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मणिपुर हिंसा से जीएसटी में ₹1,200 करोड़ का घाटा, मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने किया खुलासा

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मणिपुर हिंसा से जीएसटी में ₹1,200 करोड़ का घाटा, मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने किया खुलासा

सारांश

मणिपुर में मई 2023 से जारी जातीय हिंसा का आर्थिक दंश अब आँकड़ों में सामने आया है — मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने खुलासा किया कि तीन वर्षों में जीएसटी राजस्व में ₹1,200 करोड़ की चोट पड़ी। राजमार्ग बहाली से उम्मीद की किरण जगी है, लेकिन मैतेई, नागा और कुकी समुदायों के बीच पहचान का संकट गहरा बना हुआ है।

मुख्य बातें

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बताया कि 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण 2023-2026 के बीच जीएसटी संग्रह में लगभग ₹1,200 करोड़ का नुकसान हुआ।
बंद और नाकाबंदी से राज्य भर के दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों पर गंभीर प्रतिकूल असर पड़ा।
नागालैंड के दीमापुर होते हुए इंफाल-गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्ग पर निर्बाध आवागमन बहाल होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को गति मिली।
सरकार ने प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अंतर-ग्राम सड़कों के लिए ₹10 करोड़ आवंटित किए; सेनापति जिले में नया मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने मैतेई , नागा और कुकी समुदायों से पहले भारतीय, फिर मणिपुरी पहचान अपनाने की अपील की।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 15 अक्टूबर 2026 को खुलासा किया कि 3 मई 2023 को भड़की जातीय हिंसा के चलते राज्य में 2023 से 2026 के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह में लगभग ₹1,200 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। मुख्यमंत्री सेनापति जिले के तादुबी स्थानीय मैदान में आयोजित 'सेवा संकल्प अभियान' को संबोधित कर रहे थे।

आर्थिक नुकसान का ब्यौरा

मुख्यमंत्री के अनुसार, तीन वर्षों से अधिक समय तक चली इस अशांति ने राज्य में आर्थिक गतिविधियाँ लगभग ठप कर दीं, जिसके परिणामस्वरूप सरकारी राजस्व पर गंभीर असर पड़ा। बंद और नाकाबंदी ने न केवल व्यापार को प्रभावित किया, बल्कि दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी को भी बाधित किया। उन्होंने कहा कि यह नुकसान राज्य की विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में भी रोड़ा बना।

राजमार्ग बहाली से आई राहत

मुख्यमंत्री ने नागा बहुल सेनापति जिले के मरम, तादुबी और माओ के लोगों की सराहना की, जिन्होंने नागालैंड के दीमापुर होते हुए इंफाल को गुवाहाटी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्री बसों और अन्य वाहनों की निर्बाध आवाजाही बहाल करने में अहम भूमिका निभाई। खेमचंद सिंह ने कहा कि इस राजमार्ग पर संपर्क बहाल होने से राज्य की अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है और विभिन्न क्षेत्रों के बीच जुड़ाव में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

सामुदायिक एकता और ऐतिहासिक संदर्भ

मुख्यमंत्री ने मणिपुर में रहने वाले 36 विभिन्न समुदायों की ऐतिहासिक एकता का उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि मणिपुर-बर्मा युद्ध के दौरान इन समुदायों ने राज्य के राजाओं के साथ मिलकर बर्मी सेना का सफलतापूर्वक प्रतिरोध किया था और राज्य की रक्षा की थी। उन्होंने इस एकता को वर्तमान संकट से उबरने की प्रेरणा बताया।

पहचान और सुलह की अपील

मुख्यमंत्री ने चिंता व्यक्त की कि मैतेई, नागा और कुकी समुदायों के सदस्य खुद को 'मणिपुरी' के रूप में पहचानने में हिचकिचाहट महसूस कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य को शांति और सुलह के मार्ग पर आगे बढ़ाने के लिए नागरिकों को पहले स्वयं को भारतीय और फिर मणिपुरी के रूप में पहचानना होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुदायों के बीच मतभेदों को संवाद और आपसी समझ के माध्यम से ही सुलझाया जा सकता है।

