भारत-कनाडा CEPA वार्ता का पाँचवाँ दौर ओटावा में शुरू, 2030 तक $70 अरब व्यापार का लक्ष्य
सारांश
मुख्य बातें
भारत और कनाडा के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए बातचीत का पाँचवाँ दौर 5 अक्टूबर 2026 को ओटावा में शुरू हो गया, जो 9 अक्टूबर तक जारी रहेगा। राजनयिक तनाव के एक लंबे दौर से बाहर निकलने के बाद दोनों देश अपने आर्थिक रिश्तों को नई ऊँचाई देने की दिशा में काम कर रहे हैं, और 2026 के अंत तक इस समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।
वार्ता की पृष्ठभूमि
यह नया दौर पिछले सप्ताह मिल्वौकी में आयोजित G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू के बीच हुई द्विपक्षीय बैठक के तुरंत बाद आया है। दोनों मंत्रियों ने वार्ता में अब तक हुई प्रगति की समीक्षा की और ओटावा में होने वाले इस दौर की रूपरेखा तय की।
गौरतलब है कि CEPA के चार दौर पहले ही पूरे हो चुके हैं और चौथा दौर 18 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में सम्पन्न हुआ था। वार्ताकार शेष मतभेदों को कम करने और वर्ष के अंत तक समझौते को अंतिम रूप देने के साझा लक्ष्य के साथ काम कर रहे हैं।
प्रमुख क्षेत्र और व्यापारिक आँकड़े
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल द्विपक्षीय व्यापार $30.4 अरब तक पहुँच गया। इसमें वस्तु व्यापार $13.6 अरब रहा, जिसमें भारत को कनाडा का निर्यात $3.9 अरब — जिसमें सब्ज़ियाँ, खनिज ईंधन, तेल और लकड़ी की लुगदी प्रमुख थे — और भारत से आयात $9.7 अरब — जिसमें कीमती पत्थर, धातुएँ, मशीनरी और दवाइयाँ शामिल थीं — रहा। सेवा क्षेत्र में कनाडा का निर्यात $15.2 अरब रहा, जिसमें शिक्षा से जुड़ी यात्रा का सबसे बड़ा हिस्सा था।
दोनों सरकारों ने ऊर्जा, ज़रूरी खनिजों, एयरोस्पेस और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे क्षेत्रों को गहरे सहयोग के लिए चिह्नित किया है। कनाडा ने खुद को भारत की बढ़ती ऊर्जा और खनिज ज़रूरतों के लिए एक दीर्घकालिक आपूर्तिकर्ता के रूप में पेश किया है।
मंत्री सिद्धू का बयान
पिछले महीने मुंबई में मंत्री गोयल से मुलाकात के बाद सिद्धू ने कहा था, 'मंत्री गोयल के साथ मेरी बातचीत एक ऐसे समझौते की दिशा में वास्तविक प्रगति कर रही है जो 2030 तक हमारे आपसी व्यापार को दोगुना करके $70 अरब तक पहुँचा देगा।' उन्होंने यह भी कहा, 'भारत की तेज़ी से होती तरक्की और ऊर्जा, ज़रूरी खनिजों, एयरोस्पेस, AI और अन्य क्षेत्रों में कनाडा की बढ़त का मतलब है कि हमारे व्यवसायों और कामगारों के लिए बहुत अधिक संभावनाएँ हैं।'
टीम कनाडा ट्रेड मिशन और रणनीतिक संदर्भ
पाँचवें दौर के तुरंत बाद 12 से 17 अक्टूबर 2026 तक मंत्री सिद्धू 'टीम कनाडा ट्रेड मिशन' का नेतृत्व करेंगे, जिसमें प्रमुख क्षेत्रों के लगभग 300 कनाडाई व्यापारिक प्रतिनिधि भारत दौरे पर आएँगे। इसका उद्देश्य नए व्यावसायिक अवसर तलाशना और दोनों देशों के उद्यमों के बीच वाणिज्यिक संबंधों को मज़बूत करना है।
यह ऐसे समय में आया है जब कनाडा अमेरिका पर अपनी भारी व्यापारिक निर्भरता कम करने की रणनीति पर काम कर रहा है। ओटावा का लक्ष्य अगले दशक में अमेरिका के बाहर के बाज़ारों में अपना निर्यात दोगुना करना है, जिसमें तेज़ी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था इस रणनीति का केंद्रीय स्तंभ बन चुकी है। आगे की दिशा अब काफ़ी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि ओटावा दौर में बचे हुए तकनीकी मतभेदों को कितनी जल्दी सुलझाया जा सकता है।