दल-बदल कानून के तहत AAP की बड़ी कार्रवाई, राघव चड्ढा समेत 3 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द होगी?

Click to start listening
दल-बदल कानून के तहत AAP की बड़ी कार्रवाई, राघव चड्ढा समेत 3 बागी सांसदों की सदस्यता रद्द होगी?

सारांश

AAP ने बागी सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग उठाई। चीफ व्हीप एनडी गुप्ता सभापति को पत्र लिखेंगे। AAP ने इसे BJP का 'ऑपरेशन लोटस' बताया।

Key Takeaways

  • आम आदमी पार्टी ने बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) के तहत कार्रवाई की तैयारी की है।
  • राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल — तीनों राज्यसभा सांसदों ने AAP छोड़कर BJP का दामन थाम लिया।
  • AAP के चीफ व्हीप एनडी गुप्ता शनिवार को राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर तीनों की सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे।
  • राघव चड्ढा ने दावा किया कि 10 में से 7 सांसद उनके साथ हैं, लेकिन AAP ने इसे झूठा बताया।
  • BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने तीनों बागी सांसदों का मिठाई खिलाकर BJP कार्यालय में स्वागत किया।
  • AAP ने इसे 'ऑपरेशन लोटस' करार देते हुए कहा कि ED और CBI का भय दिखाकर पंजाब की भगवंत मान सरकार को अस्थिर करने की साजिश है।

नई दिल्ली, 24 अप्रैलआम आदमी पार्टी (AAP) ने अपने बागी सांसदों के खिलाफ दल-बदल विरोधी कानून (एंटी डिफेक्शन लॉ) के तहत औपचारिक कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। पार्टी का स्पष्ट मत है कि राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल ने पार्टी से विद्रोह कर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामा, जो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का आधार बनता है। यह घटनाक्रम भारतीय राजनीति में 'ऑपरेशन लोटस' की बहस को एक बार फिर केंद्र में ले आया है।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई बगावत?

शुक्रवार, 25 अप्रैल को राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफे और BJP में शामिल होने की घोषणा करते हुए दावा किया कि राज्यसभा में पार्टी के 10 सांसदों में से दो-तिहाई यानी 7 सांसद उनके साथ हैं। उन्होंने कहा कि सभी जरूरी दस्तावेज और हस्ताक्षरित पत्र राज्यसभा सभापति को सौंप दिए गए हैं।

हालांकि, AAP ने इस दावे को सिरे से खारिज किया। पार्टी के अनुसार, वास्तव में केवल तीन सांसद — राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल — ही BJP के साथ गए हैं। चड्ढा और उनके साथी शुक्रवार को BJP के राष्ट्रीय कार्यालय पहुंचे, जहां BJP राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने मिठाई खिलाकर उनका स्वागत किया।

AAP की कानूनी रणनीति: क्या है दल-बदल कानून?

भारत के संविधान की दसवीं अनुसूची, जिसे सामान्यतः दल-बदल विरोधी कानून कहा जाता है, 1985 में 52वें संविधान संशोधन के जरिए लागू हुई थी। इसके अनुसार, यदि कोई सांसद स्वेच्छा से अपनी पार्टी की सदस्यता छोड़ता है या पार्टी के निर्देश के विरुद्ध मतदान करता है, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है।

इस कानून के तहत अयोग्यता से बचने का एकमात्र रास्ता यह है कि कम से कम दो-तिहाई सदस्य एक साथ किसी अन्य दल में विलय करें। AAP का तर्क है कि चूंकि केवल तीन सांसद BJP में गए हैं, यह दो-तिहाई की शर्त पूरी नहीं होती। इसलिए यह मामला सीधे दल-बदल कानून के दायरे में आता है।

AAP के चीफ व्हीप एनडी गुप्ता शनिवार को राज्यसभा सभापति को पत्र लिखेंगे, जिसमें तीनों बागी सांसदों की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की जाएगी। पार्टी कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर इस पूरी प्रक्रिया को औपचारिक रूप देने में जुटी है।

AAP का 'ऑपरेशन लोटस' आरोप

आम आदमी पार्टी ने इस पूरे घटनाक्रम को BJP का 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया है। पार्टी का आरोप है कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) और केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का भय दिखाकर AAP नेताओं को तोड़ने की सुनियोजित साजिश रची गई।

राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि 'ऑपरेशन लोटस' के जरिए BJP पंजाब में भगवंत मान सरकार को अस्थिर करना चाहती है। उन्होंने इसे पंजाब और वहां की जनता के साथ धोखा बताते हुए कहा कि पंजाब की जनता इसे कभी नहीं भूलेगी।

ऐतिहासिक संदर्भ और राजनीतिक विश्लेषण

गौरतलब है कि 'ऑपरेशन लोटस' का आरोप पहली बार नहीं लगा है। 2019 में कर्नाटक और 2020 में मध्य प्रदेश में भी इसी तरह की सरकार-गिराओ रणनीति के आरोप लगे थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि AAP की याचिका सभापति द्वारा स्वीकार की जाती है और तीनों सांसद अयोग्य ठहराए जाते हैं, तो पंजाब की राजनीति पर इसका सीधा असर पड़ेगा — क्योंकि ये सांसद पंजाब से ही चुने गए हैं।

यह भी ध्यान देने योग्य है कि राघव चड्ढा AAP के सबसे चर्चित और युवा चेहरों में से एक रहे हैं। उनका पार्टी छोड़ना न केवल संगठनात्मक झटका है, बल्कि पार्टी की छवि के लिए भी चुनौती है।

आने वाले दिनों में राज्यसभा सभापति का फैसला इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा। यदि सदस्यता रद्द होती है, तो यह भारत में दल-बदल कानून के सबसे चर्चित मामलों में से एक बन सकता है।

Point of View

उसी के चुने हुए प्रतिनिधि 'सत्ता के दबाव' में पाला बदल रहे हैं। दल-बदल कानून की असली परीक्षा अब सभापति की कुर्सी पर होगी — क्योंकि यदि तीन सांसदों की सदस्यता बचती है, तो यह कानून की व्याख्या पर बड़ा सवाल खड़ा करेगा। पंजाब में आगामी राजनीतिक समीकरण इस फैसले से सीधे प्रभावित होंगे।
NationPress
27/04/2026

Frequently Asked Questions

AAP के बागी सांसदों पर दल-बदल कानून कैसे लागू होगा?
दल-बदल विरोधी कानून (संविधान की दसवीं अनुसूची) के अनुसार, यदि कोई सांसद स्वेच्छा से पार्टी छोड़ता है और दो-तिहाई सदस्यों का समर्थन नहीं होता, तो उसकी सदस्यता रद्द हो सकती है। AAP का कहना है कि केवल तीन सांसद BJP में गए, जो 10 में से दो-तिहाई नहीं है।
राघव चड्ढा ने AAP क्यों छोड़ी?
राघव चड्ढा ने AAP से इस्तीफा देकर BJP में शामिल होने की घोषणा की और दावा किया कि पार्टी के 7 सांसद उनके साथ हैं। हालांकि AAP ने इस दावे को गलत बताया और कहा कि केवल तीन सांसद ही पार्टी छोड़ गए हैं।
'ऑपरेशन लोटस' क्या है और AAP ने इसे क्यों लगाया?
'ऑपरेशन लोटस' वह रणनीति है जिसमें आरोप लगाया जाता है कि BJP केंद्रीय एजेंसियों (ED/CBI) का डर दिखाकर विपक्षी दलों के नेताओं को अपने साथ मिलाती है। AAP ने इसी आधार पर इस पूरे घटनाक्रम को 'ऑपरेशन लोटस' करार दिया है।
AAP के चीफ व्हीप एनडी गुप्ता क्या करेंगे?
AAP के चीफ व्हीप एनडी गुप्ता शनिवार को राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर राघव चड्ढा, संदीप पाठक और अशोक मित्तल की राज्यसभा सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे। यह मांग दल-बदल कानून और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आधार पर की जाएगी।
क्या AAP बागी सांसदों की सदस्यता रद्द करवा सकती है?
AAP ने कानूनी विशेषज्ञों से सलाह लेकर राज्यसभा सभापति के पास याचिका दाखिल करने की तैयारी की है। अंतिम फैसला राज्यसभा सभापति करेंगे, जो संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इस मामले की सुनवाई करेंगे।
Nation Press