अंगद हसीजा बोले — 'तुमसे तुम तक' में यशवर्धन बनना आसान नहीं, टेलीविजन इंडस्ट्री में आया बड़ा बदलाव
सारांश
मुख्य बातें
अभिनेता अंगद हसीजा इन दिनों टीवी सीरियल 'तुमसे तुम तक' में यशवर्धन की भूमिका निभाकर दर्शकों का ध्यान खींच रहे हैं। मुंबई में एक विशेष बातचीत में उन्होंने टेलीविजन इंडस्ट्री में आए बदलावों, मानसिक रूप से जटिल किरदारों की चुनौती और आज के निर्देशकों की कार्यशैली पर खुलकर अपने विचार साझा किए।
टेलीविजन में आया बड़ा बदलाव
अंगद हसीजा का मानना है कि टेलीविजन इंडस्ट्री पहले की तुलना में काफी परिपक्व हो चुकी है। उन्होंने कहा, 'टेलीविजन इंडस्ट्री में पहले के मुकाबले बहुत सुधार हुआ है। मुझे जो कमी महसूस होती है, वह यह है कि पहले बहुत लंबे चलने वाले शो हुआ करते थे — चार या पाँच साल तक। अब वे उतने लंबे नहीं चलते।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दौर में वर्टिकल शो और वेब सीरीज़ के रूप में विविधता बढ़ी है, जिससे प्रतिस्पर्धा का स्वरूप ही बदल गया है।
हसीजा ने कहा, 'आपको हर चीज़ में सकारात्मकता ढूँढनी चाहिए। नहीं तो, हर चीज़ में कुछ न कुछ गलत ही मिलेगा।' यह बयान उस सोच को दर्शाता है जो उन्हें एक संतुलित कलाकार के रूप में स्थापित करता है।
चैनलों की बदली सोच और कहानियों में विविधता
अंगद ने बताया कि टेलीविजन का ढाँचा अब पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार, 'एक समय था जब टेलीविजन इंडस्ट्री आज से बिल्कुल अलग हुआ करती थी। चैनल अब रिसर्च करते हैं कि उनके आसपास क्या हो रहा है और उसी के अनुसार दर्शकों तक कहानियाँ पहुँचाते हैं।' उन्होंने कहा कि पहले एक 'टिपिकल' किस्म का ड्रामा हुआ करता था, लेकिन अब टेलीविजन भी कुछ अलग और नया दिखाने की कोशिश कर रहा है।
गौरतलब है कि आज के निर्देशकों की कार्यशैली भी बदली है — वे पहले से कहीं अधिक स्पष्ट होते हैं कि उन्हें कौन-से शॉट चाहिए और उन्हें किस तरह शूट करना है।
मानसिक रूप से जटिल किरदार निभाने की चुनौती
जब उनसे पूछा गया कि मानसिक रूप से अस्थिर किरदार को परदे पर जीवंत करना कितना कठिन है, तो अंगद ने कहा, 'परफॉर्मेंस ऐसी करो कि ओवरएक्टिंग जैसी न लगे। ऐसा किरदार निभाना मुश्किल है और दर्शकों तक इसे प्रामाणिक रूप से पहुँचाना और भी मुश्किल।'
उन्होंने बताया कि अपने पहले शो में भी उन्होंने इसी तरह का एक जटिल किरदार निभाया था, जिसके लिए उन्हें गहरी रिसर्च करनी पड़ी थी। 'उस समय मैं ऐसे लोगों से मिला जो मानसिक रूप से परेशान थे और उनकी बॉडी लैंग्वेज और संवाद अदायगी को ध्यान से देखा। मैंने समझा कि वे बोलते समय कैसे रुक जाते हैं और भयभीत होने पर कैसे प्रतिक्रिया देते हैं,' उन्होंने विस्तार से बताया।
विशेषज्ञ दृष्टिकोण: अभिनय और शोध का संगम
अंगद हसीजा का यह अनुभव दर्शाता है कि टेलीविजन अभिनय अब महज़ 'डेली सोप' की छवि से बाहर निकल रहा है। मानसिक स्वास्थ्य जैसे संवेदनशील विषयों को परदे पर ज़िम्मेदारी से उठाना, और उसके लिए वास्तविक जीवन से प्रेरणा लेना — यह रुझान इंडस्ट्री की परिपक्वता का संकेत है।
यह ऐसे समय में आया है जब ओटीटी प्लेटफ़ॉर्म और वेब सीरीज़ ने टेलीविजन को नई चुनौती दी है, और ऐसे में अभिनेताओं की विविधता और गहराई ही उनकी पहचान बन रही है।