22 सितंबर 2026
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जयशंकर की सह-अध्यक्षता में भारत समेत 7 देशों ने लॉन्च की 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' पहल, UN सुधार पर जोर

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जयशंकर की सह-अध्यक्षता में भारत समेत 7 देशों ने लॉन्च की 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' पहल, UN सुधार पर जोर

सारांश

न्यूयॉर्क में UNGA के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान भारत ने एक नई वैश्विक साझेदारी में कदम रखा — पी4एम। जयशंकर की सह-अध्यक्षता में 7 देशों और EU ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र सुधार, अंतरराष्ट्रीय कानून और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था के लिए एक साझा मंच खड़ा किया।

मुख्य बातें

भारत , ऑस्ट्रेलिया , बारबाडोस , ब्राजील , कनाडा , केन्या और यूरोपीय संघ ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' (पी4एम) पहल लॉन्च की।
जयशंकर ने पहले पी4एम शिखर सम्मेलन की सह-अध्यक्षता की।
संयुक्त घोषणापत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून , संप्रभु समानता , क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता जताई गई।
घोषणापत्र में UN80 जैसी पहलों के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र सुधार का समर्थन किया गया।
जयशंकर ने ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त की वैश्विक चुनौतियों तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए नए सुरक्षा ढाँचे की ज़रूरत पर बल दिया।
पी4एम पहल सभी क्षेत्रों के अन्य देशों के लिए भी खुली रखी गई है।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर की सह-अध्यक्षता में भारत समेत सात देशों और यूरोपीय संघ ने 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के इतर 'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' (पी4एम) पहल की आधिकारिक शुरुआत की। पहले पी4एम शिखर सम्मेलन के बाद जारी संयुक्त घोषणापत्र में बहुपक्षीय व्यवस्था को मज़बूत करने, अंतरराष्ट्रीय कानून के सम्मान और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर बल दिया गया।

पहल के सह-प्रायोजक और उद्देश्य

पी4एम के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत, ऑस्ट्रेलिया, बारबाडोस, ब्राजील, कनाडा, केन्या और यूरोपीय संघ शामिल हैं। पहल का मुख्य उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों और महाद्वीपों के देशों को एक साझा मंच पर लाकर बहुपक्षीय व्यवस्था को सुदृढ़ करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करना तथा शांति और समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देना है। सह-प्रायोजकों ने इस पहल को सभी महाद्वीपों के अन्य देशों के लिए भी खुला रखने की बात कही है।

यह पहल ऐसे समय शुरू हुई है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में बहुपक्षीय व्यवस्था में सुधार, वैश्विक शांति, आर्थिक अस्थिरता, जलवायु परिवर्तन, उभरती प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय कानून जैसे मुद्दे प्रमुख चर्चा में हैं। गौरतलब है कि यह भारत की उस दीर्घकालिक माँग से भी मेल खाती है जिसमें वह संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सहित वैश्विक संस्थाओं में व्यापक सुधार की वकालत करता आया है।

संयुक्त घोषणापत्र के प्रमुख बिंदु

सम्मेलन के बाद जारी घोषणापत्र में कहा गया कि दुनिया इस समय बड़े बदलावों के दौर से गुज़र रही है। बढ़ते ध्रुवीकरण, संघर्षों के विस्तार, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन, संरक्षणवाद, दबाव की राजनीति और बल प्रयोग की धमकियों पर गहरी चिंता जताई गई।

घोषणापत्र में स्पष्ट किया गया कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर पर आधारित बहुपक्षीय व्यवस्था आज भी आवश्यक है, लेकिन इसे आज की अधिक जटिल, परस्पर जुड़ी और बहुध्रुवीय दुनिया के अनुरूप ढाला जाना चाहिए। इसमें अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता, क्षेत्रीय अखंडता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई गई। बल प्रयोग या उसकी धमकी पर रोक तथा अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून और मानवाधिकारों के सम्मान की बात भी कही गई।

जयशंकर के बयान और भारत की प्राथमिकताएँ

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सम्मेलन में कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और ऐसे समय में बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका और मज़बूत करनी होगी। उन्होंने अधिक सहभागी विचार-विमर्श और पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया की आवश्यकता बताई।

जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर ईंधन, खाद्य, उर्वरक और वित्त से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने उभरती प्रौद्योगिकियों और उनसे जुड़े जोखिमों से निपटने के लिए नए ढाँचे और सुरक्षा उपायों की ज़रूरत पर बल दिया। आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की आवश्यकता भी रेखांकित की, ताकि किसी एक महत्वपूर्ण मार्ग में व्यवधान का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक प्रभाव न पड़े।

