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मणिपुर CM खेमचंद सिंह का खुलासा: जातीय संघर्ष से ₹1,200 करोड़ से अधिक GST राजस्व का नुकसान

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मणिपुर CM खेमचंद सिंह का खुलासा: जातीय संघर्ष से ₹1,200 करोड़ से अधिक GST राजस्व का नुकसान

सारांश

तीन साल से जल रहे मणिपुर की आग की कीमत अब सरकारी आँकड़ों में दिखने लगी है — मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने माना कि जातीय संघर्ष ने ₹1,200 करोड़ से अधिक GST राजस्व स्वाहा कर दिया। यह सिर्फ एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उस खामोश आर्थिक तबाही की आवाज़ है जो सुर्खियों से परे चल रही है।

मुख्य बातें

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने कहा — जातीय संघर्ष से 2023 से 2026 के बीच ₹1,200 करोड़ से अधिक GST राजस्व का नुकसान हुआ।
CM ने सभी नागरिक समाज संगठनों से बंद और नाकेबंदी से परहेज़ की अपील की।
पत्रकारों की मासिक पेंशन ₹8,000 से ₹10,000 और पारिवारिक पेंशन ₹5,000 से ₹7,000 करने की घोषणा।
संघर्षकाल में पेंशन योगदान न कर पाने वाले पत्रकारों को खाता पुनः चालू करने की एकमुश्त छूट ।
₹1 करोड़ के लंबित विज्ञापन बिलों का भुगतान; 25 सितंबर 2026 को फॉलो-अप बैठक निर्धारित।
सभी प्रस्ताव कैबिनेट बैठक में विचारार्थ रखे जाएँगे।

मणिपुर के मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने बुधवार, 16 सितंबर 2026 को स्वीकार किया कि राज्य में 2023 से 2026 के बीच जारी जातीय संघर्ष के चलते जीएसटी राजस्व में ₹1,200 करोड़ से अधिक की क्षति हुई है, जिसने मणिपुर की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है। यह खुलासा इंफाल के मणिपुर प्रेस क्लब में 'ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन' (AMWJU) के 52वें स्थापना दिवस समारोह में हुआ।

जातीय संघर्ष की आर्थिक कीमत

मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह ने कहा कि लगातार बंद और नाकेबंदी ने राज्य की व्यावसायिक गतिविधियों को गंभीर रूप से बाधित किया है। उन्होंने राज्य के सभी नागरिक समाज संगठनों (CSO) से सीधी अपील की कि वे इस तरह के विरोध के तरीकों से बाज आएं, क्योंकि इनका खामियाजा अंततः आम नागरिकों और विकास को भुगतना पड़ता है। यह ऐसे समय में आया है जब मणिपुर तीन वर्षों से अधिक समय से जातीय हिंसा की आग में झुलस रहा है और राज्य के पुनर्निर्माण की जरूरत सबसे ज़रूरी बन गई है।

पत्रकारों के लिए बड़ी राहत

समारोह में मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के हित में कई अहम घोषणाएँ कीं। उन्होंने बताया कि पत्रकारों की मासिक पेंशन ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 की जाएगी, जबकि पारिवारिक पेंशन ₹5,000 से ₹7,000 प्रति माह कर दी जाएगी। इसके अलावा, संघर्ष काल में जो पत्रकार सूचना और जनसंपर्क निदेशालय (DIPR) की पेंशन योजना में अंशदान नहीं कर पाए, उन्हें अपने खाते पुनः सक्रिय करने के लिए एकमुश्त छूट दी जाएगी।

लंबित विज्ञापन बिलों का निपटारा

खेमचंद सिंह ने बताया कि मीडिया संस्थानों के लगभग ₹1 करोड़ के लंबित विज्ञापन बिल चुका दिए गए हैं। उन्होंने आगे कहा कि इस मामले पर विस्तृत चर्चा के लिए 25 सितंबर 2026 को सभी विभागों के प्रमुखों के साथ एक फॉलो-अप बैठक आयोजित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि पेंशन वृद्धि और छूट के प्रस्तावों को कैबिनेट बैठक में विचारार्थ रखा जाएगा।

