4 अक्टूबर 2026
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जयशंकर का म्यूनिख में बड़ा संदेश: उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग का एजेंडा पर्याप्त

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जयशंकर का म्यूनिख में बड़ा संदेश: उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग का एजेंडा पर्याप्त

सारांश

म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 के उद्घाटन सत्र में जयशंकर का संदेश साफ था — बड़े देशों की बाट जोहना बंद करो, उभरती और मध्यम शक्तियों के पास खुद एकजुट होने और दुनिया की दिशा तय करने का पर्याप्त एजेंडा है। शांति से लेकर सेमीकंडक्टर तक, यह भारत की बहुध्रुवीय दुनिया की पैरवी का नया अध्याय है।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 4 अक्टूबर 2026 को म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया।
उन्होंने उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग के लिए 8 क्षेत्रों का रोडमैप रखा — अंतरराष्ट्रीय शांति, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य, प्रतिभा गतिशीलता, कनेक्टिविटी, जलवायु और रक्षा।
भारत-EU व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि 25 वर्षों की बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने आर्थिक जुड़ाव गहरा करने की जरूरत महसूस की।
रक्षा क्षेत्र में 'कौन बनाएगा, कौन खरीदेगा' की पुरानी धारणाएँ टूट रही हैं — स्मार्ट डिफेंस का नया दौर शुरू हो चुका है।
जनसांख्यिकीय असंतुलन दूर करने के लिए प्रतिभा और कौशल गतिशीलता को सबसे प्रभावी उपाय बताया।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 अक्टूबर 2026 को म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि आज की बदलती विश्व व्यवस्था में उभरती और मध्यम शक्तियों के परस्पर सहयोग के लिए एक व्यापक और ठोस एजेंडा मौजूद है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शांति, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य, प्रतिभा गतिशीलता, कनेक्टिविटी, जलवायु कार्रवाई और रक्षा — इन आठ प्रमुख क्षेत्रों में मिलकर काम करने का रोडमैप प्रस्तुत किया।

शांति और सुरक्षा में साझा भूमिका

जयशंकर ने कहा कि जब दुनिया में संघर्ष, टकराव और तनाव चल रहे हों, तो बड़े देशों के अलावा अन्य राष्ट्रों की भी जिम्मेदारी बनती है। उन्होंने कहा, 'अगर संघर्ष चल रहे हैं, अगर टकराव है, अगर तनाव है, तो सबसे बड़े देशों के अलावा, क्या अन्य राष्ट्र अपने संसाधनों को एक साथ ला सकते हैं, एक-दूसरे की कूटनीति का समर्थन कर सकते हैं, वहाँ कुछ करने की कोशिश कर सकते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब यूक्रेन, पश्चिम एशिया और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एकसाथ कई भू-राजनीतिक तनाव बने हुए हैं।

भारत-EU व्यापार समझौते का उदाहरण

निवेश और व्यापार को उभरती शक्तियों के सहयोग का दूसरा बड़ा क्षेत्र बताते हुए जयशंकर ने भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच इस वर्ष संपन्न हुई व्यापार वार्ता का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने लगभग 25 वर्षों तक बातचीत की और अंततः इस नतीजे पर पहुँचे कि बदलती दुनिया में आर्थिक जुड़ाव को गहरा करना और उसमें आने वाली बाधाओं को दूर करना अपरिहार्य है। गौरतलब है कि यह समझौता भारत के लिए अब तक के सबसे बड़े द्विपक्षीय व्यापार करारों में से एक माना जा रहा है।

आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य और प्रतिभा गतिशीलता

जयशंकर ने रेखांकित किया कि आज दुनिया की एक बड़ी वास्तविकता यह है कि जहाँ जनसांख्यिकी है, वहाँ माँग नहीं है — और इस असंतुलन को दूर करने का सबसे प्रभावी तरीका प्रतिभा और कौशल का सुव्यवस्थित प्रवाह है। उन्होंने कहा कि उन्नत विनिर्माण को टिकाऊ बनाए रखने के लिए भी एक निश्चित गतिशीलता जरूरी है। आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन के संदर्भ में उन्होंने कहा, 'चिप्स की दुनिया पर हावी होने या सेमीकंडक्टर उत्पादन के लिए आवश्यक मशीनों का उत्पादन करने के लिए आपको दुनिया का सबसे बड़ा देश होने की ज़रूरत नहीं है।' स्वास्थ्य सुरक्षा पर उन्होंने कहा कि API और फार्मास्यूटिकल्स के अधिक विविध उत्पादन की आज सख्त जरूरत है।

