4 अक्टूबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत-कनाडा CEPA वार्ता का 5वाँ दौर ओटावा में शुरू, 2026 तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत-कनाडा CEPA वार्ता का 5वाँ दौर ओटावा में शुरू, 2026 तक समझौते को अंतिम रूप देने का लक्ष्य

सारांश

भारत और कनाडा के बीच CEPA वार्ता का 5वाँ दौर ओटावा में शुरू हो गया है। पीएम मोदी का दिसंबर में कनाडा दौरा और 300 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल की नई दिल्ली यात्रा — दोनों इस बात के संकेत हैं कि 2030 तक ₹4.65 लाख करोड़ के व्यापार लक्ष्य को लेकर दोनों देश गंभीर हैं।

मुख्य बातें

भारत-कनाडा CEPA के लिए 5वें दौर की वार्ता सोमवार को ओटावा में शुरू हुई, जो 9 अक्टूबर 2026 तक चलेगी।
PM मोदी के दिसंबर 2026 में कनाडा दौरे के दौरान समझौते को अंतिम रूप देने की योजना।
कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस महीने 300 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली आएंगे।
2024-25 में भारत-कनाडा द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर ; भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर ।
दोनों देशों का लक्ष्य 2030 तक ₹4.65 लाख करोड़ (70 अरब कनाडाई डॉलर) का द्विपक्षीय व्यापार।
मार्च 2026 में मोदी-कार्नी शिखर बैठक के बाद भारत-कनाडा संबंधों में उल्लेखनीय सुधार।

भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) के लिए पाँचवें दौर की वार्ता सोमवार, 6 अक्टूबर 2026 को ओटावा में शुरू हो गई। दोनों देशों के मुख्य वार्ताकारों के नेतृत्व में यह पाँच दिवसीय दौर 9 अक्टूबर तक चलेगा और इसका मुख्य उद्देश्य 2026 के अंत तक व्यापार समझौते को अंतिम रूप देना है। यह वार्ता ऐसे समय में हो रही है जब दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध तेज़ी से पटरी पर आ रहे हैं।

वार्ता की पृष्ठभूमि और ताज़ा स्थिति

इस श्रृंखला का पिछला दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ था। अब ओटावा में जारी इस दौर में अधिकारी अंतिम समझौते की दिशा में ठोस प्रगति पर ज़ोर दे रहे हैं। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिसंबर के आसपास कनाडा का दौरा करने की संभावना है, जिसके दौरान दोनों पक्ष समझौते को पूर्ण करने की योजना बना रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, कनाडा के व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू इस महीने के अंत में 300 सदस्यीय व्यापार प्रतिनिधिमंडल के साथ नई दिल्ली का दौरा करने वाले हैं — जो दोनों देशों के व्यावसायिक संबंधों की गहराती गर्मजोशी का संकेत है।

मोदी-कार्नी शिखर बैठक का आधार

प्रधानमंत्री मोदी और कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने इस वर्ष मार्च में नई दिल्ली में हुई बैठक के दौरान CEPA वार्ता को 2026 के अंत तक पूरी करने का साझा लक्ष्य तय किया था। दोनों नेताओं ने ऊर्जा और महत्वपूर्ण खनिज क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गहरा करने पर भी सहमति जताई थी।

उनके शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त बयान में दोनों नेताओं ने विश्वास व्यक्त किया कि एक व्यापक व्यापार ढाँचा साझेदारी के लिए एक स्थायी आर्थिक आधार का काम करेगा। दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 70 अरब कनाडाई डॉलर (लगभग ₹4.65 लाख करोड़) तक पहुँचाने की साझा आकांक्षा भी ज़ाहिर की।

द्विपक्षीय व्यापार का मौजूदा आकार

2024-25 में भारत और कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा। इनमें कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर था। भारत के प्रमुख निर्यातों में फार्मास्युटिकल उत्पाद, मशीनरी के पुर्जे, लोहा और इस्पात, इलेक्ट्रॉनिक सामान, जैविक रसायन, आभूषण, रत्न एवं कीमती पत्थर, परिधान, समुद्री भोजन, इंजीनियरिंग सामान और ऑटो पार्ट्स शामिल हैं।

