भारत-कनाडा CEPA वार्ता का पाँचवाँ दौर पूरा, साल के अंत तक समझौते की कोशिश
सारांश
मुख्य बातें
भारत और कनाडा ने व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) को लेकर बातचीत में तेज़ी लाई है। ओटावा में 5 से 9 अक्टूबर 2026 तक हुए पाँचवें दौर की वार्ता के बाद दोनों देशों के मंत्रियों ने नई दिल्ली में मुलाकात कर प्रगति की समीक्षा की और साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने के इरादे से प्रयासों को और गति देने का फैसला किया। यह वार्ता ऐसे समय में और अहम हो गई है जब कनाडा अमेरिका पर अपनी व्यापारिक निर्भरता कम करने की कोशिशों में जुटा है।
मंत्रिस्तरीय बैठक और व्यापार मिशन
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने मंगलवार, 14 अक्टूबर 2026 को जारी एक आधिकारिक बयान में बताया कि कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने इस सप्ताह नई दिल्ली में भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। यह बैठक टीम कनाडा व्यापार मिशन के दौरान हुई, जिसके तहत एक बड़ा कनाडाई व्यापार प्रतिनिधिमंडल निवेश और साझेदारी के अवसर तलाशने के लिए मुंबई और बेंगलुरु पहुँचा है।
12 से 17 अक्टूबर 2026 तक चलने वाले इस मिशन में लगभग 300 प्रतिनिधि शामिल हैं। यह तीन दशकों से अधिक समय में भारत आने वाला कनाडा का सबसे बड़ा व्यापार प्रतिनिधिमंडल बताया जा रहा है। सिद्धू ने इस मिशन को सफल बनाने में सहयोग देने के लिए गोयल का आभार व्यक्त किया।
वार्ता की मौजूदा स्थिति
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, 'दोनों देश पारस्परिक रूप से लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए अपने प्रयासों को तेज़ कर रहे हैं।' हालाँकि, इस बयान में वार्ता दलों के बीच मौजूद मतभेदों का उल्लेख नहीं किया गया और न ही अगले दौर की तारीख घोषित की गई। यह मई 2025 के बाद से सिद्धू और गोयल के बीच हुई नौवीं मंत्रिस्तरीय बैठक थी। इससे पहले इस महीने मिल्वौकी में जी-20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान भी दोनों के बीच बातचीत हुई थी।
व्यापार के आँकड़े और रणनीतिक महत्त्व
कनाडा सरकार ने 2030 तक भारत के साथ वार्षिक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर $70 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। यह 2025 में दर्ज हुए $30.4 अरब डॉलर के व्यापार से दोगुने से भी अधिक होगा। 2025 में कनाडा से भारत को माल निर्यात $3.9 अरब डॉलर रहा — जिसमें सब्जियाँ, खनिज ईंधन और लकड़ी का गूदा प्रमुख रहे — जबकि भारत से आयात $9.7 अरब डॉलर तक पहुँचा, जिसमें कीमती पत्थर व धातुएँ, मशीनरी और औषधीय उत्पाद अग्रणी श्रेणियाँ थीं।
गौरतलब है कि यह CEPA वार्ता कनाडा की इंडो-पैसिफिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। ओटावा अमेरिका पर अपनी भारी व्यापारिक निर्भरता को कम करने के लिए भारत को एक प्रमुख वैकल्पिक बाज़ार के रूप में देख रहा है। कनाडाई कंपनियाँ विशेष रूप से ऊर्जा, महत्त्वपूर्ण खनिज, एयरोस्पेस, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और उन्नत विनिर्माण क्षेत्रों में अवसर तलाश रही हैं।
द्विपक्षीय संबंधों की पृष्ठभूमि
यह ताज़ा वार्ता नई दिल्ली और ओटावा के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनयिक तनाव के बाद संबंधों को पटरी पर लाने की व्यापक कूटनीतिक कोशिशों के बीच हो रही है। आर्थिक सहयोग इस पुनर्निर्माण-प्रक्रिया का एक केंद्रीय हिस्सा बन गया है, जिसमें दोनों सरकारें सुरक्षा और कानून प्रवर्तन पर बातचीत के साथ-साथ व्यापारिक संबंध मज़बूत करने को प्राथमिकता दे रही हैं।
भारत के नज़रिये से, एक व्यापक समझौते से कनाडाई बाज़ारों तक बेहतर पहुँच मिलने के साथ-साथ ऊर्जा, खनिज, प्रौद्योगिकी और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में सहयोग और गहरा हो सकता है।
आगे की राह
ओटावा में पाँचवें दौर से पहले चार दौर की बातचीत हो चुकी है, जिनका उद्देश्य मतभेदों को कम कर एक साझा ढाँचा तैयार करना था। अब तक अगले दौर की कोई तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन दोनों पक्षों की ओर से साल के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने की मंशा ज़ाहिर की गई है। व्यापार मिशन के नतीजे और मंत्रिस्तरीय बातचीत की गति आने वाले हफ्तों में यह तय करेगी कि यह महत्वाकाँक्षी समयसीमा व्यावहारिक है या नहीं।