गिग वर्कर्स की बड़ी मांग: भीषण गर्मी में सुरक्षा उपाय लागू करे सरकार
सारांश
Key Takeaways
- IFAT ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर गिग वर्कर्स के लिए हीटवेव सुरक्षा उपाय लागू करने की मांग की।
- IMD के ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान सशुल्क शीतलन अवकाश देने की मांग की गई है।
- अत्यधिक गर्मी में काम रोकने पर आईडी ब्लॉक या प्रोत्साहन कटौती से सुरक्षा की मांग की गई।
- पीने का पानी, ORS और कूलिंग शेल्टर की अनिवार्य उपलब्धता और सार्वजनिक अनुपालन डैशबोर्ड की सिफारिश की गई।
- दक्षिण कोरिया, UAE, फ्रांस, जापान और कैलिफोर्निया में ऐसे उपाय पहले ही लागू हो चुके हैं।
- सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 पारित होने के बावजूद अधिकांश प्रावधान अभी तक लागू नहीं हुए हैं।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल। देश के बड़े हिस्से में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स का प्रतिनिधित्व करने वाले राष्ट्रीय संगठन इंडियन फेडरेशन ऑफ ऐप-बेस्ड ट्रांसपोर्ट वर्कर्स (IFAT) ने केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को पत्र लिखकर हीटवेव सुरक्षा उपायों को तत्काल लागू करने की मांग की है। संगठन ने सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 के तहत बाध्यकारी प्रावधानों को अमल में लाने पर जोर दिया है।
क्या है IFAT की प्रमुख मांगें
IFAT ने अपने पत्र में कई ठोस प्रस्ताव रखे हैं जो लाखों डिलीवरी कर्मियों, राइड-हेलिंग ड्राइवरों और होम-सर्विस कर्मचारियों की जान बचाने के लिए जरूरी बताए गए हैं।
संगठन ने मांग की है कि भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी ऑरेंज और रेड अलर्ट के दौरान गिग वर्कर्स को सशुल्क शीतलन अवकाश (Paid Cooling Break) दिया जाए। इसके साथ ही अत्यधिक गर्मी के कारण काम रोकने पर किसी भी कर्मचारी की आईडी ब्लॉक न की जाए और उनके प्रोत्साहन में कटौती न हो।
इसके अलावा पीने का पानी, ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्ट (ORS) और कूलिंग शेल्टर्स की अनिवार्य उपलब्धता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
तकनीकी जवाबदेही की मांग
IFAT ने एग्रीगेटर कंपनियों की जवाबदेही तय करने के लिए ऐप में आपातकालीन संकट प्रणाली (Emergency Distress System) लागू करने की सिफारिश की है। साथ ही एक सार्वजनिक अनुपालन डैशबोर्ड बनाने की मांग की गई है, जिससे यह पारदर्शी हो सके कि कौन सी कंपनियां नियमों का पालन कर रही हैं और कौन नहीं।
संगठन का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने वाले लाखों कर्मचारी पर्याप्त सुरक्षा उपायों के बिना 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान में काम करने को मजबूर हैं, जिससे उन्हें हीट स्ट्रोक और अन्य गंभीर स्वास्थ्य खतरों का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरराष्ट्रीय उदाहरणों से मजबूत की दलील
IFAT ने अपनी मांगों को वैश्विक संदर्भ में पुष्ट करते हुए बताया कि दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, फ्रांस, जापान, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य में पहले ही प्लेटफॉर्म कर्मचारियों के लिए इसी प्रकार के हीटवेव सुरक्षा उपाय लागू किए जा चुके हैं।
यह तुलना इस बात को रेखांकित करती है कि भारत जैसा देश — जो दुनिया की सबसे बड़ी गिग इकॉनमी में से एक है — अभी भी इस दिशा में पिछड़ा हुआ है।
गहरा संदर्भ: क्यों यह मांग अभी और जरूरी है
गौरतलब है कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 संसद में पारित हो चुकी है, लेकिन इसके अधिकांश प्रावधान अभी तक अधिसूचित नहीं किए गए हैं। यानी कानून बना, लेकिन जमीन पर लागू नहीं हुआ — यही विडंबना IFAT की मांग की असली पृष्ठभूमि है।
भारत में गिग वर्कर्स की संख्या 2029-30 तक 2.35 करोड़ से अधिक होने का अनुमान है। इनमें से अधिकांश बिना किसी सामाजिक सुरक्षा, बीमा या श्रम संरक्षण के काम कर रहे हैं। ऐसे में हर साल बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन के संकट के बीच यह मांग केवल श्रमिक अधिकार का नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य नीति का भी सवाल बन गई है।
आने वाले दिनों में यदि श्रम मंत्रालय इस पत्र पर कोई ठोस कदम उठाता है तो यह गिग वर्कर्स के लिए एक ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव साबित हो सकता है।