ओमान में जयशंकर ने भारतीय समुदाय से की मुलाकात, भारत-ओमान साझेदारी मजबूत करने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार, 10 जुलाई 2026 की सुबह ओमान में रहने वाले भारतीय समुदाय के प्रतिनिधियों से मुलाकात की और भारत-ओमान द्विपक्षीय संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने में प्रवासी भारतीयों की भूमिका की सराहना की। यह मुलाकात उनकी कुवैत यात्रा की समाप्ति के तुरंत बाद हुई, जो खाड़ी क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक सक्रियता का हिस्सा है।
ओमान में भारतीय समुदाय से संवाद
जयशंकर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, 'शुक्रवार सुबह ओमान में रहने वाले भारतीय समुदाय के लोगों से बहुत अच्छी मुलाकात हुई। भारत-ओमान के रिश्तों को और मजबूत बनाने को लेकर उनका उत्साह साफ दिखाई दिया। समाज के लिए और भारत-ओमान साझेदारी को मजबूत करने में उनके अहम योगदान की मैंने सराहना की।' उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रवासी भारतीय न केवल आर्थिक सेतु का काम करते हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और सामाजिक संबंधों को भी जीवंत रखते हैं।
कुवैत यात्रा: प्रधानमंत्री से मुलाकात और समुदाय से संवाद
इससे पहले जयशंकर ने कुवैत यात्रा के दौरान बुधवार को वहां के प्रधानमंत्री शेख अहमद अब्दुल्ला अल-अहमद अल-सबाह से मुलाकात की। उन्होंने कुवैत में रहने वाले भारतीय समुदाय की भलाई और देखभाल के लिए कुवैत सरकार के सहयोग की सराहना की और भारत-कुवैत संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बनाने के साझा विज़न का स्वागत किया।
कुवैत स्थित भारतीय दूतावास ने एक्स पर जानकारी दी कि जयशंकर ने वहाँ के भारतीय समुदाय से बातचीत में भारत के तेज़ी से हो रहे विकास और वैश्विक मंच पर देश की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला। जयशंकर ने स्वयं कहा, 'कुवैत में भारतीय समुदाय के लोगों से मिलकर अच्छा लगा। भारत और कुवैत की दोस्ती को मजबूत बनाने में उनकी भूमिका बहुत अहम है। उनके अनुभव और सुझाव हमारे लिए बेहद मूल्यवान हैं।'
आगे का कार्यक्रम: यूएनएससी अभियान और ईयू बैठक
खाड़ी दौरे के बाद जयशंकर 13 जुलाई को न्यूयॉर्क रवाना होंगे, जहाँ वे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में 2028-29 की अवधि के लिए भारत की अस्थायी सदस्यता के आधिकारिक चुनाव अभियान की शुरुआत करेंगे। यह कदम वैश्विक शासन में भारत की बढ़ती भागीदारी की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इसके बाद 14-15 जुलाई को ब्रसेल्स में आयोजित भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) ट्रेड एंड टेक्नोलॉजी काउंसिल की तीसरी बैठक में भाग लेंगे। इस दौरान वे यूरोपीय संघ और बेल्जियम के अपने समकक्षों से भी द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
खाड़ी में भारत की कूटनीतिक सक्रियता
गौरतलब है कि खाड़ी देशों में लाखों की संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं, जो प्रतिवर्ष अरबों रुपये का विदेशी मुद्रा प्रेषण भारत भेजते हैं। यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'एक्ट वेस्ट' नीतियों के तहत खाड़ी देशों के साथ संबंधों को नई ऊँचाई देने में जुटा है। आने वाले हफ्तों में न्यूयॉर्क और ब्रसेल्स की यात्राएँ भारतीय विदेश नीति के बहुआयामी स्वरूप को और स्पष्ट करेंगी।