30 जून 2026
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जयशंकर ने 'ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम' में कहा — मोबिलिटी भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मजबूत स्तंभ

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जयशंकर ने 'ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम' में कहा — मोबिलिटी भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग का मजबूत स्तंभ

सारांश

विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया कि मोबिलिटी भारत की विदेश नीति का अभिन्न हिस्सा है — महज रोजगार निर्यात नहीं। 26 देशों के साथ 28 समझौते और ई-माईग्रेट पर 50 लाख+ क्लियरेंस इस प्रतिबद्धता की ठोस मिसाल हैं।

मुख्य बातें

जयशंकर ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में 'ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम' का उद्घाटन सत्र संबोधित किया।
भारत अब तक 26 देशों के साथ 28 माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते कर चुका है।
ई-माईग्रेट वी.2 प्लेटफॉर्म के जरिए अब तक 50 लाख से अधिक इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किए गए।
जयशंकर ने अवैध प्रवास, फर्जी एजेंटों और मानव तस्करी से सख्ती से निपटने की जरूरत पर बल दिया।
AI, ऑटोमेशन और ग्रीन इकोनॉमी के कारण वैश्विक रोजगार बाजार में बड़े बदलाव आने की संभावना जताई।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने 30 जून 2026 को नई दिल्ली में आयोजित 'ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम' के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि भारत लोगों की आवाजाही यानी मोबिलिटी को अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक अत्यंत महत्वपूर्ण आधार मानता है। उन्होंने कहा कि भारत की मोबिलिटी साझेदारियाँ आपसी लाभ, साझा जिम्मेदारी और दीर्घकालिक टिकाऊ विकास के सिद्धांतों पर टिकी हैं।

मोबिलिटी की व्यापक परिभाषा

जयशंकर ने मोबिलिटी की अवधारणा को केवल भौगोलिक आवाजाही तक सीमित नहीं रखा। उन्होंने कहा, "ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी सिर्फ लोगों के एक से दूसरी जगह जाने तक सीमित नहीं है। यह लोगों की उम्मीदों को अवसरों से जोड़ने की बात है। यह प्रतिभा को जरूरतों से जोड़ने की बात है। इसका उद्देश्य ऐसे रास्ते बनाना है, जिनसे लोग आर्थिक विकास में योगदान दे सकें।" उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य आर्थिक प्रगति और सामाजिक कल्याण दोनों को एक साथ बढ़ावा देना है।

28 माइग्रेशन समझौते और ई-माईग्रेट प्लेटफॉर्म

विदेश मंत्री ने बताया कि भारत अब तक 26 देशों के साथ 28 माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते कर चुका है, और कई अन्य देशों के साथ बातचीत अभी जारी है। उन्होंने ई-माईग्रेट वी.2 प्लेटफॉर्म का विशेष उल्लेख किया, जिसकी शुरुआत करीब दो वर्ष पूर्व की गई थी। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से अब तक 50 लाख से अधिक इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किए जा चुके हैं। जयशंकर ने कहा कि यह डिजिटल व्यवस्था प्रवासी कामगारों की सुरक्षा के लिए तकनीक के उपयोग का एक अनुकरणीय उदाहरण बन गई है।

अवैध प्रवास और शोषण पर कड़ा रुख

जयशंकर ने अवैध प्रवास, फर्जी एजेंटों, शोषणकारी गतिविधियों और मानव तस्करी जैसी समस्याओं से सख्ती से निपटने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ये समस्याएँ कानूनी प्रवास व्यवस्था की विश्वसनीयता को कमज़ोर करती हैं और कमजोर वर्गों को खतरे में डालती हैं। इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड (ICWF), MADAD पोर्टल और बेहतर कांसुलर सेवाओं को विदेशों में बसे भारतीय नागरिकों की समय पर सहायता के उपकरण के रूप में रेखांकित किया गया।

