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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की, बोले — वैश्विक व्यवस्था दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग अनिवार्य

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जयशंकर ने न्यूयॉर्क में P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की, बोले — वैश्विक व्यवस्था दबाव में, बहुपक्षीय सहयोग अनिवार्य

सारांश

वैश्विक व्यवस्था दरारों के बीच जयशंकर का न्यूयॉर्क में कड़ा संदेश — '4-एफ संकट' से लेकर आपूर्ति-शृंखला जोखिम तक, उन्होंने P4M मंच से साफ कहा कि बहुपक्षीय सहयोग अब विकल्प नहीं, ज़रूरत है। साथ ही यूक्रेन और मोल्दोवा से द्विपक्षीय बातचीत में भारत की सक्रिय कूटनीति की झलक भी मिली।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में यूरोपीय परिषद अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ P4M शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।
जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और बहुपक्षीय सहयोग को मज़बूत करना अनिवार्य है।
फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस के ' 4-एफ संकट ' को अनदेखा न करने की चेतावनी दी।
उन्होंने UNGA प्रणाली में अधिक पारदर्शिता और भागीदारी की माँग की।
मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई और यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से द्विपक्षीय बैठकें भी हुईं।
भारत P4M का को-स्पॉन्सर है, जो बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की दिशा में देश की नीति का प्रतिबिंब है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के उच्च-स्तरीय सत्र के अवसर पर यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (P4M)' शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की। इस दौरान उन्होंने चेतावनी दी कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था गहरे दबाव में है और बहुपक्षीय सहयोग को तत्काल मज़बूत करना ज़रूरी है।

सम्मेलन में जयशंकर के मुख्य संदेश

विदेश मंत्रालय के अनुसार, सम्मेलन को संबोधित करते हुए जयशंकर ने कहा, 'हम ऐसे समय में मिल रहे हैं जब दुनिया की मौजूदा व्यवस्था दबाव में है।' उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले कुछ दशकों में शक्ति-संतुलन धीरे-धीरे बदलता रहा है, लेकिन अब बढ़ती प्रतिस्पर्धा, भू-राजनीतिक तनाव और वास्तविक संघर्षों ने इस बदलाव को एक अलग और खतरनाक रूप दे दिया है।

उन्होंने आगाह किया कि यदि इस प्रवृत्ति को अनियंत्रित छोड़ा गया, तो अंतरराष्ट्रीय सहयोग की मूल भावना पर ही सवाल खड़े हो सकते हैं। उनके अनुसार, 'यहाँ सिर्फ शब्दों या बयानों की बात नहीं है, बल्कि कई ऐसे मुद्दे दाँव पर हैं जिनका वास्तविक असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।'

वैश्विक चुनौतियाँ: '4-एफ संकट' और बहुआयामी खतरे

जयशंकर ने शांति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा, जलवायु कार्रवाई और जलवायु न्याय, नई प्रौद्योगिकियाँ, विकास के लिए वित्त-पोषण, आतंकवाद का मुकाबला, आपूर्ति-शृंखला सुदृढ़ीकरण और महामारी-तैयारी को उन क्षेत्रों के रूप में गिनाया जो सामूहिक कार्रवाई पर निर्भर हैं।

उन्होंने फ्यूल, फूड, फर्टिलाइजर और फाइनेंस से जुड़े '4-एफ संकट' का विशेष उल्लेख करते हुए कहा कि इसे अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता। साथ ही, उन्होंने जोर दिया कि जहाँ किसी महत्वपूर्ण आपूर्ति मार्ग पर किसी एक पक्ष का अत्यधिक नियंत्रण हो, वहाँ जोखिम घटाने और विकल्प बढ़ाने की नीति अपनानी होगी।

बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार की पुकार

विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि बहुपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए केवल उसका समर्थन करना पर्याप्त नहीं है — उसे लागू करने के तंत्र को भी मज़बूत करना होगा। उनके अनुसार, चर्चाओं में अधिक भागीदारी और निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता लंबे समय से आवश्यक है, और यही संयुक्त राष्ट्र प्रणाली में नई उम्मीद जगा सकती है।

उन्होंने यह भी कहा कि एक जैसी सोच रखने वाले देशों को किसी अहम मुद्दे पर एकजुट होने का भरोसा होना चाहिए, और बहुपक्षीय सहयोग तभी प्रभावी हो सकता है जब अंतरराष्ट्रीय कानून, नियमों और तय मानकों का पूरी गंभीरता से पालन हो।