समारोह में उपस्थित प्रमुख व्यक्तित्व

इस अवसर पर विधायक खोंगबंतबम इबोमचा, सचिव (आईपीआर) नीता आरामबम, निदेशक चरणजीत सिंह, एडिटर्स गिल्ड मणिपुर के अध्यक्ष खोगेंद्र खोमद्रम और AMWJU के अध्यक्ष असेम भक्ता सिंह समेत वरिष्ठ अधिकारी और पत्रकार उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने दिवंगत पत्रकारों की स्मृति में AMWJU के स्मारक पत्थर पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।

आगे की राह

गौरतलब है कि मणिपुर में मई 2023 से भड़की जातीय हिंसा ने राज्य के सामाजिक ताने-बाने के साथ-साथ आर्थिक ढाँचे को भी बुरी तरह प्रभावित किया है। ₹1,200 करोड़ से अधिक के GST नुकसान का यह आँकड़ा बताता है कि शांति बहाली केवल मानवीय दायित्व नहीं, बल्कि राज्य की आर्थिक बाध्यता भी है। मुख्यमंत्री का यह संबोधन राज्य सरकार की उस कोशिश का हिस्सा लगता है जिसमें नागरिक समाज को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

200 करोड़ का GST नुकसान स्वीकारना एक असाधारण स्वीकारोक्ति है — यह पहली बार है कि राज्य सरकार ने सार्वजनिक रूप से हिंसा की आर्थिक कीमत को इस तरह क्वांटिफाई किया है। लेकिन असली सवाल यह है कि यह घोषणा नागरिक समाज को वार्ता की मेज पर लाने की कोशिश है या केवल दबाव बनाने की रणनीति। पत्रकार पेंशन वृद्धि जैसी घोषणाएँ स्वागत योग्य हैं, परंतु जब तक घाटी और पहाड़ी समुदायों के बीच की बुनियादी दरार नहीं पाटी जाती, ये राहत उपाय लक्षण का इलाज करते हैं, बीमारी का नहीं। मणिपुर को अभी भी एक ठोस शांति रोडमैप और केंद्र-राज्य समन्वय की सख्त ज़रूरत है।
RashtraPress
17 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मणिपुर में जातीय संघर्ष से कितना GST राजस्व नुकसान हुआ?
मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह के अनुसार, 2023 से 2026 के बीच जातीय संघर्ष के कारण मणिपुर को ₹1,200 करोड़ से अधिक के GST राजस्व का नुकसान हुआ है। बंद और नाकेबंदी के कारण व्यावसायिक गतिविधियाँ ठप रहने से यह घाटा हुआ।
मणिपुर के मुख्यमंत्री ने पत्रकारों के लिए क्या घोषणाएँ कीं?
CM खेमचंद सिंह ने पत्रकारों की मासिक पेंशन ₹8,000 से बढ़ाकर ₹10,000 और पारिवारिक पेंशन ₹5,000 से ₹7,000 करने की घोषणा की। संघर्षकाल में पेंशन योगदान न कर पाने वाले पत्रकारों को खाता पुनः चालू करने की एकमुश्त छूट भी दी जाएगी — ये सभी प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए रखे जाएँगे।
मणिपुर में बंद और नाकेबंदी का आर्थिक प्रभाव क्या रहा है?
मुख्यमंत्री के अनुसार, लगातार बंद और नाकेबंदी ने राज्य की व्यावसायिक और आर्थिक गतिविधियों को गंभीर नुकसान पहुँचाया है, जिसका सीधा असर GST संग्रह पर पड़ा। उन्होंने नागरिक समाज संगठनों से अपील की है कि वे इन तरीकों से बाज आएं और आर्थिक पुनर्निर्माण में सहयोग करें।
मणिपुर के लंबित विज्ञापन बिलों का क्या हुआ?
CM खेमचंद सिंह ने बताया कि लगभग ₹1 करोड़ के लंबित विज्ञापन बिलों का भुगतान कर दिया गया है। इस विषय पर आगे की चर्चा के लिए 25 सितंबर 2026 को सभी विभागों के प्रमुखों के साथ बैठक निर्धारित की गई है।
AMWJU का 52वाँ स्थापना दिवस समारोह कहाँ हुआ?
'ऑल मणिपुर वर्किंग जर्नलिस्ट्स यूनियन' (AMWJU) का 52वाँ स्थापना दिवस इंफाल स्थित मणिपुर प्रेस क्लब में आयोजित हुआ। इस समारोह में मुख्यमंत्री खेमचंद सिंह, विधायक, वरिष्ठ अधिकारी और पत्रकार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
राष्ट्र प्रेस
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