जयशंकर ने न्यूयॉर्क में P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की, बोले — वैश्विक व्यवस्था दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग अनिवार्य
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च-स्तरीय सत्र के अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (P4M)' शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था गहरे दबाव में है और बहुपक्षीय सहयोग को तत्काल मज़बूत करना ज़रूरी है।
सम्मेलन में जयशंकर के मुख्य संदेश
विदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, 'हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया की मौजूदा व्यवस्था दबाव में है।' उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों में शक्ति-संतुलन धीरे-धीरे बदलता रहा है, लेकिन अब बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को एक अलग और खतरनाक रूप दे दिया है।
उन्होंने आगाह किया कि यदि इस प्रवृत्ति को अनियंत्रित छोड़ा गया, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, 'यहाँ सिर्फ शब्दों या बयानों की बात नहीं है, बल्कि कई ऐसे मुद्दे दाँव पर हैं जिनका वास्तविक असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।'
वैश्विक चुनौतियाँ: '4-एफ संकट' और बहुआयामी खतरे
जयशंकर ने शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, नई प्रौद्योगिकियाँ, विकास के लिए वित्त-पोषण, आतंकवाद का मुकाबला, आपूर्ति-शृंखला सुदृढ़ीकरण और महामारी-तैयारी को उन क्षेत्रों के रूप में गिनाया जो सामूहिक कार्रवाई पर निर्भर हैं।
उन्होंने फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस से जुड़े '4-एफ संकट' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसे अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि जहाँ किसी महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग पर किसी एक पक्ष का अत्यधिक नियंत्रण हो, वहाँ जोखिम घटाने और विकल्प बढ़ाने की नीति अपनानी होगी।
बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की पुकार
विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए केवल उसका समर्थन करना पर्याप्त नहीं है — उसे लागू करने के तंत्र को भी मज़बूत करना होगा। उनके अनुसार, चर्चाओं में अधिक भागीदारी और निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता लंबे समय से आवश्यक है, और यही संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में नई उम्मीद जगा सकती है।
उन्होंने यह भी कहा कि एक जैसी सोच रखने वाले देशों को किसी अहम मुद्दे पर एकजुट होने का भरोसा होना चाहिए, और बहुपक्षीय सहयोग तभी प्रभावी हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और तय मानकों का पूरी गंभीरता से पालन हो।
द्विपक्षीय बैठकें: मोल्दोवा और यूक्रेन
P4M सम्मेलन के इतर, जयशंकर ने UNGA-81 सत्र के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों पर चर्चा हुई। एक्स पर अपनी पोस्ट में जयशंकर ने लिखा कि उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी एक-दूसरे के विचार साझा किए।
इसके अलावा, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी उनकी मुलाकात हुई। जयशंकर ने बताया कि हाल ही में यूक्रेन की अपनी यात्रा के बाद यह बैठक हुई और बातचीत पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम पर केंद्रित रही।
भारत की भूमिका और आगे की राह
गौरतलब है कि भारत P4M का को-स्पॉन्सर है — एक ऐसी पहल जो बहुपक्षीय ढाँचे को वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के साथ जोड़ने की कोशिश करती है। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की माँग तेज़ हो रही है। न्यूयॉर्क में जयशंकर की सक्रिय कूटनीति भारत की 'बहुध्रुवीय विश्व' की नीति को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।