यूरोपीय परिषद अध्यक्ष का बयान

यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने सम्मेलन के बाद कहा कि विभिन्न महाद्वीपों और अलग-अलग पृष्ठभूमि वाले देशों के बीच यह साझा समझ है कि मौजूदा वैश्विक चुनौतियों का समाधान कोई एक देश अकेले नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि पी4एम पहल साझा सिद्धांतों को ठोस कार्रवाई में बदलने के लिए एक मंच के रूप में काम करेगी।

आगे का रोडमैप

सह-प्रायोजक देशों ने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय के लिए एक तंत्र बनाने और सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई है। घोषणापत्र में यूएन80 जैसी पहलों के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन किया गया। जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता, प्रदूषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल बदलाव, वैश्विक स्वास्थ्य और विकास वित्त जैसे मुद्दों पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता भी रेखांकित की गई। यह पहल अब वैश्विक बहुपक्षीय सुधार की दिशा में एक नई साझेदारी का आधार बनने की ओर अग्रसर है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक सक्रिय बहुपक्षीय निर्माता की भूमिका में दिखना चाहता है। हालाँकि, इस पहल की असली परीक्षा यह होगी कि क्या 'साझा सिद्धांत' ठोस कार्रवाई में तब्दील होंगे, जब सदस्य देशों के हित आपस में टकराएँगे — जैसे कि ब्राजील और कनाडा के व्यापार नीति पर अलग-अलग रुख। यह भी ध्यान देने योग्य है कि पी4एम की सदस्यता सूची में कोई प्रमुख अफ्रीकी या पश्चिम एशियाई देश नहीं है, जो 'समावेशी' होने के दावे को चुनौती देता है। बिना स्पष्ट क्रियान्वयन तंत्र के, यह पहल एक और राजनयिक घोषणापत्र बनकर रह सकती है।
RashtraPress
22 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'पार्टनर्स फॉर मल्टीलेटरलिज्म' (पी4एम) पहल क्या है?
पी4एम एक नई बहुपक्षीय साझेदारी पहल है जिसे 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सप्ताह के दौरान लॉन्च किया गया। इसका उद्देश्य विभिन्न क्षेत्रों के देशों को एक मंच पर लाकर बहुपक्षीय व्यवस्था को मज़बूत करना, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान सुनिश्चित करना और शांति व समावेशी समृद्धि को बढ़ावा देना है।
पी4एम के सह-प्रायोजक देश कौन-कौन से हैं?
पी4एम के शुरुआती सह-प्रायोजकों में भारत , ऑस्ट्रेलिया , बारबाडोस , ब्राजील , कनाडा , केन्या और यूरोपीय संघ शामिल हैं। पहल को सभी क्षेत्रों के अन्य देशों के लिए भी खुला रखा गया है।
भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने पी4एम सम्मेलन में क्या कहा?
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि मौजूदा वैश्विक व्यवस्था दबाव में है और बहुपक्षवाद को अपनी भूमिका और मज़बूत करनी होगी। उन्होंने अधिक सहभागी विचार-विमर्श, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया, ईंधन-खाद्य-उर्वरक-वित्त से जुड़ी चुनौतियों और उभरती प्रौद्योगिकियों के लिए नए सुरक्षा ढाँचे की ज़रूरत पर बल दिया।
पी4एम घोषणापत्र में संयुक्त राष्ट्र सुधार पर क्या कहा गया?
घोषणापत्र में यूएन80 जैसी पहलों के ज़रिए संयुक्त राष्ट्र में सुधार का समर्थन किया गया। बहुपक्षीय संस्थाओं को अधिक प्रभावी, प्रतिनिधित्वपूर्ण और समावेशी बनाने के लिए सुधारों की आवश्यकता पर जोर दिया गया और कहा गया कि मौजूदा व्यवस्था को आज की बहुध्रुवीय दुनिया के अनुरूप ढाला जाना चाहिए।
पी4एम पहल का अगला कदम क्या है?
सह-प्रायोजक देशों ने वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय के लिए एक तंत्र बनाने और सहयोग के प्राथमिक क्षेत्रों की पहचान करने पर सहमति जताई है। पहल अन्य देशों के लिए भी खुली है और इसे एक स्थायी बहुपक्षीय सहयोग मंच के रूप में विकसित किया जाएगा।
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