भारत-कनाडा CEPA: ऊर्जा, खनिज और एयरोस्पेस में साझेदारी पर पाँचवें दौर की वार्ता जारी
सारांश
मुख्य बातें
भारत-कनाडा व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (CEPA) पर इस सप्ताह पाँचवें दौर की बातचीत चल रही है, जिसमें कनाडा ने खुद को भारत के लिए ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिजों और एयरोस्पेस उत्पादों की दीर्घकालिक आपूर्ति का भरोसेमंद स्रोत बनाने की स्पष्ट इच्छाशक्ति जताई है। दोनों देशों ने 2026 के अंत तक यह समझौता अंतिम रूप देने का लक्ष्य तय किया है।
वार्ता की पृष्ठभूमि और कूटनीतिक रफ्तार
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा ने कहा, 'भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है और उसकी अर्थव्यवस्था करीब सात प्रतिशत सालाना की दर से बढ़ रही है। कनाडा और भारत के बीच व्यापार और निवेश के बड़े मौके हैं, जिनसे दोनों देशों की कंपनियों और कामगारों को फायदा हो सकता है।'
मौजूदा वार्ता से पहले कनाडा के अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री मनिंदर सिद्धू ने दो सप्ताह पहले मुंबई का दौरा किया था, जहाँ उन्होंने भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की। इसके अतिरिक्त, दोनों मंत्रियों ने पिछले सप्ताह मिलवॉकी में G20 व्यापार मंत्रियों की बैठक के दौरान भी CEPA पर हुई प्रगति की समीक्षा की।
गौरतलब है कि इस साल की शुरुआत में सिद्धू ने व्यापार और निवेश फोरम के लिए गोयल और भारत के एक बड़े कारोबारी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी भी की थी, जिसने वार्ता को और गति दी।
ऊर्जा क्षेत्र: सबसे बड़ा अवसर
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, '2035 तक भारत की ऊर्जा जरूरतों में 70 प्रतिशत की बढ़ोतरी होने की उम्मीद है और कनाडा इन जरूरतों को पूरा करने में मदद करने के लिए तैयार है।' इस संदर्भ में LNG कनाडा फेज 2 प्रोजेक्ट का विशेष उल्लेख किया गया, जिसके लिए $33 अरब का निवेश हासिल हो चुका है। इस परियोजना के ज़रिए कनाडा अगले पाँच साल में दुनिया के पाँच सबसे बड़े LNG निर्यातक देशों में शामिल हो सकता है।
परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। मार्च में भारत और कनाडा की यूरेनियम उत्पादक कंपनी कैमेको के बीच $2.6 अरब का समझौता हुआ, जिसके तहत 2035 तक भारत की परमाणु ऊर्जा जरूरतों के लिए करीब 2.2 करोड़ पाउंड यूरेनियम की आपूर्ति की जाएगी।
एयरोस्पेस और महत्वपूर्ण खनिज: नए मोर्चे
ग्लोबल अफेयर्स कनाडा के अनुसार, भारत को आने वाले वर्षों में 2,000 नए विमानों की जरूरत होगी और कनाडा की एयरोस्पेस इंडस्ट्री इस माँग को पूरा करने की स्थिति में है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत का नागरिक उड्डयन क्षेत्र तीव्र विस्तार के दौर से गुज़र रहा है।
महत्वपूर्ण खनिजों के मामले में भी कनाडा का रुझान साफ है — वह भारत की आपूर्ति श्रृंखला में रणनीतिक भागीदार बनना चाहता है, जो चीन पर निर्भरता घटाने की भारतीय रणनीति के अनुरूप है।
व्यापार के आँकड़े और $70 अरब का लक्ष्य
कनाडा सरकार के आँकड़ों के अनुसार, 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार $30.4 अरब रहा। इसमें $13.6 अरब का वस्तु-व्यापार शामिल था — भारत को कनाडा का निर्यात $3.9 अरब और भारत से कनाडा का आयात $9.7 अरब रहा।
दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय वार्षिक व्यापार को बढ़ाकर $70 अरब करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है — जो मौजूदा स्तर से दोगुने से भी अधिक है।
आगे क्या: टीम कनाडा मिशन और संबंध सुधार
कनाडा 12 से 17 अक्टूबर 2026 के बीच भारत में 'टीम कनाडा ट्रेड मिशन' भेजने की तैयारी में है। यह मिशन अमेरिका पर कनाडा की व्यापारिक निर्भरता घटाने और नए बाज़ारों में पैठ बनाने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है।
यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब भारत-कनाडा के द्विपक्षीय संबंधों में धीरे-धीरे सुधार के संकेत मिल रहे हैं। मनिंदर सिद्धू का लक्ष्य ऐसा समझौता करने का है जिससे दोनों देशों के कामगारों और कंपनियों के लिए दीर्घकालिक अवसर सुनिश्चित हों।