ्ते 225 मिलियन डॉलर का निवेश किया। यह अमेरिकी निवेशकों के भारत के प्रति बदलते नजरिए का संकेत है।
हालांकि, इस सुधार के बावजूद भारत-केंद्रित निवेश रणनीतियों में लगातार नौ हफ्तों से निकासी का सिलसिला जारी है, जो दीर्घकालिक चिंता का विषय बना हुआ है।
वैश्विक तरलता की स्थिति
वैश्विक स्तर पर तरलता की स्थिति चौथे हफ्ते भी मजबूत बनी रही। अमेरिकी इक्विटी फंड्स में पिछले एक महीने में हर हफ्ते 10 अरब से 22 अरब डॉलर तक का निवेश आया, जबकि ग्लोबल फंड्स में 16 अरब डॉलर का निवेश दर्ज किया गया।
ग्लोबल इमर्जिंग मार्केट (GEM) फंड्स में हर हफ्ते करीब 2 अरब डॉलर का निवेश जारी रहा, जबकि इमर्जिंग मार्केट ग्रोथ फंड्स में 1.4 अरब डॉलर का निवेश आया।
यूरोप और चीन में उलटी दिशा
इसके विपरीत, यूरोप और चीन में पिछले पांच हफ्तों से लगातार निवेश निकल रहा है। यह वैश्विक निवेशकों के अलग-अलग बाजारों के प्रति अलग-अलग रुझान को दर्शाता है और भारत की सापेक्षिक आकर्षण क्षमता को रेखांकित करता है।
कमोडिटी से जुड़े इक्विटी फंड्स में हाल की तेजी के बाद निवेश की रफ्तार धीमी हुई है। ऊर्जा सेक्टर के फंड्स में निकासी कम हुई है, सोने में निवेश की गति धीमे-धीमे स्थिर हो रही है, जबकि चांदी से जुड़े फंड्स में निवेश कमजोर बना हुआ है।
विश्लेषण — भारत के लिए क्या मायने रखता है यह बदलाव?
गौरतलब है कि यह इनफ्लो ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान सीमा तनाव और वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं के बीच घरेलू बाजार दबाव में थे। इसके बावजूद विदेशी निवेश की वापसी यह दर्शाती है कि वैश्विक निवेशक भारत को एक स्थिर और आकर्षक गंतव्य मानते हैं।
ETF के माध्यम से आया यह निवेश संरचनात्मक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि ETF आमतौर पर दीर्घकालिक रणनीतिक निवेश का प्रतिनिधित्व करते हैं, न कि अल्पकालिक सट्टेबाजी का। आने वाले हफ्तों में यदि लॉन्ग-ओनली फंड्स में भी निकासी कम होती है, तो भारतीय बाजारों में विदेशी निवेश की पूर्ण वापसी की उम्मीद की जा सकती है।