हैदराबादी लहजा सीखने के लिए हंसिका मोटवानी ने की घंटों मेहनत, बोलीं — एक छोटी गलती भी दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं
सारांश
Key Takeaways
- हंसिका मोटवानी आगामी वेब सीरीज 'गली' में मुख्य भूमिका निभा रही हैं।
- सीरीज की कहानी हैदराबाद के पुराने शहर और चारमीनार इलाके पर केंद्रित है।
- हंसिका ने बिना किसी डायलॉग ट्रेनर के, खुद और टीम के साथ वर्कशॉप करके हैदराबादी लहजा सीखा।
- उन्होंने कहा — ''छोटी सी गलती की भी गुंजाइश नहीं'', एक गलत शब्द भी दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं।
- यह हंसिका के करियर का पहला अनुभव है जब उन्होंने इस तरह के क्षेत्रीय लहजे में काम किया।
- OTT प्लेटफॉर्म्स पर क्षेत्रीय प्रामाणिकता की बढ़ती मांग के बीच यह तैयारी उनके समर्पण को दर्शाती है।
चेन्नई, 26 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बॉलीवुड और वेब की दुनिया में अब सिर्फ चेहरे की अदाकारी काफी नहीं — किरदार की भाषा, उसका लहजा और उसकी जड़ें भी उतनी ही अहम हो गई हैं। अभिनेत्री हंसिका मोटवानी इस बात को बखूबी समझती हैं, इसीलिए आगामी वेब सीरीज 'गली' में अपने किरदार के लिए उन्होंने हैदराबाद की खास बोली और लहजे को सीखने में घंटों की कड़ी मेहनत की है।
किरदार की तैयारी — भाषा से शुरू हुई असली परीक्षा
हंसिका मोटवानी ने बताया कि इस किरदार के लिए सबसे बड़ी चुनौती डायलॉग डिलीवरी थी। सीरीज की कहानी हैदराबाद के पुराने शहर और चारमीनार इलाके की जीवंत दुनिया के इर्द-गिर्द बुनी गई है।
उन्होंने कहा, ''मैं चाहती थी कि मेरे डायलॉग्स बिल्कुल असली लगें और दर्शकों को यह महसूस हो कि मेरा किरदार उसी माहौल का हिस्सा है। इसके लिए वहां की बोली को सही तरीके से समझना मेरे लिए बेहद जरूरी था।''
बिना डायलॉग ट्रेनर के खुद की तैयारी
दिलचस्प बात यह है कि हंसिका ने इस तैयारी के लिए किसी अलग डायलॉग ट्रेनर की मदद नहीं ली। उन्होंने खुद मेहनत करते हुए और पूरी टीम के साथ बार-बार वर्कशॉप करते हुए यह काम किया।
हंसिका ने कहा, ''टीम के साथ बैठकर बार-बार डायलॉग्स पढ़ने और बोलने से भाषा की बारीकियों को समझने का मौका मिला। हर शब्द सही तरीके से बोला जाए — यही हमारी कोशिश रहती थी।''
एक गलत शब्द भी दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं
हंसिका मोटवानी ने माना कि किसी खास बोली में अभिनय करना उनके लिए बिल्कुल नया अनुभव था। उन्होंने इससे पहले कभी इस तरह के हैदराबादी लहजे में काम नहीं किया था।
उन्होंने स्पष्ट किया, ''छोटी सी गलती की भी गुंजाइश नहीं थी। अगर एक भी शब्द गलत बोल दिया जाए तो दर्शक तुरंत पकड़ लेते हैं। इसीलिए मैं हर शब्द के उच्चारण और बोलने के अंदाज को लेकर बहुत सावधान रहती थी।''
किरदार की भावनाएं और सोच को समझना भी जरूरी
हंसिका ने यह भी बताया कि वह सिर्फ बोली नहीं, बल्कि हैदराबाद के उस इलाके के लोगों की सोच, भावनाएं और जीवनशैली को भी समझने की कोशिश करती रहीं।
उनके शब्दों में, ''जब तक कलाकार किरदार की भाषा को सही तरीके से नहीं समझता, तब तक वह उस किरदार के साथ पूरी तरह न्याय नहीं कर सकता।'' यह सोच उन्हें अपने समकालीन कलाकारों से अलग करती है।
भारतीय वेब सीरीज में क्षेत्रीय प्रामाणिकता का बढ़ता महत्व
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में OTT प्लेटफॉर्म्स पर क्षेत्रीय भाषाओं और बोलियों की प्रामाणिकता को लेकर दर्शकों की मांग तेजी से बढ़ी है। 'मिर्जापुर', 'पंचायत' और 'स्कैम 1992' जैसी सीरीज की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि भाषाई सटीकता किसी भी कहानी को और अधिक विश्वसनीय बनाती है।
हंसिका मोटवानी की यह तैयारी इसी बदलती प्रवृत्ति का हिस्सा है, जहां कलाकार अब किरदार के भूगोल और संस्कृति को भी जीने की कोशिश करते हैं। वेब सीरीज 'गली' के जल्द रिलीज होने की उम्मीद है और दर्शकों की नजरें इस पर टिकी हैं।