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भारत ने अफगानिस्तान को फिर भेजी जीवन रक्षक दवाएं, काबुल सरकारी अस्पताल को मिली खेप

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भारत ने अफगानिस्तान को फिर भेजी जीवन रक्षक दवाएं, काबुल सरकारी अस्पताल को मिली खेप

सारांश

भारत ने एक बार फिर अफगानिस्तान के काबुल सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा सामग्री भेजी है। MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर इसकी पुष्टि की। मई से सितंबर 2026 के बीच भारत 20 टन वैक्सीन सामग्री, 16 मीट्रिक टन दवाएं और कई अन्य खेपें भेज चुका है।

मुख्य बातें

विदेश मंत्रालय ने 27 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि काबुल सरकारी अस्पताल के लिए जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा सामग्री की नई खेप पहुँची।
सितंबर की शुरुआत में मलेरिया, डेंगू और वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए 16 मीट्रिक टन से अधिक दवाओं और डायग्नोस्टिक किट्स की खेप भेजी गई थी।
20 अगस्त को काबुल के सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाइयाँ व चिकित्सा सामग्री सौंपी गई थी।
22 मई को 20 टन BCG और TD वैक्सीन सामग्री भेजी गई, जिससे अफगान बच्चों का टीकाकरण कार्यक्रम मज़बूत हुआ।
MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि अफगान लोगों के लिए स्वास्थ्य सहायता भारत की प्राथमिकता है।

भारत के विदेश मंत्रालय (MEA) ने 27 सितंबर 2026 को पुष्टि की कि अफगानिस्तान के लिए एक और मानवीय सहायता खेप काबुल पहुँच गई है, जिसमें शहर के सरकारी अस्पताल के लिए जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा सामग्री शामिल हैं। यह खेप अफगानिस्तान को भारत की लगातार जारी मानवीय सहायता की कड़ी में नवीनतम है।

विदेश मंत्रालय का बयान

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इस खेप की जानकारी साझा की। उन्होंने लिखा, 'भारत से एक और खेप काबुल पहुँच गई है, जिसमें शहर के सरकारी अस्पताल के लिए जीवन रक्षक दवाएं और मेडिकल सामग्री शामिल हैं। अफगान लोगों के लिए भारत की मानवीय सहायता में स्वास्थ्य सेवाएं हमेशा से अहम रही हैं।'

पिछले कुछ महीनों में भेजी गई खेपों का विवरण

पिछले कुछ महीनों में भारत ने अफगानिस्तान को कई महत्वपूर्ण खेपें भेजी हैं। 20 अगस्त को काबुल के एक सरकारी अस्पताल को जीवन रक्षक दवाइयों और चिकित्सा सामग्री की खेप सौंपी गई थी। सितंबर के शुरुआती दिनों में मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए 16 मीट्रिक टन से अधिक दवाओं और डायग्नोस्टिक किट्स की बड़ी खेप अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई थी।

जून में भी भारत ने काबुल को पाँच टन आवश्यक दवाइयाँ भेजी थीं। इससे पहले 22 मई को भारत ने काबुल को 20 टन बेसिलस कैलमेट-गुएरिन (BCG) और टेटनस एवं डिप्थीरिया (TD) वैक्सीन से जुड़ी ज़रूरी सामग्री भेजी थी, ताकि अफगान बच्चों के टीकाकरण कार्यक्रम को मज़बूती मिल सके।

भारत-अफगानिस्तान संबंध और मानवीय उद्देश्य

विदेश मंत्रालय ने विभिन्न प्रेस वार्ताओं में स्पष्ट किया है कि इस मानवीय सहायता का उद्देश्य अफगानिस्तान में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करना, बीमारियों की रोकथाम करना और वहाँ के आम नागरिकों तक सहायता पहुँचाना है। मंत्रालय के अनुसार, पिछले एक वर्ष में अफगानिस्तान के साथ भारत का जुड़ाव और मज़बूत हुआ है, जिसमें कूटनीतिक संवाद, मानवीय सहायता और विकास सहयोग कार्यक्रम शामिल हैं।

गौरतलब है कि यह सहायता ऐसे समय में जारी है जब अफगानिस्तान की स्वास्थ्य प्रणाली गंभीर दबाव में है और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता लगातार बनी हुई है।

आगे की राह

विदेश मंत्रालय ने संकेत दिया है कि अफगानिस्तान के साथ सहयोग इन्हीं प्राथमिकताओं — स्वास्थ्य, मानवीय सहायता और विकास — के आधार पर आगे भी जारी रहेगा। भारत की यह निरंतर पहल दर्शाती है कि द्विपक्षीय संबंध व्यावहारिक धरातल पर मज़बूती से बने हुए हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सुविचारित कूटनीतिक रणनीति भी है — ऐसे देश में उपस्थिति और विश्वास बनाए रखने की, जहाँ पाकिस्तान और चीन भी अपना प्रभाव बढ़ाने में लगे हैं। गौरतलब है कि तालिबान शासन के साथ भारत के औपचारिक राजनयिक संबंध सीमित हैं, फिर भी स्वास्थ्य सहायता के ज़रिए ज़मीनी जुड़ाव बरकरार है। असली सवाल यह है कि क्या यह सहायता अफगान नागरिकों तक पारदर्शी तरीके से पहुँच रही है और इसकी स्वतंत्र निगरानी हो रही है — जो अब तक सार्वजनिक रूप से स्पष्ट नहीं है।
RashtraPress
27 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत ने अफगानिस्तान को क्या सहायता भेजी है?
भारत ने 27 सितंबर 2026 को काबुल के सरकारी अस्पताल के लिए जीवन रक्षक दवाएं और चिकित्सा सामग्री की एक नई खेप भेजी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक्स पर इसकी पुष्टि की।
पिछले कुछ महीनों में भारत ने अफगानिस्तान को कितनी सहायता दी है?
मई से सितंबर 2026 के बीच भारत ने कई खेपें भेजी हैं — 22 मई को 20 टन BCG और TD वैक्सीन सामग्री, जून में 5 टन दवाएं, 20 अगस्त को जीवन रक्षक दवाइयाँ, और सितंबर के शुरू में 16 मीट्रिक टन से अधिक दवाएं और डायग्नोस्टिक किट्स।
भारत अफगानिस्तान को यह सहायता क्यों भेज रहा है?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस मानवीय सहायता का उद्देश्य अफगानिस्तान की स्वास्थ्य सेवाओं को मज़बूत करना, बीमारियों की रोकथाम करना और वहाँ के आम नागरिकों की मदद करना है। भारत अफगानिस्तान के साथ लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को इसी आधार पर आगे बढ़ा रहा है।
सितंबर में भेजी गई खेप में क्या-क्या शामिल था?
सितंबर के शुरुआती दिनों में मलेरिया, डेंगू और अन्य वेक्टर जनित रोगों से निपटने के लिए 16 मीट्रिक टन से अधिक दवाओं और डायग्नोस्टिक किट्स की खेप अफगानिस्तान के सार्वजनिक स्वास्थ्य मंत्रालय को भेजी गई थी।
भारत-अफगानिस्तान संबंध अभी किस स्तर पर हैं?
विदेश मंत्रालय के अनुसार पिछले एक वर्ष में अफगानिस्तान के साथ भारत का जुड़ाव मज़बूत हुआ है, जिसमें कूटनीतिक संवाद, मानवीय सहायता और विकास सहयोग शामिल हैं। दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंध काफी पुराने हैं और ये प्राथमिकताएं आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।
राष्ट्र प्रेस
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