विकास कार्यों की घोषणाएँ

विकास पहलों की बात करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने अंतर-ग्राम सड़कों (IVR) के निर्माण के लिए प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र के बजट में लगभग ₹10 करोड़ आवंटित किए हैं। इसके साथ ही उन्होंने घोषणा की कि पहाड़ी क्षेत्रों में समान विकास सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सेनापति जिले में एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा, जैसाकि पूर्व में चुराचंदपुर जिले में किया गया था। यह घोषणा ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब राज्य में शांति बहाली के साथ-साथ पुनर्निर्माण की आवश्यकता महसूस की जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ के राजस्व घाटे का यह आँकड़ा महत्वपूर्ण है, लेकिन यह केवल जीएसटी की कहानी है — पर्यटन, कृषि, निर्माण और अनौपचारिक अर्थव्यवस्था पर पड़ी मार को जोड़ा जाए तो वास्तविक नुकसान कहीं अधिक हो सकता है। गौरतलब है कि यह खुलासा तब हुआ जब मणिपुर में शांति वार्ता अभी भी अधूरी है और विस्थापितों की बड़ी तादाद राहत शिविरों में है। राजमार्ग बहाली को आर्थिक पुनरुद्धार के संकेत के रूप में प्रस्तुत करना आशावादी है, लेकिन जब तक अंतर-सामुदायिक विश्वास नहीं बनता, तब तक टिकाऊ आर्थिक गतिविधि की वापसी संदिग्ध रहेगी। मेडिकल कॉलेज और सड़क निर्माण की घोषणाएँ सकारात्मक हैं, पर असली सवाल यह है कि इन्हें लागू करने के लिए सुरक्षित माहौल कब बनेगा।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर हिंसा के कारण कितना जीएसटी राजस्व नुकसान हुआ?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, 3 मई 2023 से शुरू हुई जातीय हिंसा के कारण 2023 से 2026 के बीच जीएसटी संग्रह में लगभग ₹1,200 करोड़ के राजस्व का नुकसान हुआ है। यह आँकड़ा लंबे समय तक चले बंद, नाकाबंदी और आर्थिक गतिविधियों के ठप होने का परिणाम है।
मणिपुर में हिंसा से आम जनता पर क्या असर पड़ा?
बंद और नाकाबंदी के कारण राज्य भर में दिहाड़ी मजदूरों और छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। इंफाल-गुवाहाटी राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित होने से आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति और आवागमन भी गंभीर रूप से प्रभावित हुआ।
मणिपुर-गुवाहाटी राजमार्ग पर आवागमन कैसे बहाल हुआ?
सेनापति जिले के मरम, तादुबी और माओ के लोगों के सहयोग से नागालैंड के दीमापुर होते हुए इंफाल को गुवाहाटी से जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्री बसों और अन्य वाहनों की निर्बाध आवाजाही बहाल हुई। मुख्यमंत्री ने इसे आर्थिक पुनरुद्धार का अहम कदम बताया।
मणिपुर में सेनापति जिले के लिए क्या विकास घोषणाएँ हुईं?
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि सेनापति जिले में एक नया मेडिकल कॉलेज स्थापित किया जाएगा, जैसाकि पहले चुराचंदपुर जिले में किया गया था। इसके अलावा प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में अंतर-ग्राम सड़कों के निर्माण के लिए ₹10 करोड़ आवंटित किए गए हैं।
मणिपुर में सांप्रदायिक सौहार्द बहाल करने के लिए सरकार क्या कर रही है?
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने मैतेई, नागा और कुकी समुदायों से संवाद और आपसी समझ के माध्यम से मतभेद सुलझाने की अपील की है। उन्होंने लोगों से खुद को पहले भारतीय और फिर मणिपुरी के रूप में पहचानने का आह्वान किया, और मणिपुर-बर्मा युद्ध की ऐतिहासिक एकता का उदाहरण दिया।
राष्ट्र प्रेस
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