AI, ग्रीन इकोनॉमी और भविष्य की चुनौतियाँ

विदेश मंत्री ने भविष्य के रोजगार परिदृश्य पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन की तेज़ रफ्तार से वैश्विक रोजगार बाजारों में बड़े बदलाव आएंगे। ग्रीन इकोनॉमी नई तरह के कौशल की माँग पैदा करेगी, जबकि बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं और देखभाल क्षेत्र में श्रमशक्ति की जरूरत भी बढ़ेगी। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब दुनिया के कई विकसित देश कुशल कामगारों की कमी से जूझ रहे हैं और भारत का युवा जनसांख्यिकीय लाभांश इस अंतर को भरने की क्षमता रखता है।

फोरम का महत्व और आगे की राह

जयशंकर ने कहा कि मोबिलिटी से जुड़े अवसर और चुनौतियाँ किसी एक देश या एक सरकारी विभाग के बूते हल नहीं हो सकतीं। ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम नीति निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, नियोक्ताओं और विशेषज्ञों को एक मंच पर लाकर नए विचारों और साझेदारियों को बढ़ावा देगा। उन्होंने विश्वास जताया कि यह फोरम वैश्विक प्रतिभा आवाजाही के भविष्य को अधिक न्यायसंगत और टिकाऊ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

26 देशों के साथ 28 समझौते प्रभावशाली आँकड़े हैं, असली कसौटी यह है कि इन समझौतों ने जमीनी स्तर पर प्रवासी कामगारों के शोषण को कितना कम किया है। ई-माईग्रेट पर 50 लाख क्लियरेंस तकनीकी सफलता की कहानी है, लेकिन खाड़ी देशों में फँसे भारतीय कामगारों की समस्याएँ अभी भी सुर्खियों में आती रहती हैं। फोरम जैसे बहु-हितधारक मंच तभी सार्थक होते हैं जब उनके निष्कर्ष बाध्यकारी नीतिगत बदलावों में तब्दील हों — न कि केवल घोषणापत्रों तक सिमटकर रह जाएँ।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ह्यूमन रिसोर्स मोबिलिटी फोरम क्या है?
यह नई दिल्ली में आयोजित एक बहु-हितधारक मंच है जिसमें नीति निर्माता, उद्योग जगत के नेता, नियोक्ता और विशेषज्ञ वैश्विक प्रतिभा आवाजाही को बेहतर बनाने के तरीकों पर विचार-विमर्श करते हैं। 30 जून 2026 को इसके उद्घाटन सत्र को विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संबोधित किया।
भारत ने अब तक कितने माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते किए हैं?
भारत ने अब तक 26 देशों के साथ 28 माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते या इसी तरह के करार किए हैं। कई अन्य देशों के साथ बातचीत अभी जारी है।
ई-माईग्रेट वी.2 प्लेटफॉर्म क्या है और इसका क्या महत्व है?
ई-माईग्रेट वी.2 भारत सरकार का डिजिटल प्लेटफॉर्म है जो प्रवासी कामगारों को सुरक्षित, पारदर्शी और कानूनी तरीके से विदेश जाने की सुविधा देता है। इसकी शुरुआत के बाद से अब तक 50 लाख से अधिक इमिग्रेशन क्लियरेंस जारी किए जा चुके हैं।
भारत अवैध प्रवास और मानव तस्करी से निपटने के लिए क्या कर रहा है?
विदेश मंत्री जयशंकर ने अवैध प्रवास, फर्जी एजेंटों और मानव तस्करी को कानूनी प्रवास व्यवस्था की विश्वसनीयता के लिए गंभीर खतरा बताया। इनसे निपटने के लिए ICWF, MADAD पोर्टल, ई-माईग्रेट और बेहतर कांसुलर सेवाओं को सक्रिय रूप से उपयोग किया जा रहा है।
AI और ग्रीन इकोनॉमी का भारतीय प्रवासी कामगारों पर क्या असर पड़ेगा?
जयशंकर के अनुसार, AI और ऑटोमेशन की प्रगति से वैश्विक रोजगार बाजार में बड़े बदलाव आएंगे। ग्रीन इकोनॉमी नए कौशल की माँग पैदा करेगी, और बढ़ती उम्र वाली आबादी के कारण स्वास्थ्य सेवाओं व देखभाल क्षेत्र में कामगारों की जरूरत बढ़ेगी — जो भारत के युवा कार्यबल के लिए अवसर हो सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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