भारत ने काबुल के सरकारी अस्पताल को दवाइयाँ और मेडिकल सामान सौंपा, मानवीय सहायता जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत ने गुरुवार, 20 अगस्त को काबुल के एक सरकारी अस्पताल को दवाइयों और मेडिकल उपकरणों की एक नई खेप सौंपी, जो अफगानिस्तान के प्रति भारत की निरंतर मानवीय प्रतिबद्धता का हिस्सा है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए इस कदम की पुष्टि की।
मुख्य घटनाक्रम
विदेश मंत्रालय ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'अफगानिस्तान के लोगों के साथ अपने लंबे और भरोसेमंद स्वास्थ्य सहयोग को आगे बढ़ाते हुए भारत ने काबुल के एक सरकारी अस्पताल को दवाइयाँ और मेडिकल सामान उपलब्ध कराया है।' यह सहायता भारत की उस व्यापक नीति का हिस्सा है जिसके तहत वह अफगानिस्तान को स्वास्थ्य, राहत और विकास के क्षेत्रों में सहयोग देता रहा है।
सरकार की प्रतिक्रिया
इस सप्ताह की शुरुआत में नई दिल्ली में आयोजित एक प्रेस ब्रीफिंग में विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, 'भारत और अफगान लोगों के बीच लंबे समय से गहरे संबंध रहे हैं। पिछले एक साल में अफगानिस्तान के साथ हमारा जुड़ाव और मज़बूत हुआ है। इसमें कूटनीतिक स्तर पर बातचीत, मानवीय सहायता और विकास सहयोग कार्यक्रम शामिल हैं। आगे भी अफगानिस्तान के साथ हमारे संबंध और सहयोग इन्हीं प्राथमिकताओं के आधार पर आगे बढ़ते रहेंगे।'
पिछले कुछ महीनों की सहायता का ब्यौरा
गौरतलब है कि यह कोई एकल घटना नहीं है — भारत पिछले कई महीनों से लगातार अफगानिस्तान को सहायता पहुँचाता रहा है। पिछले महीने भारत ने नूरिस्तान में आई विनाशकारी बाढ़ से प्रभावित लोगों की मदद के लिए अफगानिस्तान की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) को खाद्य सामग्री और पारिवारिक टेंट सहित राहत सामग्री भेजी थी।
विदेश मंत्रालय ने उस समय एक्स पर लिखा था, 'इस कठिन समय में भारत अफगानिस्तान की जनता के साथ खड़ा है।' इससे पहले जून में भारत ने काबुल को पाँच टन आवश्यक दवाइयाँ भेजी थीं।
22 मई को भारत ने काबुल को 20 टन बैसिलस कैलमेट-गुएरिन (BCG) और टेटनस एवं डिप्थीरिया (TD) वैक्सीन से जुड़ी ज़रूरी सामग्री भेजी थी, ताकि अफगान बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मज़बूती मिल सके।
आम जनता पर असर
यह सहायता ऐसे समय में आई है जब अफगानिस्तान की स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर संकट में है। अंतरराष्ट्रीय फंडिंग में कमी और राजनीतिक अस्थिरता के बीच भारत की यह आपूर्ति सीधे तौर पर अफगान नागरिकों — विशेषकर बच्चों और बीमार लोगों — तक पहुँच रही है।
क्या होगा आगे
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता जायसवाल के बयान के अनुसार, भारत आने वाले समय में भी कूटनीतिक संवाद, मानवीय सहायता और विकास सहयोग को प्राथमिकता देता रहेगा। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण है जब दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय कूटनीति की दिशा तेज़ी से बदल रही है।