रक्षा क्षेत्र में बदलता समीकरण

जयशंकर ने रक्षा क्षेत्र में हो रहे नाटकीय बदलावों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि 'कौन बनाएगा और कौन खरीदेगा' की पुरानी धारणाएँ अब टूट रही हैं और स्मार्ट डिफेंस के इस नए दौर में नए उत्पादक देश और कंपनियाँ उभर रही हैं। यह टिप्पणी उल्लेखनीय है क्योंकि भारत स्वयं रक्षा निर्यात के मामले में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है और हाल के वर्षों में उसके रक्षा निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।

जलवायु कार्रवाई और आगे की राह

कनेक्टिविटी और जलवायु कार्रवाई को भी सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में गिनाते हुए जयशंकर ने कहा कि दुनिया का बड़ा हिस्सा जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभाव झेल रहा है, और इस पर मिलकर काम करने की वैश्विक मजबूरी है। समापन में उन्होंने कहा, 'मुझे बहुत खुशी है कि आज हमारे सामने एक शुरुआती बिंदु के रूप में यह मुद्दा है, क्योंकि मुझे उम्मीद है कि यह हमारी बैठक को एक मजबूत उद्देश्य और एक स्पष्ट दिशा देगा।' आने वाले सत्रों में इन बिंदुओं पर विस्तृत बहस और ठोस प्रस्तावों की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मध्यम शक्तियाँ मिलकर वैश्विक व्यवस्था को आकार दे सकती हैं। भारत-EU व्यापार समझौते का उदाहरण देना चतुर है, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि वह वार्ता 25 साल लंबी रही। असली सवाल यह है कि क्या ये देश मिलकर काम करने की इच्छाशक्ति और संस्थागत ढाँचा विकसित कर पाएंगे, या यह भी बड़ी बैठकों में बड़ी बातों तक सीमित रहेगा। रक्षा क्षेत्र में 'स्मार्ट डिफेंस' की बात उल्लेखनीय है, क्योंकि भारत खुद इस भूमिका में आगे बढ़ रहा है — लेकिन मुख्यधारा की कवरेज यह नहीं पूछती कि इन सहयोग ढाँचों में जवाबदेही और सत्यापन की व्यवस्था क्या होगी।
RashtraPress
4 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जयशंकर ने म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 में क्या कहा?
विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने 4 अक्टूबर 2026 को म्यूनिख लीडर्स मीटिंग के उद्घाटन सत्र में कहा कि उभरती और मध्यम शक्तियों के लिए सहयोग का एक बड़ा और व्यापक एजेंडा मौजूद है। उन्होंने शांति, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला, स्वास्थ्य, प्रतिभा, कनेक्टिविटी, जलवायु और रक्षा — इन आठ क्षेत्रों में मिलकर काम करने का रोडमैप प्रस्तुत किया।
जयशंकर ने भारत-EU व्यापार समझौते का जिक्र क्यों किया?
जयशंकर ने भारत-EU व्यापार समझौते को उभरती और मध्यम शक्तियों के सफल आर्थिक सहयोग के उदाहरण के रूप में पेश किया। उन्होंने कहा कि लगभग 25 वर्षों की बातचीत के बाद दोनों पक्षों को एहसास हुआ कि बदलती दुनिया में आर्थिक जुड़ाव को गहरा करना और बाधाओं को दूर करना आवश्यक है।
उभरती और मध्यम शक्तियों के सहयोग के एजेंडे में कौन-से क्षेत्र शामिल हैं?
जयशंकर ने आठ प्रमुख क्षेत्र गिनाए — अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा, निवेश और व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला लचीलापन, स्वास्थ्य सेवा (API और फार्मास्यूटिकल्स सहित), प्रतिभा गतिशीलता, कनेक्टिविटी, जलवायु कार्रवाई और रक्षा। उनका तर्क था कि इनमें से किसी भी क्षेत्र में 'विश्व का सबसे बड़ा देश' होना अनिवार्य नहीं है।
जयशंकर ने रक्षा क्षेत्र में क्या बदलाव की बात कही?
उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र में 'कौन बनाएगा और कौन खरीदेगा' की पुरानी धारणाएँ टूट रही हैं और स्मार्ट डिफेंस के दौर में नए उत्पादक देश और कंपनियाँ उभर रहे हैं। यह जरूरी नहीं कि ये पारंपरिक रक्षा-निर्माता देश ही हों।
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग 2026 का क्या महत्व है?
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक मंच है जहाँ वैश्विक नेता भू-राजनीतिक और आर्थिक चुनौतियों पर विचार-विमर्श करते हैं। 2026 की बैठक के उद्घाटन सत्र में जयशंकर का उभरती शक्तियों पर जोर भारत की बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की पैरवी को दर्शाता है।
राष्ट्र प्रेस
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