यूएनएससी में भारत का बयान: भारत-अफगान संबंध नक्शों और सीमाओं से भी पुराने, 500+ विकास परियोजनाएँ जारी
सारांश
मुख्य बातें
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की 16 सितंबर 2026 की बैठक में अफगानिस्तान की राजनीतिक, मानवीय, सुरक्षा और मानवाधिकार स्थिति पर गहन विचार-विमर्श हुआ। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पार्वथनेनी हरीश ने भारत का पक्ष रखते हुए कहा कि भारतीयों और अफगानों के बीच के संबंध आधुनिक नक्शों और सीमाओं से भी कहीं पुराने हैं। इस संबोधन में भारत ने अफगानिस्तान में अपनी सक्रिय विकास भागीदारी और मानवीय सहायता का ब्यौरा भी प्रस्तुत किया।
ऐतिहासिक बंधन और भारत की नीति का आधार
पार्वथनेनी हरीश ने यूएनएससी में कहा कि काबुल से हिंदुस्तान के मैदानी इलाकों तक जाने वाली सड़कें केवल व्यापार के मार्ग नहीं थीं — वे विचारों, ज्ञान, विश्वास और आस्था के गलियारे भी थे। सदियों में कई साम्राज्य उभरे और मिट गए, किंतु दोनों देशों के लोगों के बीच दोस्ती और भाईचारे का धागा कभी नहीं टूटा।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यही भावना अफगानिस्तान के प्रति भारत की नीति का मूल आधार है — शांति, स्थिरता और समृद्धि के पक्ष में, जो देश के दीर्घकालिक विकास में सहायक हो। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस दृढ़ विश्वास को भी दोहराया कि एक शांतिपूर्ण और सुरक्षित यूरेशिया की साझा आकांक्षा, अफगानिस्तान में स्थिरता से गहराई से जुड़ी है।
500 से अधिक विकास परियोजनाएँ और द्विपक्षीय भागीदारी
भारत इस समय अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक विकास साझेदारी परियोजनाओं के माध्यम से योगदान दे रहा है। दोहा वर्किंग ग्रुप की बैठकों में भारत की भागीदारी और क्षेत्रीय पहलों में उसके प्रयास इस प्रतिबद्धता के ठोस प्रमाण हैं।
हाल के महीनों में अफगान मंत्रियों के भारत दौरे के बाद मानवीय सहायता, स्वास्थ्य सेवा, खाद्य सुरक्षा, क्षमता-निर्माण, नशीले पदार्थों की रोकथाम, खेल, शिक्षा, व्यापार और कनेक्टिविटी जैसे विविध क्षेत्रों में सहयोग पर बातचीत संभव हो पाई है। यह सब 4.8 करोड़ से अधिक अफगान नागरिकों की बेहतरी के लिए है, जो पिछले पाँच वर्षों से गंभीर कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
स्वास्थ्य संकट और भारत की मानवीय मदद
यूएन महासचिव की रिपोर्ट के अनुसार अफगानिस्तान की कमज़ोर सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली के चलते इस वर्ष की पहली छमाही में 150 स्वास्थ्य केंद्र बंद हो गए हैं। इस गंभीर परिस्थिति में भारत ने पिछली तिमाही में बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम के लिए 33 टन वैक्सीन और संबंधित सामग्री भेजी।
इसके अतिरिक्त, भारत ने अफगान स्वास्थ्य अधिकारियों को विशेष चिकित्सा उपकरण उपलब्ध कराए हैं, जिनमें नवजात और बाल देखभाल के उपकरण, कार्डियोग्राफ मशीन, वेंटिलेटर, पेशेंट मॉनिटर, इलेक्ट्रोकॉटरी उपकरण, प्लास्टिक सर्जरी सेट और विशेष मेडिकल किट शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और अफगान रेड क्रिसेंट सोसाइटी के साथ मिलकर यह सहायता उन तक पहुँचाई जा रही है जिन्हें इसकी सर्वाधिक ज़रूरत है।
क्षेत्रीय स्थिरता और आगे की राह
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब अंतरराष्ट्रीय समुदाय अफगानिस्तान में तालिबान शासन के तहत मानवाधिकारों — विशेषकर महिलाओं और लड़कियों की शिक्षा के अधिकार — को लेकर गहरी चिंता जता रहा है। भारत की नीति कथित तौर पर 'जन-केंद्रित' रही है, जो तालिबान की वैधता को मान्यता दिए बिना अफगान नागरिकों तक सहायता पहुँचाने पर केंद्रित है।
आलोचकों का कहना है कि अफगानिस्तान में बंद होते स्वास्थ्य केंद्र और मानवीय संकट की गहराती खाई के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय की सामूहिक प्रतिक्रिया अभी भी अपर्याप्त है। भारत की यह पहल संकेत देती है कि नई दिल्ली इस क्षेत्र में अपनी रणनीतिक उपस्थिति और मानवीय भूमिका दोनों को बनाए रखने के प्रति प्रतिबद्ध है।