काला जठेड़ी को द्वारका कोर्ट की 7 घंटे की कस्टडी पैरोल, 20 सितंबर को जुड़वां बेटियों का धार्मिक समारोह
सारांश
मुख्य बातें
गैंगस्टर संदीप उर्फ काला जठेड़ी को द्वारका कोर्ट ने मानवीय आधार पर 7 घंटे की कस्टडी पैरोल मंजूर की है, जिसके तहत वह 20 सितंबर 2026 को सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे के बीच पुलिस हिरासत में हरियाणा के सोनीपत जिले स्थित अपने गाँव जठेड़ी जा सकेगा। अदालत ने यह अनुमति उसकी आईवीएफ (IVF) प्रक्रिया द्वारा जन्मी जुड़वां बेटियों के अवसर पर आयोजित होने वाले धार्मिक समारोहों में शामिल होने के लिए दी है।
अदालत का आदेश और व्यवस्था
कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और हरियाणा पुलिस दोनों को पैरोल अवधि के दौरान सुरक्षा एवं आवश्यक प्रबंध सुनिश्चित करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया है कि 7 घंटे की निर्धारित अवधि समाप्त होते ही काला जठेड़ी को वापस दिल्ली की सेंट्रल जेल लाया जाएगा, जहाँ वह इस समय बंद है।
पूर्व में भी मिल चुकी है कस्टडी पैरोल
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब काला जठेड़ी को अदालत ने इस तरह की राहत दी हो। 30 जून 2026 को रोहिणी कोर्ट ने भी मानवीय आधार पर उसे 4 घंटे की कस्टडी पैरोल दी थी, ताकि वह अपनी पत्नी और नवजात जुड़वां बेटियों से मुलाकात कर सके। उस समय अदालत ने अस्पताल के रिकॉर्ड और मेडिकल दस्तावेज़ों की जाँच के बाद बच्चों के जन्म की पुष्टि होने पर यह राहत दी थी।
इससे भी पहले, 12 मार्च 2024 को काला जठेड़ी ने 'लेडी डॉन' के नाम से जानी जाने वाली अनुराधा चौधरी से विवाह किया था। उस विवाह समारोह में शामिल होने के लिए भी उसे अदालत से कस्टडी पैरोल प्राप्त हुई थी और सुरक्षा के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे।
परिवार और जुड़वां बेटियों का विवरण
काला जठेड़ी की पत्नी अनुराधा चौधरी ने आईवीएफ (इन विट्रो फर्टिलाइजेशन) प्रक्रिया के माध्यम से जुड़वां बेटियों को जन्म दिया था। प्रसव के दौरान स्वास्थ्य स्थिति बिगड़ने पर सी-सेक्शन के जरिए डिलीवरी करानी पड़ी थी। अब इन्हीं जुड़वां बेटियों से संबंधित धार्मिक रस्मों में शामिल होने के लिए यह ताज़ा पैरोल दी गई है।
काला जठेड़ी की आपराधिक पृष्ठभूमि
हरियाणा के सोनीपत जिले के जठेड़ी गाँव के मूल निवासी काला जठेड़ी के खिलाफ दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में हत्या, रंगदारी, फिरौती और ज़मीन कब्जाने सहित 30 से अधिक गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। यह ऐसे समय में आया है जब कई राज्यों में संगठित अपराध पर नकेल कसने के प्रयास तेज़ हैं और गैंगस्टरों को दी जाने वाली अदालती सुविधाओं पर सार्वजनिक बहस जारी है।
अदालत के मानवीय दृष्टिकोण और कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच, काला जठेड़ी 20 सितंबर को परिवार के साथ यह धार्मिक अनुष्ठान पूरा करेगा — और शाम तक वापस जेल की सलाखों के पीछे होगा।