अर्जुन बिजलानी बोले — टीवी, ओटीटी और फिल्में तीन अलग क्लासरूम, कंटेंट ही असली राजा
सारांश
मुख्य बातें
टीवी अभिनेता अर्जुन बिजलानी ने मनोरंजन के तीन प्रमुख माध्यमों — टीवी, ओटीटी और फिल्मों — को लेकर अपना स्पष्ट नज़रिया साझा किया है। उनके अनुसार ये तीनों प्लेटफॉर्म एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी नहीं, बल्कि अभिनय की कला को अलग-अलग तरीकों से परखने वाले मंच हैं। मुंबई में राष्ट्र प्रेस से हुई बातचीत में उन्होंने कहा कि किसी भी माध्यम की सफलता का आधार प्लेटफॉर्म नहीं, बल्कि कहानी की ताकत होती है।
तीनों माध्यम — तीन अलग कक्षाएँ
अर्जुन बिजलानी ने कहा, 'मैं टीवी, ओटीटी और फिल्मों को किसी प्रतिस्पर्धा के रूप में नहीं देखता। ये तीनों ऐसे हैं, जैसे अलग-अलग क्लासरूम हों, जहाँ सीखने का विषय एक ही है — यानी एक्टिंग — लेकिन उसे पेश करने का तरीका और उसका असर अलग-अलग होता है।' उनका यह नज़रिया उस बहस को नई दिशा देता है, जिसमें अक्सर तीनों माध्यमों को एक-दूसरे से श्रेष्ठ साबित करने की कोशिश होती है।
उन्होंने तीनों की विशेषताएँ भी स्पष्ट कीं — टीवी पर किरदार को लंबे समय में गहराई से उभारा जा सकता है, फिल्मों में सीमित समय में हर दृश्य को सटीक और प्रभावशाली बनाना पड़ता है, जबकि ओटीटी कलाकार को किरदार में कई परतें जोड़ने और उसे विस्तार से दिखाने का अवसर देता है।
कंटेंट ही सबसे बड़ा राजा
बिजलानी ने ज़ोर देकर कहा, 'एक अभिनेता के लिए सबसे ज़रूरी चीज़ माध्यम नहीं, बल्कि कहानी होती है। अगर कहानी मज़बूत हो तो वह किसी भी प्लेटफॉर्म पर सफल हो सकती है — चाहे वह टीवी हो, ओटीटी हो या फिल्में। असली ताकत कहानी में होती है, क्योंकि वही दर्शकों को जोड़ती है और उन्हें भावनात्मक रूप से बाँधती है। आज के समय में कंटेंट ही सबसे बड़ा राजा है, न कि प्लेटफॉर्म।'
यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बढ़ती लोकप्रियता के बीच टीवी उद्योग की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। गौरतलब है कि भारत में ओटीटी दर्शकों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेज़ी से बढ़ी है, फिर भी टीवी का पहुँच-आधार अब भी सबसे व्यापक बना हुआ है।
बोल्ड कंटेंट और दर्शकों की समझदारी
ओटीटी और फिल्मों में बढ़ते बोल्ड कंटेंट पर बिजलानी का कहना था, 'टीवी अभी भी पारंपरिक और पारिवारिक मनोरंजन का माध्यम है। टीवी पर कंटेंट इस तरह बनाया जाता है कि पूरा परिवार साथ बैठकर देख सके।' उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज के दर्शक काफी समझदार हो गए हैं — उनके पास विकल्पों की भरमार है और वे अपनी पसंद का कंटेंट चुनने में सक्षम हैं।
उनके अनुसार ओटीटी और फिल्में अपेक्षाकृत अधिक स्वतंत्र माध्यम हैं, जहाँ विविध प्रकार की कहानियाँ दिखाई जाती हैं। लेकिन दर्शक की पसंद और उसकी चयन-शक्ति ही अंततः तय करती है कि कौन-सा कंटेंट टिकेगा।
अर्जुन बिजलानी का करियर सफर
अर्जुन बिजलानी ने टीवी इंडस्ट्री में 'रीमिक्स', 'लेफ्ट राइट लेफ्ट', 'मिले जब हम तुम', 'नागिन' और 'प्यार का पहला अध्याय: शिव शक्ति' जैसे चर्चित शोज़ के ज़रिए मज़बूत पहचान बनाई है। इन विविध किरदारों के अनुभव ने ही संभवतः उन्हें तीनों माध्यमों की बारीकियों को इतने स्पष्ट रूप में समझने और व्यक्त करने में सक्षम बनाया है। आने वाले समय में उनकी किस परियोजना में एंट्री होगी, यह देखना दिलचस्प होगा।