द्विपक्षीय बैठकें: मोल्दोवा और यूक्रेन

P4M सम्मेलन के इतर, जयशंकर ने UNGA-81 सत्र के दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई से मुलाकात की, जिसमें दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा के क्षेत्र में बढ़ते संबंधों पर चर्चा हुई। एक्स पर अपनी पोस्ट में जयशंकर ने लिखा कि उन्होंने यूक्रेन संघर्ष को लेकर भी एक-दूसरे के विचार साझा किए।

इसके अलावा, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से भी उनकी मुलाकात हुई। जयशंकर ने बताया कि हाल ही में यूक्रेन की अपनी यात्रा के बाद यह बैठक हुई और बातचीत पिछले कुछ हफ्तों के घटनाक्रम पर केंद्रित रही।

भारत की भूमिका और आगे की राह

गौरतलब है कि भारत P4M का को-स्पॉन्सर है — एक ऐसी पहल जो बहुपक्षीय ढाँचे को वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के साथ जोड़ने की कोशिश करती है। यह ऐसे समय में आया है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार और विकासशील देशों के लिए अधिक प्रतिनिधित्व की माँग तेज़ हो रही है। न्यूयॉर्क में जयशंकर की सक्रिय कूटनीति भारत की 'बहुध्रुवीय विश्व' की नीति को व्यावहारिक रूप देने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न रूस-चीन की धुरी में — बल्कि 'रणनीतिक स्वायत्तता' की पैरवी करती है। लेकिन विरोधाभास यह है कि जहाँ भारत बहुपक्षीय सुधारों की माँग करता है, वहीं संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की स्थायी सदस्यता के लिए उसकी दावेदारी को P5 की राजनीतिक इच्छाशक्ति की दरकार है — जो अभी तक नहीं दिखी। '4-एफ संकट' का उल्लेख सटीक है, पर मुख्यधारा की कवरेज अक्सर यह चूक जाती है कि इन्हीं संकटों में भारत की खाद्य सुरक्षा और ऊर्जा आयात-निर्भरता भी दाँव पर है। न्यूयॉर्क में यूक्रेन और मोल्दोवा से बैठकें संकेत देती हैं कि भारत पूर्वी यूरोप में भी अपनी कूटनीतिक उपस्थिति सक्रिय रूप से बना रहा है।
RashtraPress
6 नवंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

P4M शिखर सम्मेलन क्या है और इसमें भारत की क्या भूमिका है?
'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म, इंटरनेशनल लॉ, पीस एंड प्रॉस्पेरिटी (P4M)' एक बहुपक्षीय मंच है जो अंतरराष्ट्रीय कानून और शांति को मज़बूत करने के लिए समान विचारधारा वाले देशों को एकजुट करता है। भारत इस पहल का को-स्पॉन्सर है और विदेश मंत्री जयशंकर ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में इसकी सह-अध्यक्षता की।
जयशंकर ने '4-एफ संकट' से क्या आशय लिया?
'4-एफ संकट' से तात्पर्य फ्यूल (ईंधन), फूड (खाद्य), फर्टिलाइजर (उर्वरक) और फाइनेंस (वित्त) से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों से है। जयशंकर ने कहा कि इन चार क्षेत्रों में उभरे संकट को अपने हाल पर नहीं छोड़ा जा सकता और इनके समाधान के लिए सामूहिक बहुपक्षीय प्रयास ज़रूरी हैं।
जयशंकर ने UNGA सत्र के दौरान किन देशों से द्विपक्षीय बैठकें कीं?
UNGA-81 सत्र के दौरान जयशंकर ने मोल्दोवा के विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई और यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबिहा से अलग-अलग बैठकें कीं। मोल्दोवा के साथ राजनीतिक, आर्थिक और शिक्षा क्षेत्र में द्विपक्षीय संबंधों पर और यूक्रेन के साथ हालिया घटनाक्रम पर चर्चा हुई।
जयशंकर ने बहुपक्षीय व्यवस्था में क्या सुधार माँगे?
जयशंकर ने चर्चाओं में अधिक भागीदारी और निर्णय-प्रक्रिया में पारदर्शिता की माँग की। उन्होंने कहा कि बहुपक्षीय सहयोग तभी प्रभावी होगा जब अंतरराष्ट्रीय कानून और तय मानकों का पालन सुनिश्चित हो और इसे लागू करने के तंत्र को मज़बूत बनाया जाए।
P4M सम्मेलन का आयोजन किस संदर्भ में हुआ?
यह सम्मेलन संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्च-स्तरीय सत्र (UNGA-81) के अवसर पर 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में हुआ। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव, यूक्रेन संघर्ष और आपूर्ति-शृंखला व्यवधानों की पृष्ठभूमि में इस मंच का महत्व और बढ़ गया है।
राष्ट्र प्रेस
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