भारत ने अफगानिस्तान को भेजी 5 टन जरूरी दवाओं की खेप, विदेश मंत्रालय ने की पुष्टि
सारांश
मुख्य बातें
भारत सरकार ने 17 जून 2026 को अफगानिस्तान के लिए 5 टन आवश्यक दवाओं की एक नई खेप रवाना की, जो अफगान जनता को निरंतर मानवीय सहायता देने की भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय ने इस कदम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए कहा कि यह सहायता अफगानिस्तान की तत्काल चिकित्सा ज़रूरतों को पूरा करने के उद्देश्य से भेजी गई है।
विदेश मंत्रालय का बयान
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस खेप की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'भारत ने 5 टन जरूरी दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी है। इस तरह हमने अफगान जनता के कल्याण और मानवीय सहायता पहुँचाने की अपनी अटूट प्रतिबद्धता सुनिश्चित की है।' यह बयान भारत की उस नीति को रेखांकित करता है जिसके तहत वह राजनयिक जटिलताओं के बावजूद अफगान नागरिकों तक सहायता पहुँचाता रहा है।
मानवीय सहयोग की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि यह खेप भारत की अफगानिस्तान को दी जाने वाली सहायता की एक लंबी श्रृंखला की कड़ी है। अप्रैल 2026 में भारत ने टीबी उन्मूलन कार्यक्रम को बल देने के लिए 13 टन बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और संबंधित सामग्री की खेप भेजी थी, जिसकी पुष्टि विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर की थी।
इसी वर्ष 5 अप्रैल को बाढ़ और भूकंप से प्रभावित अफगानिस्तान में मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री (एचएडीआर) पहुँचाई गई थी। इससे पहले मार्च 2026 में भारत ने 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल, किट और उपकरण अफगानिस्तान को भेजे थे। यह सहायता काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले 'ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल' पर हुए पाकिस्तानी हमले में घायल हुए लोगों के लिए दी गई थी, जिसमें 400 से अधिक लोगों की मौत और 250 से ज़्यादा लोग घायल हुए थे।
द्विपक्षीय संबंधों की दिशा
नवंबर 2025 में नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच हुई बैठक में व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत बनाने पर विचार-विमर्श हुआ था। बैठक के बाद जयशंकर ने स्पष्ट किया था कि भारत अफगान जनता के विकास और कल्याण के लिए अपना समर्थन जारी रखेगा।
यह ऐसे समय में आया है जब अफगानिस्तान में तालिबान शासन के बाद अंतरराष्ट्रीय सहायता में उल्लेखनीय कमी आई है और देश की स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर दबाव में है। भारत का यह कदम क्षेत्रीय कूटनीति में उसकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
भूकंप प्रभावित क्षेत्रों में सहायता
इससे पूर्व 2025 में अफगानिस्तान के बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भी भारत ने प्रभावित परिवारों के लिए खाद्यान्न और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई थी। आलोचकों का कहना है कि इस तरह की सहायता सराहनीय होते हुए भी दीर्घकालिक स्वास्थ्य ढाँचे के पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त नहीं है।
आगे की राह
भारत की यह निरंतर सहायता संकेत देती है कि नई दिल्ली, काबुल के साथ अपने संबंधों को मानवीय आधार पर आगे बढ़ाने को प्राथमिकता दे रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, दवाओं और टीकों जैसी बुनियादी सहायता अफगानिस्तान में भारत की कूटनीतिक उपस्थिति बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है।