दूसरी ओर, कनाडा से भारत के प्रमुख आयातों में दालें, उर्वरक, खनिज ईंधन, लकड़ी का गूदा, रत्न और कीमती पत्थर, विमान के पुर्जे, मशीनरी तथा लोहा एवं एल्युमीनियम स्क्रैप शामिल हैं। भारत का IT सेक्टर सेवा निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता बना हुआ है।

राजनयिक संबंधों में सुधार की पृष्ठभूमि

यह वार्ता ऐसे दौर में हो रही है जब भारत-कनाडा संबंधों ने कूटनीतिक रूप से एक नई शुरुआत की है। पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए थे। आलोचकों का कहना है कि ट्रूडो सरकार ने अपनी चुनावी राजनीति के तहत कनाडा में सिख चरमपंथियों को भारत-विरोधी एजेंडा चलाने के लिए प्रोत्साहित किया था।

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की भारत यात्रा ने इस राजनयिक खिंचाव को समाप्त कर दोनों देशों के बीच संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने की नींव रखी। आगामी महीनों में दोनों देशों के लिए CEPA को अंतिम रूप देना न केवल व्यापारिक बल्कि रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

आईटी और कृषि-आयात जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में पर्याप्त बाज़ार पहुँच सुनिश्चित कर पाएंगे। मौजूदा व्यापार आँकड़े — मात्र 8.66 अरब डॉलर — 2030 के 70 अरब कनाडाई डॉलर के लक्ष्य से बेहद दूर हैं, और CEPA के बिना यह अंतर पाटना मुश्किल होगा। वार्ता की असली कसौटी समझौते पर हस्ताक्षर नहीं, बल्कि उसकी शर्तें होंगी।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत-कनाडा CEPA क्या है और यह क्यों महत्वपूर्ण है?
CEPA यानी व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौता (Comprehensive Economic Partnership Agreement) भारत और कनाडा के बीच प्रस्तावित एक व्यापक व्यापार ढाँचा है। इसका उद्देश्य दोनों देशों के बीच वस्तुओं, सेवाओं और निवेश पर शुल्क और बाधाएँ कम करना है, ताकि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार ₹4.65 लाख करोड़ तक पहुँचाया जा सके।
CEPA वार्ता का 5वाँ दौर कब और कहाँ हो रहा है?
5वें दौर की वार्ता 6 से 9 अक्टूबर 2026 के बीच कनाडा की राजधानी ओटावा में आयोजित हो रही है। इससे पहले 4वाँ दौर 18 सितंबर को नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ था।
PM मोदी की कनाडा यात्रा की क्या योजना है?
रिपोर्टों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर 2026 के आसपास कनाडा का दौरा कर सकते हैं। उस यात्रा के दौरान दोनों देश CEPA को अंतिम रूप देने की योजना बना रहे हैं।
भारत और कनाडा के बीच मौजूदा व्यापार की स्थिति कैसी है?
2024-25 में भारत-कनाडा के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार 8.66 अरब डॉलर रहा, जिसमें कनाडा को भारत का निर्यात 4.22 अरब डॉलर था। भारत का आईटी सेक्टर सेवा निर्यात में सबसे बड़ा योगदानकर्ता है।
भारत-कनाडा संबंध पहले क्यों बिगड़े थे और अब कैसे सुधरे?
पूर्व कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में दोनों देशों के रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँचे थे। आलोचकों के अनुसार, ट्रूडो सरकार ने अपनी चुनावी राजनीति के तहत भारत-विरोधी तत्वों को प्रोत्साहन दिया था। नए प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की मार्च 2026 में भारत यात्रा के बाद दोनों देशों के संबंधों में उल्लेखनीय सुधार आया है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 1 सप्ताह पहले
  3. 3 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 10 महीने पहले