मणिपुर में जातीय हिंसा से पर्यटन धराशायी, 1.75 लाख से घटकर नगण्य: मुख्यमंत्री खेमचंद
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर में जातीय हिंसा के कारण पर्यटन क्षेत्र को गहरी चोट लगी है — मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 27 सितंबर 2026 को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर यह स्वीकार किया कि 2023 की जातीय हिंसा से पहले राज्य में 1.75 लाख पर्यटक सालाना आते थे, जो अब नाटकीय रूप से घट गए हैं। बिष्णुपुर जिले के मोइरांग खुनौ स्थित संगाई जातीय पार्क में आयोजित इस कार्यक्रम में राज्यपाल और मुख्यमंत्री दोनों ने संयुक्त रूप से हिस्सा लिया।
पर्यटन में गिरावट की तस्वीर
विश्व पर्यटन दिवस 2026 के कार्यक्रम में सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने पड़ोसी राज्यों से तुलना कर मणिपुर की स्थिति को और स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि जब मणिपुर में पर्यटक आगमन गिर रहा है, तब मिजोरम में पर्यटकों की संख्या 8 लाख से अधिक हो गई है, जिससे उस राज्य के राजस्व में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
उन्होंने सिक्किम का उदाहरण देते हुए बताया कि वह छोटा-सा पहाड़ी राज्य एक वर्ष में 17 लाख से अधिक पर्यटकों को आकर्षित करता है। इसका श्रेय उन्होंने वहाँ की स्थिर कानून-व्यवस्था को दिया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'शांतिपूर्ण वातावरण के अभाव में पर्यटक मणिपुर नहीं आएंगे।'
सरकार की स्वीकारोक्ति और सीमाएँ
खेमचंद सिंह ने माना कि पर्यटन स्थलों का सौंदर्यीकरण मात्र पर्याप्त नहीं है। उन्होंने कहा कि विदेशी पर्यटकों के लिए स्वीकार्य स्तर तक समग्र पर्यटन यात्रा कार्यक्रम और सुविधाओं में सुधार आवश्यक है।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि सरकार अकेले राज्य में शांति नहीं ला सकती। उनके अनुसार, इसके लिए सभी हितधारकों के सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है — एक ऐसी स्वीकारोक्ति जो मौजूदा संघर्ष की जटिलता को रेखांकित करती है।
राज्यपाल भल्ला का दृष्टिकोण
राज्यपाल अजय कुमार भल्ला ने कहा कि मणिपुर पर्यटन की असली ताकत इसके भूदृश्यों और स्मारकों से कहीं अधिक है — यह यहाँ के लोगों और समुदायों में निहित है। उन्होंने कहा, 'वास्तविक पर्यटन हमारी विशिष्ट जीवनशैली और अतिथियों के स्वागत की अनूठी परंपरा में निहित है।'
राज्यपाल ने बताया कि सरकार होमस्टे को सक्रिय रूप से बढ़ावा दे रही है और स्थानीय परिवारों को अपने घरों को पर्यटक आवास में बदलने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है, ताकि पर्यटन राजस्व जमीनी स्तर तक पहुँचे।
डिजिटल एजेंडा और AI की भूमिका
इस वर्ष के विश्व पर्यटन दिवस का विषय — 'डिजिटल एजेंडा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता से पर्यटन का पुनर्निर्माण' — मणिपुर के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक है। राज्यपाल भल्ला ने कहा कि जब प्रौद्योगिकी लोगों के पर्यटन स्थलों को खोजने, अनुभव करने और साझा करने के तरीके को बदल रही है, तो यह मणिपुर के लिए अपार संभावनाएँ प्रस्तुत करता है।
गौरतलब है कि जब तक राज्य में शांति बहाल नहीं होती, डिजिटल माध्यमों से पर्यटन को बढ़ावा देने की कोशिशें सीमित असर ही दिखाएंगी। यह कार्यक्रम ऐसे समय में आयोजित हुआ जब मणिपुर में जातीय संघर्ष के तीन वर्ष पूरे होने के करीब हैं और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया अभी भी अधूरी है।
आगे की राह
मुख्यमंत्री और राज्यपाल दोनों के वक्तव्यों से स्पष्ट है कि मणिपुर सरकार पर्यटन क्षेत्र को पुनर्जीवित करने के लिए शांति को पूर्वशर्त मान रही है। होमस्टे प्रोत्साहन, डिजिटल माध्यमों के उपयोग और बुनियादी ढाँचे के सुधार जैसे कदम तभी फलीभूत होंगे जब राज्य में स्थायी शांति स्थापित हो।