मणिपुर में बंद और नाकेबंदी से अर्थव्यवस्था पर गहरी चोट: मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह
सारांश
मुख्य बातें
मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने 7 अगस्त 2026 को इंफाल में स्पष्ट रूप से कहा कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर जारी बंद, नाकेबंदी और विरोध-प्रदर्शनों ने मणिपुर के साथ-साथ राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था को भी गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोगों और जरूरी सामान की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करना अब सर्वोच्च प्राथमिकता है।
सेमिनार का संदर्भ और मुख्यमंत्री का संबोधन
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह राज्य के गृह विभाग और मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित दो दिवसीय सलाह-मशविरा बैठक एवं सेमिनार का उद्घाटन कर रहे थे। यह सेमिनार मणिपुर की जनसांख्यिकीय प्रोफाइल पर केंद्रित था। उन्होंने कहा कि चल रही नाकेबंदी से राज्य में जरूरी सामान पहुँचाने वाले ट्रक चालक राष्ट्रीय राजमार्गों पर फँसे हुए हैं और गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
दिहाड़ी मजदूरों पर सबसे गहरी मार
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि इन विरोध-प्रदर्शनों की सबसे बड़ी कीमत दिहाड़ी मजदूर चुका रहे हैं, जिनकी आजीविका सीधे तौर पर रोज़ की आवाजाही और व्यापार पर निर्भर करती है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर पहले से ही लंबे समय से जारी जातीय तनाव के कारण आर्थिक दबाव में है। उन्होंने राज्य सरकार की ओर से भरोसा दिलाया कि सरकार आम जनता के हित में उठाए जाने वाले हर कदम में सहयोग के लिए तत्पर है।
एनआरसी और जनसांख्यिकीय बदलाव पर गृह मंत्री की बात
सेमिनार में गृह मंत्री कोंथौजम गोविंदस सिंह ने महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि मणिपुर सरकार केंद्र सरकार को पहले ही सूचित कर चुकी है कि वह राज्य में संवैधानिक एवं कानूनी ढाँचे के अंतर्गत राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) की प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने देश में जनसांख्यिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए एक उच्च-स्तरीय समिति पहले ही गठित कर दी है।
संविधान के दायरे में रहने की अपील
मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने जनता से आग्रह किया कि सभी सुझाव और प्रस्ताव भारत के संविधान के नियमों के दायरे में ही होने चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे ऐसे किसी भी आंदोलन से बचें जो नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी में व्यवधान उत्पन्न करे। गृह मंत्री गोविंदस सिंह ने भी कहा कि राजनीतिक या वैचारिक मतभेदों से ऊपर उठकर सभी को राज्य के मूल निवासियों की समस्याओं के समाधान के लिए एकजुट होना चाहिए।
सेमिनार में प्रमुख उपस्थिति
उद्घाटन समारोह में कमिश्नर (गृह) एन. अशोक कुमार, राज्य जनसंख्या कमिश्नर एम. मणिमोहन मेइतेई, मणिपुर राज्य जनसंख्या आयोग के सचिव डॉ. एम. वेटो सिंह, विभिन्न सिविल सोसाइटी संगठनों के प्रतिनिधि, सामुदायिक नेता, महिला नेता, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और गृह विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। सेमिनार के निष्कर्ष और सुझाव आने वाले समय में राज्य की जनसांख्यिकीय नीति को दिशा देने में अहम भूमिका निभाएँगे।